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अटल रोहतांग सुरंग: यहां पढ़िए सामरिक तौर पर भारत को क्या मिलने जा रहा है फायदा?

By Prabhat khabar Digital
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रोहतांग अटल  सुरंग: यहां पढ़िए सामरिक तौर पर भारत को क्या मिलने जा रहा है फायदा?
रोहतांग अटल सुरंग: यहां पढ़िए सामरिक तौर पर भारत को क्या मिलने जा रहा है फायदा?
पीटीआई

सामरिक महत्व वाला रोहतांग अटल सुरंग बनकर तैयार है. 10 हजार फीट की ऊंचाई पर किसी हाईवे पर बनी एकमात्र सबसे लंबी सुरंग अटल सुरंग है. मनाली के पास रोहतांग में अटल सुरंग करीब-करीब बनकर तैयार हो चुका है. इसका उद्घाटन सितंबर महीने में पीएम नरेंद्र मोदी कर सकते हैं. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर सुरंग का निर्माण मई 2020 तक होना था. लेकिन, कोरोना वायरस संकट और लॉकडाउन के कारण सुरंग के निर्माण में देरी हुई.

हर मौसम में मिलेगी कनेक्टिविटी 

उत्तर भारत के कठिन पहाड़ी इलाके में बनी अटल सुरंग के निर्माण की शुरूआत काफी पुरानी है. सुरंग के निर्माण से भारत को रणनीतिक तौर पर बढ़त मिलेगी. साथ ही सुरंग हिमाचल प्रदेश के लिहाज से भी काफी अहम है. सुरंग से हिमाचल प्रदेश और लद्दाख से सालोंभर सड़क संपर्क बना रह सकता है. सामरिक दृष्टि से भी सुरंग का निर्माण काफी फायदेमंद साबित होने वाला है.

रोहतांग सुरंग प्रोजेक्ट को जानिए

प्रोजेक्ट पर पहली बार साल 1983 में चर्चा की गई थी. मई 1990 में रोहतांग पास पर सुरंग के लिए एक स्टडी की गई. स्टडी के आधार पर प्रोजेक्ट के​ लिए भूवैज्ञानिक रिपोर्ट साल 2004 में प्रस्तुत किया गया. डिजाइन से जुड़ी रिपोर्ट को दिसंबर 2006 में दिया गया. वहीं, प्रोजेक्ट को तकनीकी मंजूरी साल 2003 में मिली. 2007 में सुरंग निर्माण के लिए टेंडर निकाले गए. 2010 में तत्कालीन यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने रोहतांग सुरंग प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया था.

सुरंग के निर्माण में होती गई देरी

प्रोजेक्ट को 2015 तक पूरा होना था. हालांकि, कई तरह की दिक्कतों के कारण सुरंग के निर्माण में देरी हुई. पहाड़ी इलाकों के साथ ही दूसरे कामों ने सुरंग को बनने में विलंब किया. मूल रूप से सुरंग की लंबाई 8.8 किमी तय की गई थी. जबकि, सुरंग 9 किमी लंबी हो चुकी है. सुरंग के साथ ही उत्तरी और दक्षिणी पोर्टल पर पुलों का निर्माण भी लगभग पूरा हो चुका है.

अटल सुरंग की बड़ी खासियतें

- मनाली की तरफ से सुरंग तक पहुंचने के लिए स्नो गैलरी है.

- सालोंभर मनाली को कनेक्टिविटी मिलती रहेगी.

- सुरंग के भीतर इमरजेंसी एग्जिट का निर्माण भी किया गया है.

- हर 150 मीटर पर टेलीफोन, हर 60 मीटर पर फायर हायड्रेंट लगाए गए हैं.

- हर 500 मीटर पर इमरजेंसी एग्जिट बनाए गए हैं.

- सुरंग के अंदर वापस मुड़ने के लिए हर 2.2 किमी के बाद टर्निंग है.

- हर 250 मीटर पर सीसीटीवी और हर एक किमी पर एयर क्वालिटी निगरानी सिस्टम है.

- सुरंग के भीतर अधिकतम 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार हो सकती है.

- करीब 1,500 ट्रक और 3,000 कारें प्रतिदिन सुरंग का इस्तेमाल कर सकेंगी.

Posted : Abhishek.

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