दलित कारोबारियों से बोले मोदी, मैंने भी सहे अपमान

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नयी दिल्‍ली : विज्ञान भवन में दलित चैंबर ऑफ कॉमर्स के सम्‍मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आपकी तरह अपमान मैंने भी सहा है. आज भी सामंतवादी मानसिकता दिखती है. उन्‍होंने कहा कि यहां उपस्थित लोगों ने केवल कर्तव्‍य की चर्चा नहीं की बल्कि कर्तव्‍य कर के दिखाया है. उन्‍होंने […]

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नयी दिल्‍ली : विज्ञान भवन में दलित चैंबर ऑफ कॉमर्स के सम्‍मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आपकी तरह अपमान मैंने भी सहा है. आज भी सामंतवादी मानसिकता दिखती है. उन्‍होंने कहा कि यहां उपस्थित लोगों ने केवल कर्तव्‍य की चर्चा नहीं की बल्कि कर्तव्‍य कर के दिखाया है. उन्‍होंने कहा कि आज बाबा साहेब अंबेदकर होते तो इस सभा को देखकर उनको काफी प्रशन्‍नता होती. बाबा साहेब ने हमें जो सिखाया उसी का रास्‍ता आप लोगों ने अपनाया है. इस समारोह में ऐसे लोग हैं जो सरकार की तिजोरी में सैकड़ों रुपये का टैक्‍ट भरते हैं और लाखों नौजवानों को रोजगार देते हैं. ये वो लोग हैं जो सरकार की तिजोरी भी भरते हैं और गरीबों का पेट भी.

मोदी ने कहा कि सम्‍मेलन में जो लोग शामिल हुए हैं वे अपने पैसों से होटलों में ठहरें हैं और शुल्‍क देकर सम्‍मेलन में भाग लिये हैं. ऐसे लोगों से मिलकर काफी अच्‍छा रहा. मोदी ने कहा कि बाबा साहेब को लोग संविधान का निर्माता तो जानते हैं लेकिन एक अर्थशास्‍त्री के रूप में कम ही लोग जानते हैं. बाबा साहेब की कल्‍पना को मानते तो आज जो देश के सामने आर्थिक समस्‍या है वह नहीं होती. रिजर्व बैंक बाबा साहेब की ही परिकल्‍पना का नतीजा है. उन्‍होंने कहा कि एक गरीब को अगर ऋण लेना हो तो उसे लोहे के चने चबाने पड़ते हैं. देश का एक बड़ा वर्ग विभिन्‍न कसौटियों पर कसा हुआ वर्ग है और तमाम परेशानियों से वाकिफ है.

मोदी ने कहा कि इस वर्ग ने जिंदगी के हर कष्‍ट और अपमान झेलते हुए मुसीबतों का सामना किया. मोदी ने कहा कि लोहे का मूल्‍य होता है लेकिन स्‍टील का ज्‍यादा होता है क्‍योंकि स्‍टील एक कड़ी प्रक्रिया से गुजरकर सामने आता है. मोदी ने कहा कि जब इंसान जीवन में परेशान हो जाता है वह आत्‍महत्‍या करने का मन बना लेता है. मैं ऐसे लोगों से कहता हूं कि जिसके मन में भी आत्‍महत्‍या का विचार आता हो तो उसे कल्‍पना से बात कर लेनी चाहिए. कल्‍पना के बारे में काफी कम लोग जानते हैं कि उसने अपने जीवन का कहां से कहां पहुंचाया है. गौरतलब है कि कल्‍पना सरोज एक उद्योगपति है जो दलित समाज से आती है और तमाम कठिनाइयों के बाद भी उन्‍होंने हार नहीं मानी और जीवन में एक मुकाम हासिल किया.

मोदी ने कहा कि समाज के अंदर वह ताकत है जो हमें बुरे विचारों से बचाता है. प्रधानमंत्री ने कहा कि बैंकों को भी दबे-कुचले लोगों को बढ़-चढ़ कर लोन देना चाहिए. प्रधानमंत्री ने मुद्रा योजना का जिक्र करते हुए कहा कि 80 लाख लोगों को बिना किसी गारंटी के ऋण दिया गया. ऐसे लोगों में अधिकतर दलित हैं. पीएम ने कहा कि छोटे-छोटे कारोबारी देश के करीब 14 करोड़ लोगों को रोजगार देता है. बड़ी-बड़ी कंपनियां तड़क-भड़क दिखलाकर बैंकों से ऋण ले लेते हैं और एक गांव में 10-15 लोगों को रोजगार देने वाले छोटे कारोबारी को आसानी से ऋण नहीं मिल पाता है. इसके लिए सरकार काम कर रही है.

मोदी ने कहा कि आने वाला समय युवाओं का है. यहां की 65 फीसदी जनसंख्‍या 35 साल से कम आयु की है. इनको मार्गदर्शन की आवश्‍यकता है. लोग खुद आगे बढ़ें और दूसरों को भी आगे ले जाएं. केंद्र में आपकी सरकार है. ये आपके हर हित का खयाल रखेगी. मोदी ने कहा कि दिल्‍ली में आपका एक आदमी बैठा है. वह आपके काम को प्राथमिकता देगा. नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश के औद्योगिकरण का सबसे बड़ा फायदा निचले तबके के लोगों को होता है. दलितों के पास जमीन नहीं है कि वो खेती करेंगे. उनको रोजगार मिलना चाहिए. बाबा साहेब के सपनों को हम सब लोगों को मिलकर पूरा करना होगा.

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