सफल रहा संसद का शीतकालीन सत्र, लोकसभा में 14 जबकि राज्यसभा में इतने विधेयक हुए पारित
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 13 Dec 2019 2:55 PM
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नयी दिल्लीः संसद का 18 नवंबर से शुरू हुआ शीतकालीन सत्र शुक्रवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया. 20 बैठकों वाले इस सत्र को राष्ट्रगीत की धुन बजाये जाने के बाद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया. इससे पहले राज्यसभा में सभापति एम वेंकैया नायडू ने अपने पारंपरिक भाषण में सत्र के दौरान हुए […]
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नयी दिल्लीः संसद का 18 नवंबर से शुरू हुआ शीतकालीन सत्र शुक्रवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया. 20 बैठकों वाले इस सत्र को राष्ट्रगीत की धुन बजाये जाने के बाद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया. इससे पहले राज्यसभा में सभापति एम वेंकैया नायडू ने अपने पारंपरिक भाषण में सत्र के दौरान हुए कामकाज पर संतोष जताते हुए इसे ऐतिहासिक करार दिया. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस अवसर पर अपने पारंपरिक भाषण में कहा कि सभा की उत्पादकता 115 प्रतिशत दर्ज की गयी.
सत्र के दौरान नागरिकता (संशोधन) विधेयक तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति आरक्षण को दस साल बढ़ाने संबंधी संविधान (126वां) संशोधन विधेयकों पर सदन में लंबी चर्चा हुई तथा विपक्ष एवं सत्तापक्ष के लोगों ने खुलकर अपने विचार रखे. इस दौरान ई-सिगरेट पर रोक लगाने संबंधी विधेयक, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र संबंधी विधेयक सहित विभिन्न विधेयकों को चर्चा कर पारित किया गया.
साथ ही उच्च सदन में लंबे अंतराल के बाद अनुदान की अनुपूरक मांगों को चर्चा के बाद लोकसभा को लौटाया गया. लोकसभा इन्हें पहले ही पारित कर चुकी थी. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सत्र के दौरान सदन की 20 बैठकें हुई, जो 130 घंटे 45 मिनट चलीं. वर्ष 2019-20 के लिये अनुदान की अनुपूरक मांगों पर 5 घंटे और 5 मिनट चर्चा हुई.
उन्होंने कहा कि सत्र के दौरान 18 सरकारी विधेयक पुन:स्थापित हुए और कुल मिलाकर 14 विधेयक पारित हुए. बिरला ने कहा कि 140 तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर दिये गए और औसतन प्रतिदिन लगभग 7.36 प्रश्नों के उत्तर दिये गए. इसके अलावा प्रतिदिन 20.42 अनुपूरक प्रश्नों के उत्तर दिये गए. प्रतिदिन औसतन 58.37 मामले उठाये गए. नियम 377 के अधीन कुल 364 मामले उठाए गए. उन्होंने कहा, इस प्रकार से सभा की उत्पादकता 115 प्रतिशत दर्ज की गयी. राज्यसभा में सत्र के दौरान 108 घंटे 33 मिनट तक निर्धारित कामकाज होना था. विभिन्न मुद्दों पर हंगामे के चलते सदन के कामकाज में 11 घंटे 47 मिनट का नुकसान हुआ. किंतु सदस्यों ने 10 घंटे 52 मिनट अधिक काम करके सदन की उत्पादकता को 100 प्रतिशत पर ला दिया.
सत्र के दौरान उच्च सदन में कुल 15 विधेयक पारित किये गये या विचार कर लौटाये गये. इनमें ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) विधेयक शामिल है जो इस तरह के व्यक्तियों के हितों के लिये लाया गया अपनी तरह का पहला विधेयक है. सत्र के दौरान सदस्यों ने दो ध्यानाकर्षण प्रस्ताव तथा शून्यकाल में एवं विशेष उल्लेख के जरिये लोकमहत्व के विभिन्न मुद्दे उठाये. यह सत्र प्रश्नकाल के लिहाज से भी 1971 के बाद पिछले 49 सालों में सबसे बेहतरीन रहा.
इस दौरान कुल 255 मौखिक सवालों में से 171 का जवाब दिया गया जो कुल सवालों का 67 प्रतिशत है. इस प्रकार सत्र के दौरान प्रतिदिन 9.5 मौखिक सवालों का जवाब दिया गया. सभापति ने राज्यसभा के 250वें सत्र को ऐतिहासिक सत्र करार देते हुये कहा कि इसकी ‘गंभीरता एवं संक्षिप्तता’ महत्वपूर्ण रही.
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