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#METOO : अब डरना नहीं-चुप रहना नहीं, पढ़ें क्या कहतीं हैं पटना की महिलाएं

Updated at : 12 Oct 2018 1:28 PM (IST)
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#METOO : अब डरना नहीं-चुप रहना नहीं, पढ़ें क्या कहतीं हैं पटना की महिलाएं

यह आवाज देर से ही उठी,पर उठी तो. जब जागो तभी सवेरा. हां सही कह रही हो, कम-से-कम वे बोलीं तो. हां, और क्या? एक शुरुआत तो हुई है. एक-दूसरे को देख कर ही बोलने की हिम्मत तो जुटायी. इसी का असर है कि एक के बाद एक कितनों का काला चिट्ठा खुल रहा है. […]

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यह आवाज देर से ही उठी,पर उठी तो. जब जागो तभी सवेरा. हां सही कह रही हो, कम-से-कम वे बोलीं तो. हां, और क्या? एक शुरुआत तो हुई है. एक-दूसरे को देख कर ही बोलने की हिम्मत तो जुटायी. इसी का असर है कि एक के बाद एक कितनों का काला चिट्ठा खुल रहा है. जी हां, कुछ इसी तरह की बातें मी टू कैंपेन के तहत सुनने को मिल रही हैं. पेश है अनुपम कुमारी की रिपोर्ट.

आरोप कहीं न कहीं सच्चाई बयां करते हैं
तनुश्री दत्ता द्वारा नाना पाटेकर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाना बड़ी बात है. तनुश्री दत्ता के आरोप में कहीं न कहीं सच्चाई तो होगी. जब उन्हें लगा कि अब वह इस बात को सामने रख सकती हैं, तो उन्होंने इस बात को मी टू कैंपेन के तहत शेयर किया है. उनका ऐसा करना कई महिलाओं की बोल्डनेस प्रदान कर रहा है.
सुनीता भारती, सामाजिक कार्यकर्ता

स्वार्थ में सम्मान न गंवाएं
मी टू कैंपेन महिलाओं को मंच प्रदान कर रहा है. इस कैंपेन के जरिये यौन शोषण के खिलाफ आवाज उठा सकें. महिलाएं समाज और कैरियर के दबाव में सही समय पर खुलकर विरोध नहीं कर पाती हैं, पर जब उन्हें अवसर मिलता है, तो वह खुलकर उसका विरोध करती हैं.
श्वेता सिंह , सोशल वर्कर

अब तय करना होगा ‘न’ कहने का समय
कई बार ऐसी परिस्थिति होती है, जब महिलाएं अपने साथ हो रही घटनाओं का विरोध नहीं कर पाती हैं. ऐसे में मी टू कैंपेन महिलाओं को यह मंच प्रदान कर रहा है. ऐसे में अब महिलाएं विरोध करने का समय अब खुद तय कर सकती हैं. उन्हें अपने साथ हुए यौन शोषण की बातें कब बताने की जरूरत है और कब नहीं, इसे दूसरा कोई तय नहीं कर सकता है.
यामिनी शर्मा, प्रोफेसर, पटना वीमेंस कॉलेज

बेहतर होगा माहौल सुधरेगा समाज
महिलाएं अपने मामले को सामने ला रही हैं. इसका असर लोगों पर भी पड़ रहा है. यह अभियान महिला और पुरुष दोनों के लिए हितकारी साबित होने वाला है. वैसी सोच और मानसिकता वाले पुरुष जो किसी बड़े पद पर आसीन हैं, अब अपनी बदनामी से डरेंगे और ऐसा करने से डरेंगे. वहीं, महिलाएं अब अपनी चुप्पी तोड़ कर मामले को खुलकर सामने ला सकेंगी.
सृष्टि रंजन, छात्रा एनएमसीएच


औरों को भी उससे बचाएं

महिलाएं कई बार लोक समाज के डर से चुप्पी साध लेती हैं. लेकिन जब उन्हें लगता है कि अब वह खुद को स्थापित कर चुकी हैं, तो वह उसे शेयर करती हैं. ऐसे में मी टू अभियान के जरिये महिलाएं अपनी बातें शेयर कर रही हैं . साथ ही बड़े पदों पर आसीन साफ -सुथरी छवि वाले लोगों की सच्चाई भी सामने आ रहा है. तनुश्री दत्ता का आवाज उठाना, कई महिलाओं के हित में रहा.
नेहा सिन्हा, छात्रा मेडिकल

इसे प्रमोट करें होगा बदलाव
मी टू कैंपेन के जरिये महिलाओं को यौन शोषण के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रमोट करें. इससे समाज में बदलाव आयेगा. लोगों को रुपया पैसा खोने से ज्यादा इज्जत प्रतिष्ठा जाने का भय होता है. ऐसे में बड़े पदों पर कार्यरत लोगों को इससे भय पैदा होगा और वह ऐसा करने से डरेंगे. इससे महिलाएं सम्मान पूर्वक जिंदगी जी सकेंगी. किसी महिला का मान-सम्मान उसके करियर से अधिक बड़ा है.
कनीज फातिमा, छात्रा मेडिकल

अभियान अब बढ़ता ही जायेगा
महिलाओं में शिक्षा का स्तर बढ़ा है. वे लीगली और आर्थिक दोनों स्तर पर मजबूत हो चुकी हैं. इसी का असर है कि अब वह उन मामलों में भी अपनी चुप्पी तोड़ रही हैं, जो उन्हें कमजोर बनाता था. पहले वह आर्थिक रूप से उतनी सशक्त नहीं होती थी, कि वह अकेले किसी का विरोध कर सकें. लेकिन अब वह इतनी सशक्त हो चुकी हैं कि वह अपनी बातें बेखौफ रख रही हैं. यह बदलाव मी टू कैंपेन के रूप में दिख रहा है.
डॉ रणधीर कुमार, समाजशास्त्री

कैंपेन लायेगा बदलाव

मंच बहुत ही अच्छा है.अगर किसी भी महिला के साथ इस तरह की घटना हुई है, तो उसे सामने लाने की जरूरत है. ताकि सामने वाले व्यक्ति की छवि दुनिया के सामने प्रस्तुत की जा सके. उन्हें उनके इस स्वभाव के कारण नौकरी तक मिलने में परेशानी आ सकती है. जिनकी शादी नहीं हुई उनकी शादी में दिक्कत अा सकती है.साथ ही मानसिक और शारीरिक रूप से भी खुद कमजोर हो सकती हैं.
अमृता श्रुति, मनोवैज्ञानिक

जानें मी टू कैंपेन के बारे में
इस अभियान की शुरुआत अमेरिका में वर्ष 2017 में हुई. हॉलीवुड अभिनेत्री एलिसा मिलाने ने बीते वर्ष फेमस हॉलीवुड फिल्म निर्माता हार्वे वीनस्टीन पर यौन शोषण के आरोप लगाये थे. एलिसा मिलाने ने 16 अक्टूबर 2017 को अपने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट पर अपने साथ हुए यौन शोषण के बारे में मीटू कैंपेन के तहत जानकारी दी थी.उनके इस कैंपने का इतना असर हुआ कि मात्र तीन दिन में दुनिया भर में 1.2 करोड़ महिलाएं इस कैंपेन से जुड़ गयीं और अपनी बातें शेयर कीं. इसके बाद यह अभियान भारत की महिलाओं तक तेजी से अपनी पहुंच बनाने में सफल हो रहा है.

मी टू अभियान की आग में नेता से लेकर अभिनेता तक आ रहे लपेटे में

बॉलीवुड एक्ट्रेस तनुश्री दत्ता द्वारा नाना पाटेकर पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाये जाने के बाद आगे बढ़े ‘मी टू’ अभियान की आग तेजी से फैलती जा रही है. अब इसकी चपेट में अन्य अभिनेताओं के साथ-साथ नेता भी आ रहे हैं. एक के बाद एक बड़ी हस्तियों की पोल खुल रही है. ‘मी टू’ की चिंगारी मोदी सरकार के विदेश राज्य मंत्री एवं पूर्व संपादक एमजे अकबर के ऊपर गिरी है. उनके कई कारनामों की पोल खुल रही है. अब तक आधा दर्जन से अधिक महिला पत्रकार ने यौन शोषण के आरोप लगाते हुए उनकी हकीकत को उजागर किया है.

महिला पत्रकारों ने सीरियल यौन उत्पीड़क के रूप में उनके कारनामे सामने लायी है. सबसे पहले महिला पत्रकार प्रिया रमानी ने एमजे अकबर के बारे में खुलासा किया. उसके बाद एशियन एज अखबार की कार्यकारी संपादक सुपर्णा शर्मा ने उनके दूसरे चेहरे को सामने लाने का काम किया. इसके अलावा लेखिका शुहा राहा, पत्रकार प्रेरणा सिंह बिंदरा ने भी उनके वहशीपन का किस्सा सुनाया है. इसके अलावा टीवी सीरियल ‘तारा ‘ सहित टेलीविजन के कई शोज की लेखिका और निर्देशिका विनता नंदा ने 19 साल पुराने यौन शोषण मामले में संस्कारी और आदर्श पिता की छवि वाले अभिनेता आलोकनाथ पर भी दुष्कर्म करने के आरोप लगाये हैं.

डायरेक्टर विकास बहल, सिंगर कैलाश खेर, मॉडल जुल्फी सैयद और लेखक वरूण ग्रोवर भी इस आग की लपेटे में आ गये हैं. ऐसे में मी टू कैंपेन सोशल मीडिया पर महिलाओं को हिंसा के खिलाफ आवाज बुलंद करने का मंच प्रदान कर रहा है, जो मीटू अभियान के रूप में तेजी से फैलती जा रही है. ऐसे में मी टू कैंपेन के बारे में प्रभात खबर ने आमजनों की प्रतिक्रियाओं को जानने का प्रयास किया. बातचीत के क्रम में महिलाओं ने कैंपेन को महिलाओं के साथ हो रहे यौन शोषण के खिलाफ आवाज उठाने का बेहतर मंच बताया. साथ ही कहा कि अब डरना नहीं है, चुप रहना नहीं है. मी टू कैंपेन पर जब महिलाओं से बात की गयी, तो उन्होंने इसे सकारात्मक पहल बताया.

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