बाइक कारखानों में महिलाएं भी पुरुषों के साथ कर रही हैं काम
Updated at : 10 Jul 2017 1:26 PM (IST)
विज्ञापन

नयी दिल्ली : हीरो मोटोकोर्प, बजाज ऑटो और यामाह के कारखानों में इन दिनों बदलाव की बयार बह रही है. वहां दोपहिया वाहनों के विनिर्माण कार्य में पुरुषों का काम माने जाने वाली जगहों पर अब महिलाकर्मी भी काम कर रही हैं. महिला सशक्तिकरण के आह्वान पर दोपहिया कंपनियां महिलाओं को भी विनिर्माण के काम […]
विज्ञापन
नयी दिल्ली : हीरो मोटोकोर्प, बजाज ऑटो और यामाह के कारखानों में इन दिनों बदलाव की बयार बह रही है. वहां दोपहिया वाहनों के विनिर्माण कार्य में पुरुषों का काम माने जाने वाली जगहों पर अब महिलाकर्मी भी काम कर रही हैं. महिला सशक्तिकरण के आह्वान पर दोपहिया कंपनियां महिलाओं को भी विनिर्माण के काम में जगह देने लगी हैं.
ये कंपनियां ऐसा माहौल तैयार कर रही हैं जहां महिलाएं कारोबार वृद्धि में योगदान दे सकें. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन कंपनियों ने पाया कि महिलाएं विनिर्माण के काम में न केवल पुरुषों के समतुल्य हैं बल्कि उनकी उपस्थिति से काम का माहौल भी सुधर जाता है. वर्ष 2012 में यामहा मोटर इंडिया ने स्कूटरों की एसेंबली लाइन चलाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के समन्वय से पिंक एसेंबली लाइन पहल का प्रयोग किया. इसी तरह, हीरो मोटो कोर्प ने महिलाओं को अपने विनिर्माण परिचालन में लाने के लिए परियोजना तेजस्वनी शुरू की है. बजाज ऑटो का चकन (महाराष्ट्र में) एसेंबली संयंत्र है.
वहां सभी महिला कर्मचारी हैं तथा वे डोमिनार 400 और पल्सर आर एस 200 जैसी महंगी मोटरसाइकिलें बनती हैं. महिलाओं के पुरुषों के साथ काम के इस पहल को सकारात्मक नजरीये से देखा जा रहा है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




