कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने में महत्वपूर्ण है हमारी भूमिका

Author : Pritish Sahay Published by : Prabhat Khabar Updated At : 19 Mar 2020 2:41 AM

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संक्रमण से होनेवाली मौतों की दर एक से दो फीसदी तक हो सकती है. इस बीमारी के निदान के लिए दुनियाभर के विशेषज्ञ प्रयासरत हैं. फिलहाल, हमें सुरक्षा और बचाव संबंधी सावधानी को अपनाने की जरूरत है.

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विश्वभर में महामारी का रूप ले चुके कोरोना वायरस की वजह से अब तक साढ़े सात हजार से अधिक मौतें हो चुकी हैं और लाखों लोग इससे संक्रमित हैं. हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े बताते हैं कि 80 फीसदी लोगों में संक्रमण के मामूली लक्षण पाये गये हैं. संक्रमण से होनेवाली मौतों की दर एक से दो फीसदी तक हो सकती है. इस बीमारी के निदान के लिए दुनियाभर के विशेषज्ञ प्रयासरत हैं. फिलहाल, हमें सुरक्षा और बचाव संबंधी सावधानी को अपनाने की जरूरत है.

कब और कैसे करायें कोविड-19 की जांच?

अगर आपमें खांसी, बुखार या सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण नहीं हैं, तो आपको कोविड-19 की जांच कराने की आवश्यकता नहीं है.

यदि आपमें उक्त लक्षण हैं और आपने इटली, ईरान, कोरिया गणराज्य, फ्रांस, स्पेन, जर्मनी या संयुक्त अरब अमीरात आदि किसी कोविड-19 प्रभावित देश की यात्रा की है या किसी कोविड-19 संक्रमित रोगी के संपर्क में आये हैं, तो तुरंत इसकी सूचना राज्य हेल्पलाइन या स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की हेल्पलाइन 011-23978046 पर दें.

हेल्पलाइन सेवा आपके संपर्क विवरणों को नोट करेगी और कोविड-19 परीक्षण प्रोटोकॉल के साथ संपर्क करेगी.

यदि आपको जांच की आवश्यकता है, तो आपकी जांच केवल सरकार द्वारा अनुमोदित प्रयोगशाला में की जायेगी.

क्या आपको मास्क पहने की जरूरत है?

मास्क तभी पहनें जब –

आपमें कोविड-19 के लक्षण (खांसी, बुखार या सांस लेने में कठिनाई) दिखायी दे रहे हों.

आप कोविड-19 से प्रभावित व्यक्ति/ मरीज की देखभाल कर रहे हों.

आप स्वास्थ्य कार्यकर्ता हैं व इन लक्षणों से प्रभावित मरीज की देखभाल कर रहे हों.

मास्क पहनते समय ध्यान रखें-

मास्क के प्लीट को जब खोलें, तो ध्यान रहे कि वह नीचे की तरफ खुले.

मास्क के गीला होने पर या हर छह घंटों में मास्क को बदलते रहें.

अपनी नाक, मुंह और ठोड़ी के ऊपर मास्क लगायें और सुनिश्चित करें कि मास्क के दोनों ओर कोई गैप न हो, ठीक से फिट करें.

डिस्पोजेबल मास्क का दोबारा प्रयोग न करें और इस्तेमाल किये जा चुके मास्क को कीटाणुरहित कर बंद कूड़ेदान में डाल दें.

मास्क का उपयोग करते समय मास्क को छूने से बचें.

मास्क को उतारते समय मास्क की गंदी बाहरी सतह को न छूये.

मास्क को गर्दन पर लटकता हुआ न छोड़ें.

मास्क को हटाने के बाद अपने हाथों को साबुन व पानी या अल्कोहल हैंड रब से धोयें.

डायबिटीज है तो कैसे करें बचाव

कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों के संपर्क में आने से किसी भी व्यक्ति को संक्रमण हो सकता है, लेकिन उम्रदराज या पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों के संक्रमित होने का खतरा अधिक होता है. खासकर रक्तचाप या मधुमेह रोगियों को इससे विशेष तौर पर बचाव की जरूरत होती है.

चीन में अब तक कोरोना से हुई ज्यादातर मौतों में मरीजों की उम्र या तो अधिक थी या वे किसी बीमारी से ग्रस्त थे. अन्य अध्ययनों में भी गंभीर बीमारी और मौत से जुड़े खतरों की जांच की गयी थी.

बीमार लोग सावधानी बरतें

भारत में बदलती जीवनशैली की वजह से हाल के वर्षों में डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के रोगियों की संख्या बढ़ी है. कोविड-19 के खतरे से निपटने के लिए ऐसे लोगों को विशेष तौर पर सावधानी बरतने की जरूरत है.

एक रिपोर्ट की मुताबिक, 2019 में भारत में डायबिटीज रोगियों की संख्या 7.7 करोड़ थी, वहीं ग्लोबल अस्थमा रिपोर्ट 2018 के अनुसार, देश में कुल अस्थमा रोगियों में से छह प्रतिशत बच्चे और दो प्रतिशत वयस्क शामिल हैं. जिन्हेंें हाई ब्लडप्रेशर, सांस संबंधी समस्या या प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर है, उन्हें कोरोना के खतरे से आगाह होने और विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. कोरोना की वजह से सांस लेने में तकलीफ महसूस होती है. यह वायरस गले, सांस नली और फेफड़े पर असर डालता है. अगर फ्लू के लक्षण दिखते हैं, तो तुरंत डॉक्टर की मदद लें.

धूम्रपान से बचें

धूम्रपान करनेवालों के संक्रमित होने की संभावना अधिक होती है. कोरोना के खतरे से निपटने के लिए ऐसे लोगों को धूम्रपान छोड़ देना चाहिए. क्योंकि बीड़ी, सिगरेट आदि पीने वालों को सांस संबंधी संक्रमण होने की आशंका रहती है, साथ ही ऐसे लोगों को निमोनिया होने का डर भी अधिक रहता है. कोरोना की गंभीरता को देखते हुए धूम्रपान से बचना चाहिए.

स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा-निर्देश

सामुदायिक स्तर पर कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कई दिशा-निर्देश जारी किये हैं,

सभी शैक्षणिक संस्थानों, जिम, संग्रहालय, स्वीमिंग पूल और थियेटर को बंद करना होगा. छात्रों को घर पर रहकर पढ़ाई के लिए कहा गया है. परीक्षाओं को टालने पर विचार किया जा सकता है.

निजी क्षेत्र की संस्थाओं को कर्मचारियों से घर पर रहकर काम करने के लिए योजना बनाने का निर्देश दिया गया है.

कार्यक्रमों, बैठकों का आयोजन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये करने की कोशिश हो़

रेस्त्रां को हाथों की सफाई और उचित स्वच्छता को सुनिश्चित करना होगा.

स्थानीय प्रशासन को खेल आयोजकों और प्रतियोगिताओं के लिए जुटनेवाली भीड़ को रोकने के लिए कहा गया है.

सब्जी मंडी, अनाज मंडी, बस स्टॉप, रेलवे स्टेशन आदि स्थानों पर भीड़ की नियंत्रित करने के लिए स्थानीय प्रशासन को जरूरी दिशा-निर्देश दिये गये हैं.

सभी व्यावसायिक क्रियाकलापों के दौरान ग्राहकों के बीच कम से एक मीटर की दूरी आवश्यक है.

गैर-जरूरी यात्रा से बचने का निर्देश दिया गया है.

अस्पतालों को निर्देश देने के साथ कहा है कि मरीजों से मिलनेवाले परिजनों और मित्रों को अस्पतालों में आने से रोका जाये.

अपने हाथों को अच्छी तरह धोयें

कोराना वायरस एक संक्रमण है, जो मुख्य रूप से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है. मांसाहार या अंडा खाने से यह संक्रमण नहीं फैलता है. हालांकि, सुरक्षा कारणों से सभी तरह के मांस को अच्छी तरह धोने और सही तरीके से पकाने के बाद ही खाना चाहिए. तापमान के बढ़ने के बाद कोविड-19 का प्रसार कम होगा और यह वायरस समाप्त हो जायेगा, यह भ्रामक बातें हैं. सिंगापुर के गर्म आर्द्रता वाले मौसम में इस वायरस का संक्रमण उतना ही गंभीर है, जितना ठंडे वातावरण वाले यूरोपीय देशों में. कोराना वायरस से संक्रमित कोई व्यक्ति यदि किसी आवासीय सोसाइटी में रहता है, तो उस सोसाइटी में रहनेवाले लोग तब तक संक्रमित नहीं होंगे, जब तब वे उस संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में नहीं आते हैं.

इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि लौंग या दूसरी जड़ी-बूटियों को खाने से काेराना वायरस के संक्रमण से बचा जा सकता है. कोराना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए हमें अपने हाथों को अच्छी तरह व नियमित अंतराल पर साबुन से धोते रहना चाहिए. हाथों को कीटाणुरहित करने के लिए सैनिटाइजर का भी उपयोग किया जा सकता है.

डॉ रणदीप गुलेरिया, निदेशक, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली

उत्तर-पूर्वी राज्यों में संक्रमण का खतरा कम

डॉ रणदीप गुलेरिया का कहना है कि कोराना वायरस मूल रूप से विदेश से आनेवाले लोगों के साथ भारत में प्रवेश कर रहा है. इस कारण उत्तर-पूर्वी राज्यों में इस संक्रमण के फैलने का खतरा न्यूनतम है. एम्स किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए तैयार है. इसके लिए एम्स के अनेक विभागों को मिलाकर कोविड-19 टास्क फोर्स का गठन किया गया है. यहां नियमित रूप से देश में संक्रमण की स्थिति की निगरानी और समीक्षा की जा रही है.

खुद रहें सुरक्षित, दूसरों को रखंे सुरक्षित

क्या करें

बार-बार हाथ धोयें. आपके हाथ गंदे न लग रहे हों, तब भी अपने हाथों को अल्कोहल-आधारित हैंड वॉश या साबुन

और पानी से साफ करें

छींकते और खांसते समय, अपना मुंह व नाक िटशू पेपर/ रूमाल से ढकें

प्रयोग के तुरंत बाद िटशू को िकसी बंद िडब्बे में फेंक दें

अगर आपको बुखार, खांसी और सांस लेने में कठिनाई है तो डॉक्टर से संपर्क करें़ डॉक्टर से िमलने के दौरान अपने मुंह और नाक को ढकने के िलए मास्क/ कपड़े का प्रयोग करें

अगर आप में कोरोना वायरस के लक्षण हैं, तो कृपया राज्य हेल्पलाइन नंबर या स्वास्थ्य मंत्रालय की हेल्पलाइन 011-23978046 पर कॉल करें.

भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें

क्या न करें

यदि आपको खांसी और बुखार का अनुभव हो रहा हो, तो िकसी के संपर्क में न आयें

अपनी आंख, नाक या मुंह को न छूयें

सार्वजनिक स्थानों पर न थूकें

स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा-निर्देश

सामुदायिक स्तर पर कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कई दिशा-निर्देश जारी किये हैं,

सभी शैक्षणिक संस्थानों, जिम, संग्रहालय, स्वीमिंग पूल और थियेटर को बंद करना होगा. छात्रों को घर पर रहकर पढ़ाई के लिए कहा गया है. परीक्षाओं को टालने पर विचार किया जा सकता है.

निजी क्षेत्र की संस्थाओं को कर्मचारियों से घर पर रहकर काम करने के लिए योजना बनाने का निर्देश दिया गया है.

कार्यक्रमों, बैठकों का आयोजन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये करने की कोशिश हो़

रेस्त्रां को हाथों की सफाई और उचित स्वच्छता को सुनिश्चित करना होगा.

स्थानीय प्रशासन को खेल आयोजकों और प्रतियोगिताओं के लिए जुटनेवाली भीड़ को रोकने के लिए कहा गया है.

सब्जी मंडी, अनाज मंडी, बस स्टॉप, रेलवे स्टेशन आदि स्थानों पर भीड़ की नियंत्रित करने के लिए स्थानीय प्रशासन को जरूरी दिशा-निर्देश दिये गये हैं.

सभी व्यावसायिक क्रियाकलापों के दौरान ग्राहकों के बीच कम से एक मीटर की दूरी आवश्यक है.

गैर-जरूरी यात्रा से बचने का निर्देश दिया गया है.

अस्पतालों को निर्देश देने के साथ कहा है कि मरीजों से मिलनेवाले परिजनों और मित्रों को अस्पतालों में आने से रोका जाये.

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Pritish Sahay

लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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