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जिस दवा को ट्रंप ने भारत से मांगा उसे गलती से भी न लगाएं हाथ, जानें उसे खुद से ही लेना कितना खतरनाक?

Updated at : 08 Apr 2020 2:20 PM (IST)
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जिस दवा को ट्रंप ने भारत से मांगा उसे गलती से भी न लगाएं हाथ,  जानें उसे खुद से ही लेना कितना खतरनाक?

मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन टैबलेट को लेकर अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की बेचैनी ग्लोबल मीडिया में छाया हुआ है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की मांग की थी.

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मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन(hydroxychloroquine) टैबलेट को लेकर अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की बेचैनी ग्लोबल मीडिया में छाया हुआ है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वी की मांग की थी. इसके बाद पूरी दुनिया में इस बात पर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या मलेरियारोधी दवा से कोरोना का वायरस मर सकता है? बता दें कि इस टैबलेट का पूरे विश्‍व के सबसे बड़ा निर्यातक भारत है. दरअसल, कोरोनावायरस की अभी तक कोई दवा ईजाद नहीं हुई है, लेकिन कई देशों ने हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन टैबलेट का इस्‍तेमाल कोविड-19 के मरीजों पर किया है, जिनके अच्‍छे परिणाम आए हैं.

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हो सकती है दिक्कत

भारत सरकार ने बीते दिनों यह स्पष्ट कर दिया कि कोरोना संक्रमित मरीज का इलाज करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों और उनके संपर्क में आने वाले लोगों को यह हाईड्रॉक्सीक्लोरोक्विन दवा दी जाएगी. हालांकि इस दवा के इस्तेमाल से आपके सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है. दवा खाने के बाद कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. इसमें नाक बहना, पेट में दर्द और बार-बार शौच जाना मुख्य है. साथ ही दवा का इस्तेमाल करने के बाद से ही असहनीय दर्द, पाचनतंत्र खराब होने और सिर में दर्द बने रहने की आशंका है.

अगर अमेरिकी संदर्भ में हाईड्रॉक्सीक्लोरोक्विन दवा की बात करें तो साल 1955 में यहां इस दवा का इस्तेमाल करने की परमिशन दी गई थी. हाईड्रॉक्सीक्लोरोक्विन 128वीं दवा है जो अमेरिका में सबसे ज्यादा डॉक्टरों द्वारा प्रिफर की जाती है. साल 2017 ने अमेरिकी डॉक्टरों ने इस दवा को खूब लिखा. एक आंकड़े के अनुसार कम से कम 55 लाख अमेरिकियों ने इस दवा का इस्तेमाल किया.हाईड्रॉक्सीक्लोरोक्विन का ब्रांड नेम प्लक्वेनिल है, जिसका इस्तेमाल मलेरिया में इलाज के लिए किया जाता है. इसके साथ ही रिमोटाइड अर्थराइटिस और गर्भावस्था के दौरान जोड़ों में होने वाले दर्द का मुकाबला करने के लिए भी इस दवा का इस्तेमाल होता है. डब्लूएचओ ने इसे जरूरी दवाओं की लिस्ट में शामिल कर रखा है.

ट्रंप को क्यों चाहिए ये दवा

कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोरोनावायरस कं संक्रमण पर इस दवा ने असर दिखाया है. यही वजह है कि बार-बार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस दवा के लिए भारत की मदद चाहते हैं. भारत इसका बड़ा निर्यातक है. कोरोना खतरे को देखते हुए मार्च में इसके निर्यात पर बैन लगा दिया गया था. अब भारत ने इसके लिए हां कह दी है. कोरोनावायरस की मार से बेहाल अमेरिका के राष्‍ट्रपति ने कहा कि अमेरिका ने 29 मिलियन दवा की डोज खरीदी है. इसका बड़ा हिस्सा भारत से खरीदा जाएगा. इदर, इस बात को लेकर देश में राजनीति तेज हो गई.

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Utpal Kant

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By Utpal Kant

Utpal Kant is a contributor at Prabhat Khabar.

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