‘यह केवल मर्दों का काम है’- इस सोच से उबरने की जरूरत : चंद्रशेखरन
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 Feb 2020 2:36 PM
बेंगलुरु : टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा कि यदि हम भारत के नौकरी-पेशा लोगों में महिलाओं की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करना चाहते हैं तो पहले हमें उनसे जुड़े पूर्वाग्रह हटाने होंगे. उन्होंने कहा कि अपने देश में महिलाओं के बारे में कई पूर्वाग्रह हैं, जैसे कि ‘यह काम औरतें नहीं कर सकती, […]
बेंगलुरु : टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा कि यदि हम भारत के नौकरी-पेशा लोगों में महिलाओं की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करना चाहते हैं तो पहले हमें उनसे जुड़े पूर्वाग्रह हटाने होंगे. उन्होंने कहा कि अपने देश में महिलाओं के बारे में कई पूर्वाग्रह हैं, जैसे कि ‘यह काम औरतें नहीं कर सकती, यह केवल मर्दों का काम है.’ इन सबको हटाना होगा.
चंद्रशेखरन ने यहां रूपा पुरुषोत्तमण के साथ मिलकर लिखी अपनी किताब ‘ब्रिजिटल नेशन’ के विमोचन पर कहा, ‘‘ लघु एवं मध्यम उद्योगों के लिए मंच बनाये जाने की संभावना है, क्योंकि वहां पर अधिक महिलाओं को कामकाजी बनाया जा सकता है.’ पुरुषोत्तमण टाटा संस में नीति परामर्श की प्रमुख और मुख्य अर्थशास्त्री हैं.
चंद्रशेखरन ने कहा कि इसके लिए नीतियों को भी बदलने की जरूरत है. उन्होंने स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां स्पष्ट नियम हैं, कि डॉक्टर क्या कर सकते हैं और जो डॉक्टर नहीं है, वह क्या कर सकते हैं और इसमें ‘देखभाल’ का मतलब उन्हीं (महिलाओं) से है. उन्होंने कहा , ‘‘हमें गैर-परंपरागत क्षेत्रों में महिलाओं के आदर्श स्थापित करने चाहिए. क्यों महिलाएं सिर्फ ‘शिक्षित महिलाओं’ तक सीमित रहें.’
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