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Book फ्लैट को कैंसिल करने पर बिल्डर को लौटाना होगा GST, जानिये क्यों...?

Updated at : 08 May 2019 8:56 PM (IST)
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Book फ्लैट को कैंसिल करने पर बिल्डर को लौटाना होगा GST, जानिये क्यों...?

नयी दिल्ली : यदि किसी घर खरीदार ने पिछले वित्त वर्ष में बुक कराया गया फ्लैट निरस्त कराया है, तो बिल्डर को उस फ्लैट पर वसूल किये गये वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) भुगतान का रिफंड करना होगा. बिल्डर को ऐसे रिफंड के बदले में क्रेडिट समायोजन की सुविधा मिलेगी. कर विभाग ने यह स्पष्टीकरण दिया […]

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नयी दिल्ली : यदि किसी घर खरीदार ने पिछले वित्त वर्ष में बुक कराया गया फ्लैट निरस्त कराया है, तो बिल्डर को उस फ्लैट पर वसूल किये गये वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) भुगतान का रिफंड करना होगा. बिल्डर को ऐसे रिफंड के बदले में क्रेडिट समायोजन की सुविधा मिलेगी. कर विभाग ने यह स्पष्टीकरण दिया है. केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) द्वारा रीयल एस्टेट क्षेत्र पर जारी ‘आमतौर पर पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब’ में यह स्पष्टीकरण दिया है. रीयल एस्टेट क्षेत्र में जीएसटी दरों में किये गये बदलाव को लेकर यह स्पष्टीकरण जारी किया गया है.

ताजा बदलाव के तहत बिल्डरों को अब बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट सुविधा का लाभ उठाये सस्ती आवासीय परियोजनाओं पर एक फीसदी और अन्य श्रेणियों की आवासीय इकाइयों पर पांच फीसदी की दर से जीएसटी लगाने की अनुमति दी गयी है. नयी व्यवस्था एक अप्रैल 2019 से लागू हो गयी है. बिल्डरों की जो परियोजनाएं एक अप्रैल, 2019 से पहले से चल रही हैं, उनके मामले में उन्हें नई व्यवस्था अपनाने का विकल्प दिया गया है.

इसे भी देखें : बिल्डर रजिस्ट्रेशन करायें, नहीं तो होगी कार्रवाई : नगर आयुक्त

ऐसी परियोजनाओं के लिए या तो वह पुरानी जीएसटी व्यवस्था को जारी रख सकते हैं अथवा एक फीसदी और पांच फीसदी की नयी दर को अपना सकते हैं. पुरानी व्यवस्था में सस्ती आवासीय परियोजनाओं के लिए आठ फीसदी और अन्य श्रेणियों की आवासीय इकाइयों के लिए 12 फीसदी की दर से जीएसटी लगाने का प्रावधान है. इसमें इनपुट टैक्स क्रेडिट सुविधा का लाभ भी बिल्डर उठा सकते हैं, जबकि नयी व्यवस्था में दरें घटा दी गयी हैं और इनपुट टैक्स क्रेडिट सुविधा को समाप्त कर दिया गया है.

कर विभाग के जारी किये गये सवाल-जवाब (एफएक्यू) में कहा गया है कि फ्लैट का दाम बदलने या फिर बुकिंग निरस्त होने की स्थिति में डेवलपर धारा 34 में किये गये प्रावधान के अनुरूप खरीदार के लिये ‘क्रेडिट नोट’ जारी कर सकता है. एफएक्यू में कहा गया है कि डेवलपर को इस तरह जारी क्रेडिट नोट की राशि के किये गये कर भु्गतान पर समायोजन की सुविधा उपलब्ध होगी.

इसमें उदाहरण दिया गया है कि यदि किसी डेवलपर ने एक अप्रैल, 2019 से पहले की 10 लाख रुपये की बुकिंग राशि पर 12 फीसदी की दर से 1.20 लाख रुपये का जीएसटी भुगतान किया है. ऐसी बुकिंग के निरस्त होने की स्थिति में बिल्डर को उसकी अन्य जीएसटी देनदारियों के समक्ष 1.20 लाख रुपये के समायोजन की अनुमति होगी. एएमआरजी एंड एसोसिएट्स के पार्टनर रजत मोहन ने कहा कि इस स्पष्टीकरण से निश्चित ही पुरानी बुकिंग निरस्त कराने वाले ग्राहकों का कर बोझ कम होगा.

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