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लीरा संकट : हमारे रुपये को कौन गिरा रहा है?

Updated at : 14 Aug 2018 1:27 PM (IST)
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लीरा संकट : हमारे रुपये को कौन गिरा रहा है?

अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण तुर्की की मुद्रा की स्थिति बिगड़ी हैअमेरिकी अर्थव्यवस्था में सुधार के कारण भी डॉलर मजबूत हो रहा है मुंबई/नयी दिल्ली/हांगकांग : तुर्की की मुद्रा लीरा ने भारतीय मुद्रा रुपये को आज रिकार्ड निचले स्तर पर पहुंचा दिया.पिछलेसप्ताह से जारी गिरावट आजतबरिकार्ड निचले स्तर पर पहुंच गयीजबरुपयाडॉलर के मुकाबले 70 के पार […]

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अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण तुर्की की मुद्रा की स्थिति बिगड़ी है
अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सुधार के कारण भी डॉलर मजबूत हो रहा है

मुंबई/नयी दिल्ली/हांगकांग : तुर्की की मुद्रा लीरा ने भारतीय मुद्रा रुपये को आज रिकार्ड निचले स्तर पर पहुंचा दिया.पिछलेसप्ताह से जारी गिरावट आजतबरिकार्ड निचले स्तर पर पहुंच गयीजबरुपयाडॉलर के मुकाबले 70 के पार पहुंच गया. इस गिरावट के बाद भारत में इस पर राजनीति शुरू हो गयी और कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने तीखा कटाक्ष यहकहतेहुए किया कि मोदी सरकार ने वह कर दिखाया जो 70 साल में किसी ने नहीं किया. सरकार को यह विपक्षके उस हमले का जवाब था, जब गुजरात के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए नरेंद्र मोदी यूपीए सरकार पर अक्सर गिरते रुपये को लेकर किया करते थे. उधर, सरकार की ओर से आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने इस पर सफाई दी और कहा कि इसके पीछे वैश्विक वजह हैं और घबराने की जरूरत नहीं है. ऐसे मेंसरकारके कहे अनुसार ही यह जानना जरूरी है कि हमारे रुपये को कौन गिरा रहा है?

गिरावट की वजहें

रुपये में गिरावट की दो बड़ी वजह हैं – एक तुर्की की मुद्रा लीरा पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण बना दबाव और दूसरा अमेरिका के इकोनॉमी में लगातार आ रही मजबूती, जिससे डॉलर स्वत: मजबूत हो रहा है. बाजार के कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसा ही ट्रेंड रहा तो छह महीने में डॉलर के मुकाबल रुपया 80 के पार पहुंच जाएगा.

लीरा संकट के पीछे क्या है वजह?

लीरा संकट के पीछे कई कारण हैं जिनमें बाजार की ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी की मांग को केंद्रीय बैंक द्वारा अस्वीकार किया जाना है. साथ ही अमेरिकी पादरी की गिरफ्तारी को लेकर अमेरिका द्वारा तुर्की पर प्रतिबंध लगाए जाने से पैदा हुआ तनाव अहम कारण है. हालांकि इस मामले में डोनाल्ड ट्रंप के रक्षा सलाहकार जॉन बॉल्टन की तुर्की के राजदूत सरदार किलिक से मुलाकात के बाद कुछ सकारात्मक उम्मीद बनी है. निवेशकों के सावधानी भरे रुख के बीच नेशनल ऑस्ट्रेलिया बैंक के मुख्य विदेशी मुद्रा विनिमय रणनीतिकार रे एट्रिल ने उम्मीद जतायी है कि यह संकट दुनियाभर में नहीं फैलेगा.

एशियाई बाजारों में आज भी रहा लीरा का दबाव

एशियाई बाजारों में कारोबार के दौरान तुर्की के लीरा पर दबाव बना रहा. बावजूद इसके क्षेत्रीय बाजारों में हल्की स्थिरता देखीगयी जबकि कल बाजारों में भारी उठा-पटक हुई थी. इसकी वजह से निवेशकों का रुख काफी सावधानी भरा बना हुआ है. कल लीरा के डॉलर और यूरो के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के बाद निवेशक अंकारा की प्रत्येक गतिविधि पर करीब से नजर बनाए हुए हैं. लीरा संकट से जुड़ी चिंताओं के चलते शेयर बाजारों में तेज गिरावट देखने को मिली है और निवेशकों को इसके दुनियाभर में फैलने का डर है. शुरुआती एशियाई कारोबार में लीरा डॉलर के मुकाबले 6.91 पर और यूरो के मुकाबले 7.89 पर खुला. कल यह डॉलर और यूरो के मुकाबले क्रमश: 7.24 और 8.12 पर बंद हुई थी.


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