व्यवस्था बेलगाम, ले रहे मनमाना भाड़ा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :07 Feb 2015 11:06 AM (IST)
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शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था दुरुस्त नहीं, निजी बस व ऑटो चालक हावी जमशेदपुर : शहर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था नियंत्रित करने के लिए सरकारी तंत्र नहीं है. इसके कारण बस-टेंपो चालक अपनी मरजी से किराया तय करते हैं. किराया निर्धारण का कोई मानक या प्रशासनिक सिस्टम नहीं है. बस व ऑटो चालक जरूरत व […]
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शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था दुरुस्त नहीं, निजी बस व ऑटो चालक हावी
जमशेदपुर : शहर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था नियंत्रित करने के लिए सरकारी तंत्र नहीं है. इसके कारण बस-टेंपो चालक अपनी मरजी से किराया तय करते हैं. किराया निर्धारण का कोई मानक या प्रशासनिक सिस्टम नहीं है.
बस व ऑटो चालक जरूरत व संसाधन के आधार पर किराया तय करते हैं. टेंपो-बस चालक पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने पर किराया बढ़ाते रहे हैं, लेकिन डीजल की कीमत में कमी होने पर किराया कम करने से इनकार कर रहे हैं. यात्रियों के विरोध के बावजूद प्रशासन इसके निष्पादन के लिए सिस्टम विकसित करने में विफल रहा है. इन सब के बीच बेबस है आम यात्री. इनके पास यात्र का दूसरा विकल्प नहीं है.
रूट निर्धारण में प्रशासन का हस्तक्षेप नहीं
शहर या लंबी दूरी के रूट निर्धारण में प्रशासनिक हस्तक्षेप नहीं है. इसकी वजह से संचालक अपनी मरजी से रूट का निर्धारण कर बसों का परिचालन करते हैं. किसी रूट में जरूरत से ज्यादा बसें चल रही हैं, तो किसी रूट में क्षमता से काफी कम बसें दौड़ रही है. सरकारी बसें नहीं होने से निजी वाहन संचालक अपने हिसाब से किराया तय करते हैं.
सिटी बस सेवा बंद होने से मनमानी
सरकारी उपेक्षा की वजह से शहर में सिटी बस (50 बसें) का परिचालन बंद हो गया. सिटी बस चालक वर्षो से साकची में स्थायी स्टैंड की मांग करते रहे, लेकिन प्रशासन सिटी बस के लिए साकची में स्थायी स्टैंड उपलब्ध नहीं करा सका. निजी बस संचालकों ने सिटी बसों को मिनी बस स्टैंड में जगह नहीं दी. एक-एक कर सभी सिटी बसें रख-रखाव सही ढंग से नहीं होने और सरकारी उपेक्षा की वजह से सड़कों से हट गयीं.
ऑटो के परमिट, लाइसेंस, फिटनेस, लाइसेंस की नहीं होती नियमित जांच
शहर में ऑटो, बस के परमिट, लाइसेंस, फिटनेस, ड्राइविंग लाइसेंस की नियमित जांच नहीं होती है. शहर में हर साल करीब 500 ऑटो बढ़ती है. रूट निर्धारण की बाध्यता नहीं होने, ड्रेस कोड नहीं होने से चालक अपनी मरजी से किसी भी रूट में चलते हैं. वहीं मनमाना किराया लेते हैं. वित्तीय वर्ष 2010 -11 में 525 , 2011- 12 में 555, 2012- 13 में 382 , 2013 – 14 542 और 2014 – 15 (जनवरी तक) 392 नयी ऑटो सड़कों पर उतरीं.
कम था सिटी बस का भाड़ा
शहर में सिटी बस का किराया मिनी बस के किराये से 1 रु कम था. शुरू में सिटी बस का परिचालन शहर के 16 मार्गो पर शुरू हुआ. धीरे- धीरे सिटी बसें चार मार्गो पर सिमट कर बंद हो गयी. कुछ महीने पहले तक सिटी बसे साकची से स्टेशन, बागबेड़ा, बारीडीह मार्ग पर चल रही थी.
थमा राज्य पथ निगम का पहिया, बढ़ी मनमानी
राज्य पथ निगम की बसों का परिचालन बंद होने से निजी बस संचालकों का वर्चस्व बढ़ गया है. निगम की बसों का परिचालन टाटा- रांची, धनबाद, बोकारो मार्ग पर होने से निजी बसें इन मार्गो पर कम हो गयी थी. सरकारी स्तर पर राज्य पथ निगम को मजबूत बनाने के लिए पहल नहीं की गयी. नतीजा राज्य पथ निगम की बसों का पहिया थम गया.
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