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patna

  • Jun 9 2017 7:29AM

पीएमसीएच : 21 मरीजों को घोंप दिये 1340 इंजेक्शन

पीएमसीएच : 21 मरीजों को घोंप दिये 1340 इंजेक्शन
औषधि विभाग की टीम ने अस्पताल प्रबंधन पर उठाये सवाल  
टीम ने ब्लैक मार्केटिंग का लगाया आरोप 
पटना : पीएमसीएच में इंजेक्शन की कालाबाजारी का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है. औषधि विभाग के ड्रग इंस्पेक्टर ने एक बार फिर अस्पताल प्रशासन पर इंजेक्शन की ब्लैक मार्केटिंग का आरोप लगाया है. जांच करने पहुंची औषधि विभाग की टीम ने दवा संबंधी दस्तावेज (बीएचटी) देख कर कहा कि टाटा वार्ड में 24 नवंबर, 2016 से 2 अप्रैल, 2017 तक सरकार की ओर से 1340  मेरोपेनम 1 ग्राम हाइ एंटीबायोटिक नाम के इंजेक्शन मुहैया कराये गये हैं. करीब चार महीने में 21 मरीजों को ही ये इंजेक्शन लगाये गये हैं. 
 
औषधि विभाग की टीम ने कहा है कि अगर एक मरीज को 10 इंजेक्शन भी लगे होंगे, तो कुल 21 मरीजों को 210 इंजेक्शन से अधिक नहीं लगाये गये होंगे. ऐसे में बाकी इंजेक्शन टाटा वार्ड से कहां गये यह बड़ा सवाल है. जबकि, अस्पताल के सभी वार्डों में 39000 इंजेक्शन मुहैया कराये गये थे. 37 वार्डों की क्या स्थिति है, यह जांच के बाद ही पता चल सकेगा. 
 
ड्रग इंस्पेक्टर ने गड़बड़ी का विवरण अधिकारियोें के समक्ष प्रस्तुत किया : पीएमसीएच के टाटा वार्ड में इंजेक्शन की गड़बड़ी का विवरण ड्रग इंस्पेक्टर ने औषधि विभाग व पीएमसीएच प्रशासन के अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया है. ड्रग इंस्पेक्टर सच्चिदानंद विक्रांत ने कहा कि टाटा वार्ड से 1340 इंजेक्शन 21 मरीजों को लगाया गया है. करीब एक हजार से अधिक इंजेक्शन की ब्लैक मार्केटिंग हुई है. उन्होंने कहा कि पीएमसीएच के रिकाॅर्ड रूम से सही बीएचटी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किये गये हैं. आधे-अधूरी दवाओं व इंजेक्शन की जानकारी लिखी गयी है. 
यही वजह है कि ड्रग माफिया आसानी से इंजेक्शन की ब्लैक मार्केटिंग कर रहे हैं. इधर, पीएमसीएच के अधीक्षक का कहना है कि बीएचटी में सभी तरह की जानकारी ड्रग इंस्पेक्टर को दे दी गयी है. अस्पताल स्तर पर भी जांच टीम गठित हुई है. मामला सही पाया गया तो जिम्मेवार लोगों पर कार्रवाई होगी.
 
क्या है मामला 
 
पीएमसीएच में सरकार की ओर से उपलब्ध होने वाली मेरोपेनम 1 ग्राम हायर एंटीबायोटिक इंजेक्शन कंकड़बाग स्थित हनुमान एजेंसी सहित कई प्राइवेट दवा दुकानों में बेचते हुए पाया गया है. यह इंजेक्शन कैसे बाहर के दुकानों पर गया इसकी जांच के लिए पीएमसीएच में ड्रग विभाग की टीम लगातार जांच कर रही है. टाटा वार्ड में जांच के दौरान मामला उजागर भी हो गया था. कुल 37 वार्डों में छापेमारी करनी है. ज्ञात हो कि इंजेक्शन 2 हजार रुपये में बाहर के दुकानों पर बेचते मिला है.
 
इधर, न ट्रॉली मिली न स्ट्रेचर, पिता को कंधे पर उठा एक्स-रे कराने पहुंचा बेटा
 
पटना. पीएमसीएच में इलाज कराने आये मरीजों की परेशानी कम नहीं हो रही है. गुरुवार को जमुई से आये शिवचरण (70) को एक्स-रे के लिए परेशानी झेलनी पड़ी. शिवचरण इमरजेंसी वार्ड में भरती हैं. डॉक्टर ने उन्हें एक्स-रे कराने का परामर्श दिया. उनके पैर में सूजन है. परिजन ने स्ट्रेचर व ट्रॉली के लिए वार्ड में कर्मचारियों से गुहार लगाते रहे, लेकिन कोई साधन नहीं मिला. इस पर शिवचरण के बड़े बेटे ब्रह्मदेव पंडित ने पिता को अपने कंधे पर उठा लिया और करीब 500 मीटर चल कर एक्स-रे सेंटर लेकर गया. इस दौरान वह कई अधिकारियों के कार्यालयों के सामने से गुजरा, लेकिन किसी की नजर उस पर नहीं पड़ी.
 
वार्ड से जांच कराने में अकसर होती है परेशानी 
 
पीएमसीएच के वार्ड में भरती मरीजों को जांच के लिए अकसर परेशानियों का सामना करना पड़ता है. वार्ड से अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे, सीटी स्कैन व एमआरआइ जांच के लिए ट्रॉली व स्ट्रेचर नहीं मिलते हैं. मरीज के परिजन गोद या पीठ पर उठा कर मरीज को जांच के लिए ले जाते हैं. कई बार वार्ड में शिफ्ट करते समय भी यह परेशानी मरीज व परिजनों को झेलनी पड़ती है. वहीं अधीक्षक डॉ लखींद्र प्रसाद कहते हैं कि पीएमसीएच में मरीजों की सुविधा के लिए ट्रॉली व स्ट्रेचर दी गयी हैं. यह व्यवस्था पूरी तरह से नि:शुल्क है. जिन मरीजों को स्ट्रेचर नहीं मिल रही वह कंप्लेन करें. जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई की जायेगी.
 
दर्द से परेशान छोटू के पेट से निकाली गयीं 11 सूइयां, अब है स्वस्थ
 
दानापुर : पिछले चार वर्षों से  कपड़ा सीने वाली सूई की चुभन से 19 वर्षीय  छोटू परेशान रहता था. तीन बार अलग-अलग जगहों पर सुई निकलवाने के लिए उसने पेट का ऑपरेशन कराया, लेकिन उसे दर्द से राहत नहीं मिली.   
 
इसके बाद 5 जून को  रूपसपुर के विजय नगर स्थित अम्बिका हेल्थ केयर के  डाॅ विजय कुमार ने छोटू के पेट का ऑपरेशन किया. इसमें पेट के अलग-अलग हिस्सों से 11 सूई निकाली गयी. डाॅ कुमार ने  बताया कि तीन घंटे तक चले  ऑपरेशन में छोटू के पेट व आंत से सूई व पिन निकाले गये हैं. अब उसे पेट में दर्द नहीं हो रहा है. उन्होंने बताया कि एक्स-रे व सिटी स्कैन कराने के बाद पता चला कि पेट में कपड़ा सीने वाली सूई व पिन हैं. डाॅ कुमार ने बताया कि पेट में सुई रहने से मरीज को पेट में दर्द व पेशाब करने में परेशानी होती थी. खाना खाने के बाद असहनीय दर्द होता था. 
 
मरीज को नहीं है पता पेट में कैसे गयी सूई : पेट में सूई कैसे गयी, इस संबंध में मरीज व उनके परिजनों को कोई जानकारी नहीं है. दानापुर के न्यू ताराचक निवासी आनंदी राय का पुत्र छोटू कुमार पिछले चार साल से पेट के दर्द से परेशान था. सूई के चुभन से पेट में खिंचाव आ गया था. 
छोटू ने  बताया कि सबसे पहले   वह 3 मार्च, 2015 को दानापुर  स्थित मछुआ टोली  कैलाश नर्सिंग होम में पेट का ऑपरेशन कराया, तो दो  सूई निकली. लेकिन, दर्द से राहत नहीं मिली. जब एक्स-रे कराया गया तो पेट में सूई जैसा कुछ नजर आया. इसके बाद 17 जुलाई, 2015 को पीएमसीएच में डाॅ एबी सिंह ने पेट का ऑपरेशन किया, जिसमें दो और सूई निकली. कुछ माह के बाद फिर से पेट में दर्द होने लगा. 25 जनवरी, 2016 को रूपसपुर नहर स्थित आशुतोष मेमोरियल हॉस्पिटल में पेट का ऑपरेशन कराया. 
 

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