Madhepura News : क्षमता 200 के बैठने की, चार कमरे के स्कूल में नामांकित हैं 853 बच्चे

Published by :Sugam
Published at :26 Aug 2024 7:10 PM (IST)
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मधेपुरा के सोनाय अनूप उच्च माध्यमिक विद्यालय में एक बेंच पर छह छात्राएं बैठ दे रहीं परीक्षा.

मधेपुरा के सोनाय अनूप उच्च माध्यमिक विद्यालय में एक बेंच पर छह छात्राएं बैठ दे रहीं परीक्षा.

तीन क्लासरूम व एक स्मार्ट क्लास के सहारे 853 छात्रों का भविष्य गढ़ा जा रहा है. बैठने की परेशानी के कारण बच्चे पढ़ने नहीं आते. एक बेंच पर पांच से छह बच्चों को बैठने की मजबूरी है. प्रधानाध्यापक ने शिक्षा विभाग पर उदासीनता बरतने का आरोप लगाया है.

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Madhepura News : सविता नंदन, मधेपुरा. बिहार सरकार शिक्षा में सुधार को ले नित्य नये प्रयोग कर रही है. पदाधिकारियों द्वारा विद्यालय का लगातार निरीक्षण कर पायी जा रही खामियों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है. शिक्षकों की कमी दूर करने को बीपीएससी द्वारा बहाली भी की गयी है. लेकिन मूलभूत सुविधाओं को दूर करने में सरकार व विभाग अब भी फिसड्डी है. आज भी कई विद्यालयों में नामांकित बच्चों की संख्या के अनुपात में वर्ग कक्ष नहीं हैं.घैलाढ़ प्रखंड क्षेत्र के भान तेकती स्थित सोनाय अनूप उच्च माध्यमिक विद्यालय ऐसा ही स्कूल है. शिक्षा विभाग की उदासीनता के कारण यहां तीन कमरों में लगभग 853 छात्रों का भविष्य गढ़ा जा रहा है. प्रधानाध्यापक डॉ अजय कुमार की मानें तो विभाग से कई बार विद्यालय में भवन निर्माण कराने की मांग की गयी है. लेकिन शिक्षा विभाग पर कोई असर नहीं हो रहा है.

चार कमरों में से एक में चल रहा स्मार्ट क्लास

विद्यालय के प्रधानाध्यापक डॉ अजय कुमार ने बताया कि विद्यालय में चार कमरे का दो मंजिला बिल्डिंग है, जिसमें एक कमरे में स्मार्ट क्लास का संचालन किया जाता है. तीन कमरे में कक्षा नवमी से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई करायी जाती है. विद्यालय में चार कक्षाओं की पढ़ाई होती है, लेकिन कमरे तीन ही है. तीनों कमरे में अधिक से अधिक 200 छात्रों की बैठने की व्यवस्था है. जबकि विद्यालय में कुल नामांकित बच्चों की संख्या 853 है. इसमें नवमी कक्षा में 131, दसवीं में 306, 11वीं में 224 और 12वीं में 192 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. शिक्षा विभाग के अनुसार, विद्यालय में कुल नामांकित छात्रों का 50 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है. वर्तमान में यहां लगभग 200 बच्चों की बैठने की व्यवस्था है, तो यहां चार सौ छात्र कैसे बैठकर पढ़ेंगे. नामांकन के समय तो विद्यालय में कैंप लगाकर अधिक से अधिक छात्रों का नामांकन तो ले लिया जाता है, लेकिन उस अनुरूप व्यवस्था नहीं की जाती है.

लैब, जिम व पुस्तकालय भी नहीं हैं उपलब्ध

वर्तमान शिक्षा में प्रैक्टिकल का महत्व बढ़ता जा रहा है, लेकिन इस उच्च माध्यमिक विद्यालय की स्थापना के लगभग 64 वर्ष बीत जाने के बाद भी यहां भवन के अभाव में आज तक लैब उपलब्ध नहीं हो पाया है. ऐसे में यहां के छात्र प्रैक्टिकल नहीं कर पाते हैं. जबकि यहां फिजिक्स, केमेस्ट्री, बायलॉजी के लैब के साथ जिम की भी जरूरत है. प्रधानाध्यापक ने कहा कि विद्यालय को मॉडल भवन की जरूरत है. यदि मॉडल भवन का निर्माण कर दिया जाता है तो विद्यालय की सभी समस्याओं का समाधान हो जायेगा.

उच्च माध्यमिक के विज्ञान संकाय में सिर्फ एक शिक्षक

सोनाय अनूप उच्च माध्यमिक विद्यालय भान टेकती मधेपुरा में बीपीएससी द्वारा केवल चार शिक्षकों को पदस्थापित किया गया है. इसे मिलाकर कुल 22 शिक्षक-शिक्षिकाएं विद्यालय में पदस्थापित हैं. इसमें माध्यमिक के लिए कुल 13 शिक्षक हैं तो, उच्च माध्यमिक के लिए कला संकाय में चार, भाषा विषय में हिंदी के एक, अंग्रेजी के एक, उर्दू के एक, कंप्यूटर के एक शिक्षक एवं विज्ञान संकाय में केवल बायोलॉजी में एक शिक्षक पदस्थापित हैं. बाकी सभी विषयों का पद रिक्त है.

सावधिक परीक्षा में 853 में से 545 छात्र हुए उपस्थित

इन दिनों विद्यालय में प्रथम सावधिक परीक्षा हो रही है. इसमें विद्यालय में कुल नामांकित 853 छात्रों में से 545 छात्र उपस्थित हो रहे हैं. उन्हें बैठने तक में काफी परेशानी हो रही है. जिस विद्यालय में 200 छात्रों की बैठने की व्यवस्था हो, वहां 545 विद्यार्थी बैठकर कैसे परीक्षा दे सकेंगे. जब सभी 853 छात्र परीक्षा देने पहुंच जाते तो विद्यालय में और परेशानी बढ़ सकती थी. हालांकि विद्यालय में छात्रों को तीन कमरे भर जाने के बाद चौथे कमरे स्मार्ट क्लास इसके अलावे बरामदे, सीढ़ी पर छात्र-छात्राओं ने किसी तरह बैठकर परीक्षा दे रहे हैं. एक बेंच पर पांच से छह छात्र बैठे थे.

कहते हैं प्रधानाध्यापक

मैंने अपने कार्यकाल से कई बार विभाग को विद्यालय में भवन निर्माण कराने की मांग की है. यहां पूर्व में कलेक्टर राजेश कुमार आये हुए थे. उन्होंने भी कहा गया था कि यहां भवन की सख्त जरूरत है. उनके द्वारा भी आश्वासन दिया गया. लेकिन अब तक कुछ नहीं हो सका है. मेरे अलावा पूर्व के प्रधानाध्यापक द्वारा भी मांग की गयी थी, लेकिन विभाग से कोई सुनवाई नहीं हो रही है.
– डॉ अजय कुमार, प्रधानाध्यापक

एक बेंच पर छह लड़कियां बैठकर दे रहीं परीक्षा

विद्यालय में रूम नहीं है. इस कारण हमलोगों को पढ़ने में परेशानी होती है, रूम नहीं होने के कारण हमलोग रेगुलर स्कूल नहीं आ सकते हैं. क्योंकि सोचते हैं कि स्कूल जाएंगे तो बैठने की जगह मिलेगी या नहीं. आज परीक्षा देने स्कूल आये, तो यहां बरामदे पर बैठकर परीक्षा देनी पड़ रही है.
-सोनम कुमारी, कक्षा 11वीं
हमारे विद्यालय में केवल चार कमरे हैं. एक रूम में स्मार्ट क्लास चलता है. रूम में जगह नहीं मिलने के कारण बहुत सारे विद्यार्थी स्कूल नहीं आ पाते हैं. परीक्षा देने आये हैं. बहुत दिक्कत होती है. एक बेंच पर छह लड़कियों को बैठना पड़ताहै.
-खुशबू परवीन, कक्षा 12वीं
स्कूल के सभी शिक्षक बहुत अच्छा पढाते हैं, लेकिन स्कूल में क्लास रूम ही नहीं है. इस कारण बहुत सारे विद्यार्थी विद्यालय आना नहीं चाहते हैं. यदि क्लास रूम बन जायेगा तो, हमलोग रेगुलर क्लास करेंगे.
-करण कुमार, कक्षा 10वीं

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