बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार के खिलाफ, फोटो एक्स

बांग्लादेश में एक और हिंदू की मौत, भीड़ ने चोर समझ कर दौड़ाया, युवक जान बचाने के लिए तालाब में कूदा, लेकिन….

Bangladesh Hindu Man dies by drowning: बांग्लादेश में चोरी के शक में एक हिंदुू युवक को कुछ लोगों ने दौड़ लिया. भारी भीड़ द्वारा पीछा किए जाने के बाद वह जाने बचाने के लिए एक तालाब में कूद गया, लेकिन संभवतः तैरना न जानने के कारण उसकी डूब कर मौत हो गई.

Bangladesh Hindu Man dies by drowning: बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्रीय संसदीय चुनाव से पहले अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं थमने का नाम ही नहीं ले रही हैं. इसी कड़ी में एक और मामला सामने आया है, जिसमें एक हिंदू युवक की संदिग्ध हालात में जान चली गई. बांग्लादेश में एक हिंदू युवक मिथुन सरकार की मौत का मामला सामने आया है. आरोप है कि कुछ लोगों ने उसे चोरी का आरोपी बताते हुए पीछा किया. जान बचाने की कोशिश में मिथुन सरकार एक जलाशय में कूद गया, लेकिन तैर न पाने के कारण डूब गया और उसकी मौत हो गई. मोहम्मद यूनुस के शासन में बांग्लादेश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था के साथ सांप्रदायिक तनाव बढ़ता ही जा रहा है. 

ताजा घटना बांग्लादेश के उत्तरी जिले नाओगांव के मोहादेवपुर इलाके की है. नाओगांव के पुलिस अधीक्षक मोहम्मद तारिकुल इस्लाम ने एएनआई को बताया कि चोरी के आरोप में भीड़ द्वारा पीछा किए जाने के बाद युवक पानी में कूद गया, जहां उसकी मौत हो गई. सूचना मिलने पर पुलिस ने फायर सर्विस की मदद से शव को बाहर निकाला. उन्होंने कहा कि शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है और पूरे मामले की जांच जारी है, हालांकि उन्होंने विस्तृत जानकारी नहीं दी.

पिछले कुछ दिनों में गई हिंदुओं की जान

जैसे-जैसे बांग्लादेश में 13वें राष्ट्रीय संसदीय चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं में तेज बढ़ोतरी देखी जा रही है. हिंसा की यह नई लहर उस्मान हादी की हत्या के बाद और बढ़ी है. 12 दिसंबर को इंकलाब मंचो के संस्थापक हादी की दो हमलावरों ने गोली मार दी, जिनकी 18 दिसंबर को इलाज के दौरान मौत हो गई. इसके बाद से हिंदुओं के खिलाफ लगातार हिंसा हो रही है. बीते 20 दिन में तो आंकड़ों के हिसाब से 7 लोगों की मौत हो गई. इनमें सबसे पहले फैक्ट्री वर्कर दीपू चंद्र दास को मॉब लिंच किया गया और फिर शरीर को पेड़ से बांधकर आग लगा दी गई. 

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ताजा घटना से कुछ ही समय पहले बांग्लादेश के नरसिंदी शहर में एक 40 वर्षीय हिंदू व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी. वह एक किराना दुकान का मालिक था और अज्ञात हमलावरों ने उस पर धारदार हथियार से हमला किया. मोनी चक्रवर्ती पर सोमवार रात करीब 11 बजे पालाश उपजिला के चारसिंधुर बाजार में हमला किया गया और उनकी मौत हो गई. पालाश थाना प्रभारी (ओसी) शाहेद अल मामुन ने बताया कि मोनी, शिबपुर उपजिला के साधरचर यूनियन निवासी मदन ठाकुर के बेटे थे. मोनी हाल के हफ्तों में मारे गए वह तीसरे हिंदू कारोबारी थे.

इससे कुछ घंटे पहले एक अन्य हिंदू कारोबारी राणा प्रताप बैरागी की भी हत्या कर दी गई थी. वह एक अखबार के कार्यकारी संपादक भी थे. बांग्लादेश के जेसोर जिले में अज्ञात लोगों ने उन्हें सिर में गोली मार दी. बैरागी, खुलना डिवीजन के जेसोर जिले के केशबपुर उपजिला के अरुआ गांव के निवासी थे. यह घटना सोमवार शाम करीब 5:45 बजे कपालिया बाजार में हुई. वहीं 3 जनवरी को खोकन चंद्र दास (50) की भी मौत हो गई थी, जब उन पर बेरहमी से हमला किया गया, उन्हें काटा गया और बाद में आग लगा दी गई. वहीं 24 दिसंबर को राजबाड़ी जिले के पांग्शा उपजिला में अमृत मंडल नामक एक अन्य हिंदू व्यक्ति की कथित तौर पर वसूली के आरोप में पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. 

अन्य तरह की हिंसा भी बढ़ रही

जानलेवा हमलों के अलावा, हिंदुओं और बौद्धों के खिलाफ भी हिंसा के अन्य मामलों में वृद्धि देखी गई है. 2 जनवरी को लक्ष्मीपुर के रामगति इलाके में सत्य रंजन दास की 96 डेसिमल धान की फसल वाली जमीन में आग लगा दी गई. 3 जनवरी को शरियतपुर में व्यापारी खोकन चंद्र दास पर हमला कर उनकी हत्या कर दी गई और बाद में शव को आग के हवाले कर दिया गया. उसी दिन चट्टोग्राम के बोआलखाली उपजिला के अमुचिया यूनियन के वार्ड नंबर 4 में मिलन दास के परिवार को डकैती के दौरान बंधक बना लिया गया. वहीं 3 जनवरी को ही कुमिल्ला के होमना इलाके में सानू दास के घर में डकैती हुई, जहां से 10 भरी सोने के गहने, 12 भरी चांदी और करीब 20,000 टका नकद लूट लिया गया.

हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने कहा 1 महीने में 51 मामले आए

केवल दिसंबर महीने में ही हिंसा की कम से कम 51 घटनाएं दर्ज की गईं. बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के अनुसार, इन घटनाओं में 10 हत्याएं, चोरी और डकैती के 10 मामले, घरों, दुकानों, मंदिरों और जमीन पर कब्जा, लूटपाट और आगजनी की 23 घटनाएं शामिल हैं. इसके अलावा धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और “रॉ का एजेंट” होने जैसे झूठे आरोपों में गिरफ्तारी और प्रताड़ना के चार मामले, बलात्कार के प्रयास की एक घटना और शारीरिक हमले के तीन मामले भी सामने आए. यह सिलसिला जनवरी के पहले सप्ताह में भी जारी रहा.

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