वेनेजुएला पर हमला करके अमेरिका को क्या मिला? US उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने गिनाए 3 फायदे

JD Vance lists benefits by US Operation in Venezuela: संयुक्त राज्य अमेरिका ने शनिवार, 3 जनवरी को वेनेजुएला पर हमला करके तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया. इससे देश में एक शून्यता आ गई, जिसे डेल्सी रोड्रिगेज को कार्यकारी राष्ट्रपति बनाकर पूरा किया गया. इस अमेरिकी अभियान से यूएस को क्या फायदा होगा? उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने 3 तरीके गिनाए; संसाधन, प्राधिकरण और सैन्य शक्ति

JD Vance lists benefits by US Operation in Venezuela: अमेरिका ने 3 जनवरी को वेनेजुएला पर हमला किया और उसके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनकी पत्नी सहित गिरफ्तार कर लिया. इस दुस्साहसिक कार्रवाई से अमेरिका को क्या हासिल होगा? अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस बात का जवाब दिया है. उन्होंने सैन्य अभियान से मिलने वाले रणनीतिक फायदों को रेखांकित किया और कहा कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने से अमेरिका को उस देश के “अविश्वसनीय प्राकृतिक संसाधनों” पर नियंत्रण हासिल करने में मदद मिलेगी, विदेश नीति में अमेरिकी प्रभाव बढ़ेगा और सैन्य ताकत का प्रदर्शन होगा. उनका तर्क था कि इससे आम अमेरिकी नागरिकों को फायदा मिलेगा क्योंकि इससे क्षेत्र में अमेरिका का नियंत्रण और प्रभाव मजबूत होगा.

जेडी वेंस के तर्क का केंद्र यह है कि अब अमेरिका वेनेजुएला के ऊर्जा संसाधनों पर नियंत्रण कर सकेगा. वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल भंडारों में से एक है. फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में जेडी वेंस ने बताया कि “वेनेजुएला में एक तानाशाह को हटाने” से आम अमेरिकियों को कैसे फायदा होगा. उन्होंने कहा, “सबसे पहले, इसका मतलब यह है कि हम वेनेजुएला के उन अविश्वसनीय प्राकृतिक संसाधनों को नियंत्रित कर पाएंगे, जो कई मायनों में अमेरिकियों के लिए फायदेमंद हैं. हम वेनेजुएला के अविश्वसनीय प्राकृतिक संसाधनों को नियंत्रित कर पाएंगे. 

वेनेजुएला के विशाल संसाधनों पर नियंत्रण

उन्होंने संसाधनों के फायदे गिनाते हुए कहा कि ये अमेरिका को रणनीतिक बढ़त (लीवरेज) देते हैं और अमेरिकियों को जिस उच्च गुणवत्ता वाली, कम लागत की ऊर्जा की जरूरत है, उस तक पहुंच सुनिश्चित करते हैं. वेंस का मानना है कि इन संसाधनों पर नियंत्रण से अमेरिका को रणनीतिक बढ़त मिलेगी और अमेरिकियों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली, कम लागत की ऊर्जा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी. यह बयान ऐसे समय आया है जब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन प्रतिबंधित तेल टैंकरों को जब्त करने और वेनेजुएला के तेल की बिक्री को नियंत्रित करने की दिशा में कदम उठा रहा है. व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने कहा है कि वेनेजुएला तभी अपना तेल बेच सकता है जब वह अमेरिकी हितों की पूर्ति करता हो. हालांकि, वेनेजुएला की नई राष्ट्रपति ने कहा कि उनका देश सभी के साथ व्यापार करेगा. 

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दबाव के हथियार के रूप में संसाधनों का इस्तेमाल

जेडी वेंस ने तर्क दिया कि वेनेजुएला के तेल और अन्य संसाधनों पर नियंत्रण से अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय संबंधों में दबाव बनाने की ताकत मिलेगी. इससे वॉशिंगटन उन देशों को प्रभावित कर सकेगा जो अन्यथा अमेरिकी हितों के खिलाफ कदम उठा सकते हैं. उन्होंने कहा कि इन आर्थिक “पर्स स्ट्रिंग्स” (धन की रस्सियों) को नियंत्रित करके अमेरिका बिना जान जोखिम में डाले या बड़े सैन्य संघर्ष के, दबाव बना सकता है. यह रणनीति वेनेजुएला के तेल को वैश्विक बाजार में किस शर्त पर आने दिया जाए, इसे तय करने के अमेरिकी प्रयासों के अनुरूप है, जिसमें जोर दिया गया है कि ऐसी बिक्री अमेरिकी रणनीतिक लक्ष्यों को पूरा करे.

दुनिया को अमेरिकी ताकत का संकेत

आर्थिक और कूटनीतिक लाभों से आगे बढ़ते हुए, जेडी वेंस ने कहा कि यह अभियान अमेरिका की सैन्य शक्ति का स्पष्ट संदेश देता है. अमेरिका की सैन्य ताकत का बखान करते हुए वेंस ने कहा, “शांति बनाए रखने के सबसे अच्छे तरीकों में से एक यह है कि आप साफ कर दें कि जरूरत पड़ने पर आपके पास इस्तेमाल के लिए एक बहुत मजबूत तलवार है. इसलिए मुझे लगता है कि यह हमारे लिए कई तरीकों से अच्छा है, क्योंकि इससे विरोधी ताकतें भविष्य में अमेरिका को चुनौती देने से पहले सोचने पर मजबूर होती हैं.

वेंस ने वैश्विक व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका ने पिछले 200 वर्षों से अपने पड़ोस पर नियंत्रण रखा है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में यह आगे भी जारी रहेगा. उन्होंने कहा, “यह हमारा पड़ोस है और अगर हम अमेरिकी विदेश नीति के उस बुनियादी सिद्धांत का पालन नहीं कर सकते, जो 200 सालों से इसकी आधारशिला रहा है कि हम अपने पड़ोस को नियंत्रित करते हैं, तो बहुत से बुरे लोग इसका फायदा उठा सकते हैं…” उन्होंने आगे कहा कि अपने पड़ोस में अमेरिका ही फैसले करता है. यही हमेशा से होता आया है और राष्ट्रपति के नेतृत्व में यही फिर से होने जा रहा है.”

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