ऑपरेशन सिंदूर की मार से बचने के लिए अमेरिका से गिड़गिड़ाया था पाकिस्तान, FARA से हुआ खुलासा

Pakistan US Lobbying FARA: मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के बाद, पाकिस्तान ने FATF द्वारा ब्लैकलिस्ट होने से बचने के लिए यूनाइटेड स्टेट्स में अपनी लॉबिंग की कोशिशें तेज कर दीं. भारत ने पहलगाम आतंकवादी हमले का जवाब नौ आतंकवादी कैंपों पर सटीक हमलों से दिया था, जिसके बाद FARA डॉक्यूमेंट्स से पता चला कि पाकिस्तान ने इस मामले में अमेरिका से समर्थन मांगा था.

By Govind Jee | January 8, 2026 4:05 PM

Pakistan US Lobbying FARA: 2025 के मई महीने में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर किया, जो पहलगाम आतंक हमले का जवाब था. 22 अप्रैल को हुए इस हमले में 26 नागरिक मारे गए थे. भारत ने पाकिस्तान और पीओजेके में 9 आतंक कैंपों को तबाह किया, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया. इसी दौरान पाकिस्तान ने अमेरिका में अपनी छवि बचाने और FATF की व्हाइटलिस्ट में बने रहने के लिए जोरदार लॉबिंग अभियान शुरू किया.

FARA खुलासे: पाकिस्तान ने अमेरिकी प्रशासन से लगातार संपर्क किया

अमेरिका के Foreign Agents Registration Act (FARA) के दस्तावेजों से खुलासा हुआ कि पाकिस्तान ने अमेरिकी प्रशासन और लॉबिंग फर्मों से लगातार संपर्क किया. पाकिस्तान ने ईमेल, फोन और व्यक्तिगत बैठकें करके अपनी चिंता और अपील अमेरिकी अधिकारियों तक पहुंचाई. दस्तावेजों में बताया गया कि पाकिस्तान ने अमेरिका से कहा कि वह FATF प्रक्रिया में निष्पक्ष और तकनीकी रूप से सही निर्णय करे और उसकी प्रगति को मान्यता दे.

Pakistan US Lobbying FARA in Hindi: ऑपरेशन सिंदूर के बाद तनाव और सीजफायर

भारत ने मई में रणनीतिक स्ट्राइक कर पाकिस्तान की 11 सैन्य संस्थाओं को नुकसान पहुंचाया. इसके बाद पाकिस्तान की ओर से DGMO ने भारत से सीजफायर का प्रस्ताव रखा, जिसे भारत ने स्वीकार कर लिया. विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भी दोनों देशों के बीच सभी प्रकार की सैन्य कार्रवाई को रोकने की पुष्टि की. इस बीच, भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आतंक कैंपों को पूरी तरह निशाना बनाया और आतंक के खिलाफ स्पष्ट संदेश दिया.

FARA क्या है?

FARA (Foreign Agents Registration Act) अमेरिका का एक कानून है, जिसे 1938 में बनाया गया था. इसका मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति या संस्था विदेशी सरकार या संगठन के लिए अमेरिका में काम करती है, खासकर राजनीतिक या प्रचार संबंधी, तो उन्हें अमेरिकी सरकार के पास रजिस्टर करना होगा. इसमें यह भी बताना होता है कि पैसा कहाँ से आया और काम क्या किया गया. FARA का मकसद है कि अमेरिका और लोग जान सकें कि विदेशी देश या संगठन अमेरिकी पॉलिसी या जनता पर कैसे असर डाल रहे हैं. अगर कोई रजिस्टर नहीं करता तो जुर्माना या जेल भी हो सकती है.

FATF में व्हाइटलिस्ट बनाए रखने की कोशिश

अक्टूबर 2022 में पाकिस्तान FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर आया था. FATF ग्रे लिस्ट में रहने पर देश को अंतरराष्ट्रीय मदद और ऋण मिलने में कठिनाई होती है. FARA दस्तावेजों के मुताबिक पाकिस्तान ने अमेरिका को भरोसा दिया कि उसने FATF की शेष शर्तों को पूरा किया है और वह जानकारी साझा करने के लिए पूरी तरह तैयार है. पाकिस्तान ने यह भी कहा कि उसने एंटी-मनी लॉन्डरिंग और आतंक फाइनेंसिंग नियमों में लगातार प्रगति की है.

अमेरिका से मदद की अपील और भारत पर अप्रत्यक्ष आरोप

पाकिस्तान ने FARA दस्तावेजों में कहा कि वह चाहता है कि FATF की प्रक्रिया निष्पक्ष रहे. उसने यह भी लिखा कि किसी विशेष क्षेत्र ने मीडिया के जरिए प्रक्रिया को राजनीतिक बनाने की कोशिश की, जो साफ तौर पर भारत की तरफ इशारा था. पाकिस्तान ने अमेरिका से मदद मांगकर अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी बचाने की कोशिश की, जबकि भारत ने आतंकवादी आधारों को पूरी तरह निशाना बनाकर स्पष्ट संदेश दिया.

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