8 युद्ध रोके फिर भी इस NATO मेंबर ने की मूर्खता, मादुरो को बिस्तर से उठाने वाले ट्रंप ने सबको डराया धमकाया

Donald Trump NATO: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर खुद को वैश्विक शांति और सख्त नेतृत्व का प्रतीक बताया है. ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने अकेले अपने फैसलों से आठ बड़े युद्धों को समाप्त कराया, लेकिन NATO का सदस्य नॉर्वे ने मूर्खता से मुझे नोबल पीस प्राइज नहीं दिया. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के बिना NATO से न तो रूस डरता है और न ही चीन. ट्रंप ने अंत में सवाल उठाया कि अगर कभी अमेरिका खुद खतरे में पड़े, तो क्या NATO उसी तरह उसकी मदद करेगा.

Donald Trump NATO: वेनेजुएला पर कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो व उनकी पत्नी की गिरफ्तारी करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर खुद को वैश्विक शांति और सख्त नेतृत्व का प्रतीक बताया है. ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने अकेले अपने फैसलों से आठ बड़े युद्धों को समाप्त कराया. इसी पृष्ठभूमि में उन्होंने नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर नॉर्वे पर सवाल उठाए और अपनी विदेश नीति के दावों को दोहराया. ट्रंप का कहना है कि भले ही नोबेल शांति पुरस्कार उनके लिए खास मायने न रखता हो, लेकिन नॉर्वे द्वारा उन्हें इस सम्मान से वंचित करना उनके साथ अन्याय है. गौर करने वाली बात है कि नोबेल शांति पुरस्कार समारोह की मेजबानी नॉर्वे करता है.

ट्रुथ सोशल पर साझा किए गए संदेश में ट्रंप ने कहा, ‘‘सभी बड़े NATO समर्थकों को याद दिला दूं- वे 2% जीडीपी पर थे और ज्यादातर अपने बिल तक नहीं चुका रहे थे, जब तक कि मैं नहीं आया. अमेरिका बेवकूफी में उनका खर्च उठा रहा था! मैं सम्मानपूर्वक उन्हें 5% जीडीपी तक ले आया और अब वे तुरंत भुगतान करते हैं. सब कहते थे कि यह मुमकिन नहीं है, लेकिन यह हो सका, क्योंकि सबसे बढ़कर वे सभी मेरे दोस्त हैं.’’ उन्होंने आगे कहा, ‘‘मेरे दखल के बिना इस वक्त रूस के पास पूरा यूक्रेन होता. यह भी याद रखें कि मैंने अकेले दम पर 8 युद्ध खत्म किए, और NATO का सदस्य नॉर्वे ने मूर्खता से मुझे नोबल पीस प्राइज नहीं दिया. लेकिन उससे कोई फर्क नहीं पड़ता! जो मायने रखता है, वह यह कि मैंने लाखों लोगों की जान बचाई.’’

ट्रंप ने अपनी विदेश नीति को अमेरिका की सैन्य शक्ति से जोड़ते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में अमेरिकी सेना को फिर से मजबूत किया गया, जिससे दुनिया भर में अमेरिका की पकड़ और प्रभाव बढ़ा. उनके मुताबिक, इसी ताकत के चलते वेनेजुएला जैसे देशों पर दबाव बना, बड़े टकराव टले और कई मोर्चों पर शांति की दिशा में कदम बढ़े. उन्होंने लिखा कि चीन और रूस जिनसे सच में डरते और जिनका सम्मान करते हैं, वह केवल एक सशक्त और पुनर्निर्मित अमेरिका है.

NATO मेंबर्स रक्षा खर्च को लेकर अपनी जिम्मेदारियों से बचते रहे- ट्रंप

उन्होंने यह भी दोहराया कि अपने पहले कार्यकाल में, खासकर मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका में उठाए गए कड़े और निर्णायक कदमों के कारण वे नोबेल शांति पुरस्कार के वास्तविक हकदार थे. ट्रंप अक्सर अपने रिकॉर्ड की तुलना पूर्व नोबेल विजेताओं से करते रहे हैं. उसी पोस्ट में ट्रंप ने NATO सहयोगी देशों पर भी निशाना साधा. उनका आरोप था कि कई सदस्य देश रक्षा खर्च को लेकर अपनी जिम्मेदारियों से बचते रहे और तब तक योगदान नहीं बढ़ाया, जब तक उन्होंने खुद सख्ती नहीं दिखाई. ट्रंप के अनुसार, अमेरिका लंबे समय तक बेवजह उनके सुरक्षा खर्च का बोझ उठाता रहा.

रूस और चीन केवल अमेरिका से डरते हैं

नॉर्वे को NATO का संस्थापक सदस्य बताते हुए ट्रंप ने कहा कि यह देश अमेरिकी सुरक्षा छतरी का फायदा तो उठाता है, लेकिन वैश्विक शांति बनाए रखने में अमेरिका और खासकर उनकी भूमिका को मान्यता देने से कतराता है. रूस और NATO पर बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी समर्थन के बिना रूस, NATO को गंभीरता से नहीं लेता. उन्होंने यह दावा भी किया कि उनके हस्तक्षेप के कारण ही रूस यूक्रेन पर पूरी तरह कब्जा नहीं कर पाया.

रूस चीन का नाम लेकर ट्रंप ने डराया

पोस्ट के कुछ हिस्सों में बड़े अक्षरों का इस्तेमाल करते हुए ट्रंप ने लिखा कि अगर उनका दखल न होता तो आज यूक्रेन की स्थिति बिल्कुल अलग होती. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के बिना NATO से न तो रूस डरता है और न ही चीन. ट्रंप ने अंत में सवाल उठाया कि अगर कभी अमेरिका खुद खतरे में पड़े, तो क्या NATO उसी तरह उसकी मदद करेगा. इसके साथ ही उन्होंने फिर दोहराया कि चीन और रूस जिस एकमात्र देश से डरते और जिसका सम्मान करते हैं, वह संयुक्त राज्य अमेरिका है और यह स्थिति उनके नेतृत्व में अमेरिकी सैन्य शक्ति के पुनर्निर्माण के बाद बनी.

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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