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नवाज ने बुलायी सर्वदलीय बैठक, इमरान खान रहे गायब

इस्लामाबाद : पाकिस्तान के राजनीतिक दलों के नेताओं ने आज भारत को चेतावनी दी कि अगर वह सिंधु जल संधि को रद्द करने का एकतरफा फैसला करता है तो इसे ‘आक्रमकता की कार्रवाई’ माना जाएगा. उन्होंने बलूचिस्तान में भारत के ‘दखल’ की निंदा भी की.प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई राजनीतिक और संसदीय पार्टियों […]

इस्लामाबाद : पाकिस्तान के राजनीतिक दलों के नेताओं ने आज भारत को चेतावनी दी कि अगर वह सिंधु जल संधि को रद्द करने का एकतरफा फैसला करता है तो इसे ‘आक्रमकता की कार्रवाई’ माना जाएगा. उन्होंने बलूचिस्तान में भारत के ‘दखल’ की निंदा भी की.प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई राजनीतिक और संसदीय पार्टियों के नेताओं की विशेष बैठक के बाद जारी साझा बयान के अनुसार इन नेताओं ने ‘क्षेत्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाली अकारण भारतीय आक्रमकता और बार बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किए जाने की निंदा की. ‘ नियंत्रण रेखा के पार आतंकी ठिकानों पर भारत के लक्षित हमले (सर्जिकल स्ट्राइक) के कुछ दिनों बाद आज शरीफ और उनकी कैबिनेट के वरिष्ठ सदस्यों ने भारत-पाक सीमा पर ताजा हालात के बारे में विपक्षी नेताओं को जानकारी दी.

इन नेताओं ने कहा कि भारत ‘नियंत्रण रेखा के पार आतंकवाद का फर्जी दावा करके कश्मीर के लोगों के अपने जन उभार को दबाने के लिए किए जा रहे बर्बर अत्याचार से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा है. हम उसकी इस कोशिश को खारिज करते हैं. ‘ भारत की ओर से 56 साल पुराने सिंधु जल संधि की समीक्षा किए जाने के कयास वाली खबरों के बीच पाकिस्तानी नेताओं ने ‘भारत के इस कथित इरादे’ की निंदा करते हुए कहा कि ‘लोगों के खिलाफ पानी का इस्तेमाल हथियार के तौर पर करना न सिर्फ पाकिस्तान, बल्कि पूरे क्षेत्र के विरुद्ध है तथा यह उसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का घोर उल्लंघन भी है. सिंधु जल संधि को एकतरफा रद्द करने का कोई भी भारतीय प्रयास आक्रमकता की कार्रवाई की के तौर पर लिया जाएगा. ‘ नेताओं ने भारत के साथ तनाव के बीच सरकार के प्रति अपना पूरा समर्थन जताया. उन्होंने सर्वसमत्ति से संकल्प लिया कि कश्मीरी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को समर्थन देने में पाकिस्तान एकजुट बना रहेगा.
पाकिस्तानी नेताओं ने ‘पाकिस्तान को अस्थिर करने के प्रयास के अलावा संप्रभु पाकिस्तान की संघीय इकाई बलूचिस्तान में भारत के प्रामाणित हस्तक्षेप’ की भी निंदा की.इस साल नवंबर में इस्लामाबाद में प्रस्तावित दक्षेस शिखर सम्मेलन को स्थिगित किए जाने का हवाला देते हुए नेताओं ने कहा कि ‘द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संवाद के सभी कूटनीतिक प्रयासों को बाधित करने की भारतीय साजिश अफसोसनाक है. ‘ बैठक के दौरान विदेश सचिव एजाज अहमद चौधरी ने अपने देश के नेताओं पर नियंत्रण रेखा के ताजा हालात के बारे में जानकारी दी.
विपक्षी दलों के नेताओं ने भारत के साथ तनाव की पृष्ठभूमि में सरकार के प्रति अपना पूरा समर्थन व्यक्त किया है.पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के प्रमुख बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा कि कई मुद्दों पर सरकार के साथ मतभेद होने के बावजूद उनकी पार्टी कंधे से कंधा मिलाकर खडी है.भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर प्रधानमंत्री को हटाने की मांग कर रहे इमरान खान बैठक से दूर रहे लेकिन पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने बैठक में उनके दल का प्रतिनिधित्व किया.पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के उपाध्यक्ष कुरैशी ने कहा कि बैठक में भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को स्पष्ट संदेश दिया गया कि कश्मीर विवाद पर पाकिस्तान के सभी राजनीतिक दल एकजुट हैं.जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने कहा कि यह एकजुटता दिखाने का समय है.
उन्होंने कहा, ‘‘हमें इस निर्णायक क्षण में एकजुटता दिखाने की जरूरत है. पूरे देश का एक आवाज में बात करना और संकल्प लेना समय की जरुरत है.’ पिछले सप्ताह नियंत्रण रेखा के पार करके भारत की ओर से किए गए लक्षित हमले के बाद पाकिस्तान और भारत में जुबानी जंग जारी है.पाकिस्तान ने लक्षित हमले के भारत के दावे को सीमा पार से की गयी गोलीबारी कहकर खारिज किया है.

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