सिंधु जल समझौता: साथ-साथ नहीं बह सकते खून व पानी

Updated at : 27 Sep 2016 8:36 AM (IST)
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सिंधु जल समझौता: साथ-साथ नहीं बह सकते खून व पानी

नयी दिल्ली : पाकिस्तान की नापाक हरकतों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारत हर विकल्प पर विचार कर रहा है. इसी सिलसिले में सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिंधु नदी के पानी के समझौते को लेकर समीक्षा बैठक की. इसमें पीएम ने अधिकारियों से कहा कि खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते. […]

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नयी दिल्ली : पाकिस्तान की नापाक हरकतों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारत हर विकल्प पर विचार कर रहा है. इसी सिलसिले में सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिंधु नदी के पानी के समझौते को लेकर समीक्षा बैठक की. इसमें पीएम ने अधिकारियों से कहा कि खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते. हम समझौते पर पुनर्विचार करने के लिए गंभीर हैं. रिपोर्ट के मुताबिक पीएम ने यह भी कहा कि अब तक पाक के साथ 112 बैठकें हो चुकी हैं. अब आतंक के माहौल में बातचीत नहीं की जा सकती.

सूत्रों के मुताबिक भारत ने सिंधु समझौते को रद्द करने की अटकलों को तो फिलहाल शांत कर दिया है, लेकिन आक्रामक रुख अपनाने का निर्णय किया है. इसके तहत पाकिस्तान तक पानी की आपूर्ति करनेवाली छह में से तीन नदियों के पानी का खुद ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल की योजना बनायी गयी है. बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश सचिव ए जयशंकर, जल संसाधन सचिव मौजूद थे. समीक्षा बैठक उड़ी आतंकी हमले का पाकिस्तान को मुनासिब जवाब देने के विकल्पों पर विचार के सिलसिले में बुलायी गयी थी.

52 साल पहले हुआ था समझौता

सिंधु जल समझौते पर सितंबर, 1960 में देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किये थे. समझौते के तहत सिंधु और उसकी पांच सहायक नदियों के पानी का बंटवारा किया गया है. इनमें से झेलम, चिनाब और राबी नदियों का 80 प्रतिशत पानी पाकिस्तान को मिलता है. इसी से वहां के एक बड़े क्षेत्र में पानी की जरूरत पूरी की जाती है. समझौते के तहत छह नदियों, व्यास, रावी, सतलज, सिंधु, चिनाब और झेलम के पानी को दोनों देशों के बीच बांटा गया था.

समझौता तोड़े बिना भी रोक देंगे पानी

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक में अफसरों का कहना था कि बिना समझौता तोड़े भी भारत अपने हिस्से का पानी ले सकता है. बैठक में जल संसाधन मंत्रालय के सचिव ने प्रजेंटेशन दिया, जिसमें बताया कि बिना समझौता तोड़े भारत अपने हिस्से का जो पानी पाकिस्तान को दे रहे हैं, उसे कैसे रोका सकता है. यह बात भी सामने अायी कि 3.6 मिलियन एकड़ फीट वाटर स्टोरेज पर भारत का हक है. यह पानी हम पाकिस्तान को ज्यादा दे रहे हैं, जिसे हम रोक सकते हैं.

मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका

सुप्रीम कोर्ट ने सिंधु जल संधि को असंवैधानिक करार देने की मांग करने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार किया है. प्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर और न्यायमूर्ति एएम खानविलकर की पीठ ने कहा कि इस मामले में कोई जल्दी नहीं है. यह याचिका तय प्रक्रिया के तहत सुनवाई के लिए आयेगी. वकील एमएल शर्मा ने इस मुद्दे पर निजी तौर पर जनहित याचिका दायर की है.

कई फैसले

1. झेलम सहित पाकिस्तान नियंत्रित नदियों के पानी का भारत अधिकतम दोहन करेगा.

2. संधि के ब्योरे और क्रियान्वयन पर विचार के लिए एक अंतर मंत्रालयी कार्य बल गठित होगा

3. आतंक का माहौल खत्म होने तक सिंधु जल आयोग की बैठक नहीं

4. 1987 की तुलबुल नौवहन परियोजना को एक पक्षीय तरीके से स्थगित किये जाने की भी समीक्षा होगी.

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