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पहले इंडियन आइडल अभिजीत सावंत का दावा- आज भी लोग याद करते हैं पहला सीज़न

Updated at : 26 Dec 2018 8:49 AM (IST)
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पहले इंडियन आइडल अभिजीत सावंत का दावा- आज भी लोग याद करते हैं पहला सीज़न

हरियाणा के सलमान अली इंडियन आइडल के दसवें सीज़न के विजेता बन गए हैं. सोनी टीवी पर ये शो साल 2004 में शुरू हुआ था और अभिजीत सावंत इसके पहले सीज़न के विजेता बने थे. बीते 14 साल में रिएलिटी शो कितने बदल गए? इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए बीबीसी मराठी ने अभिजीत […]

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हरियाणा के सलमान अली इंडियन आइडल के दसवें सीज़न के विजेता बन गए हैं. सोनी टीवी पर ये शो साल 2004 में शुरू हुआ था और अभिजीत सावंत इसके पहले सीज़न के विजेता बने थे.

बीते 14 साल में रिएलिटी शो कितने बदल गए? इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए बीबीसी मराठी ने अभिजीत सावंत से बात की. उन्होंने अपने 13 साल के सफ़र और इस दौरान आए बदलाव पर खुलकर बात की.

अभिजीत कहते हैं, "पिछले दशक में सोशल मीडिया का उभार सबसे बड़े बदलाव के रूप में जाना जाता है. सोशल मीडिया की मदद से दर्शक आप तक और आप दर्शकों तक आसानी से पहुंच सकते हैं. लेकिन ये भी सच है कि रिएलिटी शो की संख्या पहले के मुकाबले बढ़ी है, जिस कारण लोग अब एक कार्यक्रम पर कम ध्यान देते हैं."

अभिजीत का गाया गाना ‘मोहब्बतें लुटाउंगा’ एक दौर में बहुत ही हिट था.

वो अपनी जीत के वक़्त को याद करते हुए कहते हैं, "2005 में इंडियन आइडल जीतना मेरे लिए बहुत ही अविश्वसनीय पल था. उसके बाद का दौर एक नई दुनिया में प्रवेश करने जैसा था. देश के लोगों की भावनाएं आज भी पहले सीज़न के साथ ज़्यादा जुड़ी हुई हैं."

वो आगे कहते हैं,"आज भी कई लोग पहचान लेते हैं. एक फिल्म के लिए गया था जहां एक व्यक्ति ने पहचान लिया और जोर से चिल्लाया अभिजीत सावंत. मेरे लिए ये बहुत ही अच्छा अनुभव था."

अभिजीत बताते है कि ऐसा माना जाता है कि बच्चों के रिएलिटी शो में कई दिक्कतें आती हैं लेकिन आज उन्हें देख कर ऐसा लगता नहीं है.

वो कहते हैं, "लोगों को लगता है कि छोटे बच्चे गाना गाएं तो उनको दिक्कत हो सकती है, लेकिन जब मैं आज उनके गाने सुनता हूं तो इसके विपरीत ही महसूस करता हूं. 20-22 साल की उम्र में गाने को लेकर जो समझ मुझ में थी वही समझ और गायकी आज 15-16 साल की उम्र के बच्चों में दिखाई देती है.’

वे कहते हैं कि प्रतिस्पर्धा में शामिल होने से पहले बच्चों की काउंसलिंग होनी चाहिए क्योंकि जो बच्चे पीछे रह जाते हैं उन्हें निराश नहीं होना चाहिए. उन्हें ये मानना चाहिए कि ये टूर्नामेंट था और अब वे विश्वकप की तैयारी कर रहे हैं.

"कोई भी मुक़ाबला पहले नंबर पर आने के लिए नहीं होता बल्कि आपकी तैयारी कितनी है ये जानने का मौका होता है."

अभिजीत कहते हैं कि इससे आप अपनी अगली पारी की तैयारी बेहतर कर सकते हैं. कोई भी प्रतियोगिता आपके करियर का अंत नहीं होती और ये सब प्रतियोगिता में शामिल होने से पहले बताया जाना चाहिए.

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