कराची स्थित भगवान शिव के मंदिर में हिंदू बच्चों को पढ़ा रहे मुस्लिम शिक्षक

पाकिस्तान के कराची में स्थित है एक शिव मंदिर. यूं तो पाकिस्तान में किसी मंदिर का होना अपने आप में बहुत बड़ी बात है, परंतु चर्चा अगर उससे भी बड़ी हो तो क्या कहने. दरअसल, इस स्कूल में शिक्षक जब ‘अस्सलामुअलैकुम’ कहती हैं तो उन्हें जोर से जवाब मिलता है ‘जय श्री राम.’ पढ़ने वाले […]
पाकिस्तान के कराची में स्थित है एक शिव मंदिर. यूं तो पाकिस्तान में किसी मंदिर का होना अपने आप में बहुत बड़ी बात है, परंतु चर्चा अगर उससे भी बड़ी हो तो क्या कहने. दरअसल, इस स्कूल में शिक्षक जब ‘अस्सलामुअलैकुम’ कहती हैं तो उन्हें जोर से जवाब मिलता है ‘जय श्री राम.’ पढ़ने वाले बच्चे हैं हिंदू और पढ़ाने वाली शिक्षिका हैं ‘अनम आगा’.
सुबह स्कूल पहुंचने पर वह अपना हिजाब सही करते हुए कहती हैं कि जब वह बच्चों से हाथ मिलाकर अस्सलामुअलैकुम कहती हैं तो बच्चे उन्हें जोर से जवाब देते हैं ‘जय श्री राम’. यह सिर्फ एक दिन की नहीं बल्कि हर सुबह की दिनचर्या है. मंदिर के पुजारी रूप चंद कहते हैं कि मंदिर में सबका स्वागत होता है और हम तो मानवता की सेवा करते हैं. वह कहते हैं कि यहां आप अपने अलग धर्म के बावजूद प्रवेश कर सकते हैं क्योंकि यहां कोई प्रतिबंध नहीं है.
मंदिर में मुस्लिम अध्यापकों द्वारा हिंदुओं को पढ़ाया जाना विविधता का बड़ा उदाहरण है. रूप चंद बताते हैं कि हमने खुद का स्कूल खोलने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उसके लिए बहुत ज्यादा पैसे मांगे. हमें कहा गया कि स्थानीय हिंदू अतिक्रमण करते हैं और उन्हें यहां स्कूल नहीं खोलने दिया जा सकता है. रूप चंद ने अपने समुदाय के लोगों से यह भी मांग की है कि वे स्कूल के समय मंदिर में न आयें. हालांकि, अभी तक इस स्कूल में किताबों और फर्नीचर की भारी कमी है. फिलहाल इस स्कूल में 93 हिंदू बच्चे पढ़ रहे हैं.
पढ़ाई के समय लोगों के मंदिर में आने की है मनाही
पिछले साल से बच्चों को पढ़ा रही हैं अनम
अनम यहां के छात्रों को बुनियादी शिक्षा देती हैं. बीते साल अनम ने रहमान कॉलोनी के सरकारी डीएमसी स्कूल में 100 बच्चों का दाखिला कराया. अनम साल 2017 से ही इस स्कूल में पढ़ा रही हैं. यह स्कूल इनिशिएटर ह्यूमन डिवेलपमेंट फाउंडेशन नाम की गैर लाभकारी संस्था द्वारा मंदिर में शुरू किया गया है ताकि वंचित बच्चों को शिक्षा और सपोर्ट मिल सके. हैरानी की बात यह है कि स्थानीय हिंदू समुदाय ने ही संस्था को मंदिर के अंदर स्कूल खोलने का प्रस्ताव दिया. अभी तक इस इलाके में न तो कोई सरकारी और न ही प्राइवेट स्कूल खुला था.
मंदिर में पैर रखने का कभी सोचा भी नहीं था अनम ने
पिछले साल तक अनम ने कभी मंदिर के अंदर पैर रखने तक का नहीं सोचा था लेकिन अब वह रोज यहां अकेली आती हैं. लेकिन, जब अनम को हिंदू समुदाय की पिछड़ी जातियों के परिवारों के बच्चों को पढ़ाने का मौका मिला तो वह मना नहीं कर सकीं. अनम कहती हैं कि एक मुस्लिम टीचर होने के नाते मेरे लिए यह गर्व की बात है कि हिंदू समुदाय मुझे अपने बच्चों को पढ़ाने दे रहा है. अनम कहती हैं कि बीते साल मुस्लिम शिक्षकों और उनके हिंदू छात्रों ने यहां होली, रक्षाबंधन, दिवाली और अन्य त्योहार साथ मनाये.
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