फसलों के नुकसान से किसानों के सपने टूटे, अब परिवार को भविष्य व कर्ज चुकाने की चिंता

Author : Pritish Sahay Published by : Prabhat Khabar Updated At : 17 Mar 2020 1:42 AM

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बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि से फसलों को काफी नुकसान हुआ है. सब्जी व रबी फसल की बर्बादी से टूट चुके किसानों को अब कर्ज चुकाने के साथ-साथ परिवार के भविष्य की चिंता भी सताने लगी है.

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बेमौसम बारिश व अोलावृष्टि की मार. फसलों के नुकसान से किसानों के सपने टूटे

बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि से फसलों को काफी नुकसान हुआ है. सब्जी व रबी फसल की बर्बादी से टूट चुके किसानों को अब कर्ज चुकाने के साथ-साथ परिवार के भविष्य की चिंता भी सताने लगी है. मुनाफा होने पर किसी को बेटी की शादी करनी थी, तो किसी को पिता का इलाज कराना था. लेकिन अब इनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया

मांडर : ओलावृष्टि से सेवाडीह गांव के तिल्ला उरांव की स्ट्रॉबेरी समेत करीब डेढ़ लाख की खेती बर्बाद हुई है. उन्होंने कहा कि 80 हजार लोन ले रखा है. सोचा था कि फसल बेच कर लोन चुकता करेंगे. लेकिन अब कुछ सूझ नहीं रहा है. सरवा गांव के समसुल अंसारी ने कहा कि पांच एकड़ में लगी फसल बर्बाद हो गयी. करीब तीन लाख रुपये डूब गया. सोच रखा था कि फसल बेच कर इकलौती बेटी की शादी करेंगे. लेकिन ओलावृष्टि ने पानी फेर दिया. नगड़ा बरटोली गांव के सफीक अंसारी की करीब तीन लाख की सब्जी की खेती बर्बाद हो गयी. उन्होंने कहा कि सारी जमा पूंजी बर्बाद हो गयी. उनके गांव के लोगों ने बताया कि सफीक फसल की बर्बादी देख रविवार को कुएं में कूदकर आत्महत्या करने जा रहे थे. लोगों ने काफी मुश्किल से उन्हें समझा-बुझाकर रोका. यही हाल बरटोली के किसान एतवा उरांव की है.

मांडर में कई किसानों को हुआ भारी नुकसान

तिल्ला उरांव, ग्राम सेवाडीह : दो एकड़ में गोभी, आलू, पालक, मेथी व 15 डिसमिल में स्ट्रॉबेरी की खेती. नुकसान डेढ़ लाख, लोन 80 हजार.

समसुल अंसारी, ग्राम सरवा : ढाई एकड़ में गोभी, शिमला मिर्च, फ्रेंचबीन व गेहूं, नुकसान तीन लाख.

सफीक अंसारी, ग्राम नगड़ा बरटोली : तीन एकड़ में गोभी, मिर्च व मटर, नुकसान तीन लाख.

एतवा उरांव, ग्राम बरटोली : दो एकड़ में आलू, मटर, टमाटर, गेहूं व मिर्च की खेती, नुकसान दो लाख, लोन 70 हजार.

हातिम अंसारी, ग्राम बरटोली : दो एकड़ में गोभी, मटर व फ्रेंचबीन, नुकसान डेढ़ लाख.

राजेश महतो, ग्राम टटकुंदों : पांच एकड़ में मटर, फ्रेंचबीन, प्याज व मिर्च की खेती बर्बाद. नुकसान डेढ़ लाख, लोन एक लाख.

जेठू महतो, ग्राम झिंझरी : नुकसान एक लाख, केसीसी लोन 50 हजार.

रामपाल महतो, ग्राम टटकुंदों : दो एकड़ में लगी फसल बर्बाद. नुकसान एक लाख, केसीसी लोन 50 हजार.

आनंद महतो, ग्राम झिंझरी : नुकसान 60 हजार, लोन 50 हजार.

भागीरथ महतो, ग्राम झिंझरी : एक एकड़ में लगी फसल बर्बाद, नुकसान करीब 50 हजार, कर्ज साहूकार से एक लाख.

उमेश महतो, ग्राम टटकुंदों : तीन एकड़ में लगी फसल बर्बाद, नुकसान डेढ़ लाख, केसीसी लोन डेढ़ लाख.

अशोक महतो, ग्राम टटकुंदो : पांच एकड़ में लगी करीब ढाई लाख की फसल बर्बाद, कर्ज साहूकार से एक लाख.

बहादुर गोप, ग्राम सेवाडीह : नुकसान 50 हजार

पंचम गोप, ग्राम सेवाडीह : नुकसान एक लाख

बेड़ो में लगभग 3000 हेक्टेयर में फसल की बर्बादी

बेड़ो. प्रखंड में फसल की बर्बादी के साथ ही किसानों के सपने भी टूट गये. पाकलमेड़ी गांव के किसान नवदीप कुमार महतो ने कहा कि एक लाख का कृषि ऋण लेकर खेती की थी. सोचा था मुनाफा होने पर किडनी की बीमारी से ग्रसित पिताजी का इलाज कराऊंगा, लेकिन अब संभव नहीं है. कृषक मित्र प्रखंड अध्यक्ष बिंदेश्वर महतो ने एक लाख ऋण लेकर आलू व मटर की खेती की थी. ऋण लेकर ही बिटिया की शादी की थी. सोचा था फसल अच्छी होगी तो बैंक ऋण के साथ दूसरे से लिया पैसा भी वापस कर दूंगा, पर खेती के नुकसान से बर्बाद हो गये.

खत्री खटंगा के इशू उरांव ने 30 हजार ऋण लेकर मटर, फ्रेंचबीन व गेहूं की खेती की थी. पर फसल बर्बाद होने से बिटिया की शादी करना सपना ही रह गया. फादिल मर्चा गांव के रंथु महतो ने बताया कि कर्ज लेकर खेती की थी. फसल अच्छी होने पर इस बार डीप बोरिंग कराना था, लेकिन अब नहीं हो पायेगा. यहीं हालत केशा निवासी आसिक खलिल की है. जरीया पुरनाडीह के ब्रजेश महतो, गढ़हाटोली के किसान बिंदेश्वर गोप समेत दर्जनों किसानों की है. बीटीएम जनक कुमार सिंह ने बताया कि अोलावृष्टि व बेमौसम बारिश से प्रखंड क्षेत्र में 2500 से 3000 हेक्टेयर में लगी करोड़ों रुपये की रबी व गर्मा फसल बर्बाद हो गयी.

बेड़ो में 4868 किसानों ने 22.94 करोड़ का लिया है कृषि ऋण

बेड़ो प्रखंड के विभिन्न बैंकों से लगभग 4868 किसान खेती के लिए लगभग 22 करोड़ 94 लाख रुपये का कृषि ऋण लिए हुए हैं. बैंक आॅफ इंडिया से 1485 किसानों ने छह करोड़ 94 लाख, यूको बैंक से लगभग 1200 किसानों ने पांच करोड़ 28 लाख, झारखंड ग्रामीण बैंक से लगभग 950 किसानों ने चार करोड़, केनरा बैंक से 463 किसानों ने दो करोड़ 56 लाख, बैंक आॅफ बड़ौदा से 150 किसानों ने लगभग 86 लाख, रांची-खूंटी काॅपरेटिव बैंक से 450 किसानों ने लगभग एक करोड़ 60 लाख व एसबीआइ से किसानों ने एक करोड़ 70 लाख का कृषि ऋण लिया है.

चान्हो. प्रभावित िकसानों की संख्या सैकड़ों में, अौसतन 50 हजार का नुकसान

चान्हो. प्रखंड में ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों की संख्या सैकड़ों में है. जो किसान खेती पर ही आश्रित हैं, उनमें से किसी को भी 50 हजार से कम नुकसान नहीं हुआ है. इनमें दर्जनों ऐसे हैं, जिन्होंने केसीसी लोन ले रखा है. चोरेया निवासी हिमांशु साहू की करीब दो लाख की फसल बर्बाद हुई है. इन्होंने 50 हजार का केसीसी का लोन ले रखा है. यही हाल प्रकाश साहू की है. रामचरण साहू ने बताया कि गेहूं व सब्जी की फसल बर्बाद हो गयी है. इससे करीब 70 हजार का नुकसान हुआ है. बैंक से 50 हजार केसीसी लोन लेकर खेती की थी. ओलावृष्टि से चोरेया के ही जमुना सिंह को 80 हजार, बालेश्वर सिंह को 50 हजार व राजकुमार सिंह तथा अनूप साहू को एक-एक लाख की फसल का नुकसान हुआ है. इन्होंने महिला समूह से 50-60 हजार का लोन ले रखा है.

बैंक से कर्ज लेकर की खेती, वह भी हो गयी बर्बाद : पिस्कानगड़ी . सब्जी उत्पादन में अग्रणी नगड़ी प्रखंड के किसानों की बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि ने कमर ही तोड़ दी. चिपरा गांव के सुनील महतो, कलावती देवी, रामजय महतो, दुर्गेश, कामदेव, मुकेश सहित अन्य ने बताया कि बहुत उम्मीद के साथ खेती की थी कि इस वर्ष घर बनाना है. लेकिन प्रकृति की मार ने बर्बाद कर दिया.

डोकाटोली के रंजन महतो, मनोज महतो, नारायण महतो, रामकेश्वर महतो, बिरित महतो, कलेश्वर महतो, अरुण महतो, लाधुराम, गुलशन सोरेंग, भोला महतो ने बताया कि इस माह में दोन से दो फसल उगा लेते थे. लेकिन इस वर्ष अबतक बारिश की वजह से मात्र एक फसल लगी. उसे भी बेमौसम बारिश ने बर्बाद कर दिया. बैंक का सारा पैसा निकालकर खेती में लगाया था. खेत में पानी जमने से टमाटर, प्याज, लहसुन, बीन, फूलगोभी, बंधागोभी अन्य फसल बर्बाद हो गयी.

फसल बर्बाद होने से उम्मीदों पर फिर गया पानी : बुढ़मू. अोलावृष्टि से बरौदी में भारी नुकसान हुआ है. मनीनाथ महतो की पुत्रवधू नीरज देवी ने बताया कि ससुर ने खेती के लिए बैंक से डेढ़ लाख का कृषि ऋण लिया था. उम्मीद थी कि मुनाफा होने पर शादी के समय परिजनों से लिया कर्ज वापस कर देंगे. लेकिन अब तो बैंक का कर्ज वापस करने की चिंता परिवार को सता रही है. बलराम कुमार महतो ने बताया कि बैंक से 50 हजार का लोन लिया था. ओलावृष्टि ने कमर तोड़ दी. लालदेव महतो ने 70 हजार रुपये लोन लेकर खेती की थी.

मुनाफा होने पर बेटी-बेटा की शादी धूमधाम से करते. दोनों की अप्रैल में शादी है. पर उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया. इसी तरह पनेनाथ महतो ने दो लाख, रमेश महतो ने 50 हजार, अमानूल हक ने 50 हजार, सिटु मुंडा ने एक लाख, सचिंद्र महतो ने 50 हजार, रामलाल महतो ने 50 हजार, बहादुर मुंडा ने 50 हजार रुपये लोन लेकर खेती की थी. पर नुकसान के बाद उन्हें लोन वापस करने की चिंता सता रही है.

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Pritish Sahay

लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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