टाइगर हिल को लेकर पहाड़ पर गरमायी राजनीति

Updated at :02 Apr 2017 8:02 AM
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टाइगर हिल को लेकर पहाड़ पर गरमायी राजनीति

दार्जिलिंग. दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र के मशहूर पर्यटन स्थल टाइगर हिल में पर्यटन विभाग द्वारा बंगलो निर्माण को लेकर गोजमुमो तथा तृणमूल कांग्रेस आमने-सामने है. इन दोनों ही पार्टियों ने एक-दूसरे के खिलाफ मोरचा खोल दिया है. राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पहाड़ दौरे से पहले मोरचा नेता विनय तामांग ने इस निर्माण को अवैध […]

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दार्जिलिंग. दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र के मशहूर पर्यटन स्थल टाइगर हिल में पर्यटन विभाग द्वारा बंगलो निर्माण को लेकर गोजमुमो तथा तृणमूल कांग्रेस आमने-सामने है. इन दोनों ही पार्टियों ने एक-दूसरे के खिलाफ मोरचा खोल दिया है. राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पहाड़ दौरे से पहले मोरचा नेता विनय तामांग ने इस निर्माण को अवैध बताते हुए राज्य सरकार पर जीटीए के काम-काज में हस्तक्षेप का आरोप लगाया था. उन्होंने इस मुद्दे को लेकर पहाड़ बंद की धमकी भी दी थी. मोरचा नेताओं का कहना है कि टाइगर हिल की जमीन जीटीए के अधीन है और राज्य सरकार को वहां किसी भी प्रकार के निर्माण से पहले जीटीए से बातचीत करनी चाहिए थी.

लेकिन ऐसा नहीं हुआ. राज्य पर्यटन विभाग जीटीए के विरोध के बाद भी टाइगर हिल में बंगलो का निर्माण कर रही है. इस निर्माण कार्य से पर्यावरण को नुकसान होने की संभावना है. विनय तामांग ने इस मुद्दे को लेकर बंद बुलाने के साथ ही अदालत जाने की भी धमकी दी है. इस बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहाड़ दौरे पर आ गईं और दो दिनों तक यह मुद्दा दबा रहा. ममता बनर्जी शुक्रवार को कोलकाता वापस लौट गई हैं. उसके बाद तृणमूल कांग्रेस ने मोरचा के खिलाफ जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है. तृणमूल कांग्रेस ने पहाड़ पर किसी भी प्रकार के बंद का विरोध किया है.

हिल्स तृणमूल के महासचिव एनबी खवास का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस के शब्दकोष में बंद नाम का शब्द भी नहीं है. बंद का सीधा असर आम लोगों तथा विकास पर पड़ता है. उनकी पार्टी मोरचा के किसी भी प्रकार के बंद का विरोध करेगी. श्री खवास ने कहा कि गोजमुमो नेता पहाड़ का विकास ही नहीं करना चाहते. भावनात्मक मुद्दे भड़का कर वह लोग राजनीति करना चाहते हैं.

टाइगर हिल में निर्माण कार्य का विरोध करना विकास कार्यों को रोकना है. श्री खवास ने कहा कि इससे पहले मोरचा नेता पहाड़ पर विभिन्न जनजातियों के लिए जीटीए के अधीन विकास बोर्ड बनाने की मांग कर रहे थे. राज्य सरकार ने अब तक कई विकास बोर्ड बना दिये हैं. अब गोजमुमो नेता गोरखा जाति को आपस में बांटने का आरोप लगा रहे हैं. दरअसल मोरचा नेता पहाड़ का विकास नहीं, बल्कि आम लोगों को बरगलाना चाहते हैं. राज्य सरकार ने पहाड़ पर विकास के लिए चार हजार 700 करोड़ रुपये दिये हैं. उसके बाद भी जीटीए द्वारा विकास का काम नहीं हो रहा है. गोजमुमो नेता विकास के लिए पैसे नहीं देने का गलत आरोप लगा रहे हैं. श्री खवास ने साफ तौर पर कहा कि गोजमुमो के किसी भी प्रकार के बंद का विरोध उनकी पार्टी करेगी.

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