नोटबंदी पर सिलीगुड़ी नर्सिंग होम प्रबंधन द्वारा मनमानी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 Nov 2016 12:32 AM

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सिलीगुड़ी. काला धन, भ्रष्टाचार, जाली नोट व अन्य हर तरह के गोरखधंधों को पूरी तरह बंद करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पांच सौ और हजार के नोटों पर प्रतिबंध लगाने के बाद पूरे देश में कोहराम मचा हुआ है. खास हो या फिर आम हर तबके के लोग रूपये की किल्लत की दोहरी-तिहरी […]

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सिलीगुड़ी. काला धन, भ्रष्टाचार, जाली नोट व अन्य हर तरह के गोरखधंधों को पूरी तरह बंद करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पांच सौ और हजार के नोटों पर प्रतिबंध लगाने के बाद पूरे देश में कोहराम मचा हुआ है. खास हो या फिर आम हर तबके के लोग रूपये की किल्लत की दोहरी-तिहरी मार झेलने को विवश हैं.

नोटबंदी के एलान के बाद सरकार ने आम लोगों को राहत देने के लिए पांच सौ और हजार के नोटों को एक तय समय तक बैंकों, डाकघरों या फिर अन्य सरकारी इकाईयों रेलवे आरक्षण केंद्र के अलावा सरकारी अस्पतालों, नर्सिंग होम व मेडिकल स्टॉरों में भी भुगतान किये जाने का निर्देश दिया था. लेकिन कई निजी अस्पताल (नर्सिंग होम) प्रबंधन व मेडिकल स्टोर मनमानी कर रहे हैं और सरकारी मापदंडों का खुलेआम उल्लंघन कर रहे हैं.

पांच सौ और हजार के नोट नहीं ले रहे हैं. मरीजों या फिर उनके परिजनों से नर्सिंग होम के कर्मचारी, अधिकारी के अलावा मेडिकल स्टोर के मालिक भी नोट लेने से साफ इंकार कर रहे हैं. ऐसा ही एक मामला सामाजिक संस्था द्वारा संचालित सिलीगुड़ी ग्रेटर लायंस आइ अस्पताल में देखने को मिला. सेवक रोड स्थित इस आइ अस्पताल में पांच सौ का नोट न लेने पर मरीज के परिजनों व अस्पताल प्रबंधन के बीच जमकर विवाद हुआ. काफी नोंक-झोंक के बावूजद भी प्रबंधन ने पांच सौ का नोट नहीं लिया. इस विवाद को लेकर मरीज के पिता तथा चेन्नइ के वरिष्ठ पत्रकार एके प्रभात रंजन ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ इन दिनों जरूरी कार्य से सिलीगुड़ी आये हुए हैं.

उनके लड़के राज गौरव की आंखों में अचानक तकलीफ होने से इलाज के लिए सेवक रोड स्थित ग्रेटर लायंस आइ अस्पताल के आउटडोर में आये. काउंटर पर मौजूद कर्मचारी को उन्होंने पांच सौ का एक नोट देकर रूपये काटने को कहा. लेकिन कर्मचारी ने नोट लेने से इंकार कर दिया. इसे लेकर काफी विवाद हुआ. बाद में मामले को तूल पकड़ता देख प्रबंधन ने भी हस्तक्षेप किया. प्रबंधन ने भी सरकारी नियम-कानूनों का हवाला देकर नोट नहीं लिया. बाद में प्रभात रंजन खुदरा नोट देने को मजबूर हुए. वहीं, लड़के को नेत्र विशेषज्ञ को दिखाने के बाद लिखी गयी जरूरी दवाईयां भी उन्होंने अस्पताल के ही मेडिकल स्टोर से खरीदी. मेडिकल स्टोर के मालिक ने भी पांच सौ का नोट लेने से साफ इंकार कर दिया. बाद में श्री प्रभात रंजन ने खरीदी गयी दवाईयों का भुगतान कैश कार्ड से किया. इस बाबत सिलीगुड़ी ग्रेटर लायंस आइ हॉस्पिटल के प्रबंधक देवदत्त राय से संपर्क किया गया, श्री राय ने साफ कह दिया कि सरकारी नियम के तहत ही हम लोग पांच सौ और हजार के नोट नहीं ले रहे हैं. उन्होंने उल्टा सरकारी नियम-कानूनों को पढ़ने की सलाह देकर फोन काट दिया. इसी तरह का आरोप शहर के अन्य नर्सिंग होम व मेडिकल स्टोर पर भी लगाये जा रहे हैं.

शिकायत मिलने पर होगी कार्रवाई : एसडीओ ः सिलीगुड़ी एसडीओ हरिशंकर पणिक्कर का कहना है कि पांच सौ और हजार के नोटों के प्रतिबंध लगाये जाने के बाद सरकारी मापदंडों के तहत ही नोटों के लेन देन की गतिविधि पर पूरी नजर रखी जा रही है. नर्सिंग होम प्रबंधन या मेडिकल स्टोर द्वारा पांच सौ और हजार के नोटों को न लेने की शिकायत अभी तक नहीं मिली है. अगर लिखित शिकायत मिलती है तो सरकारी नियम-कानूनों के तहत ही कार्रवायी की जायेगी. वह फिर सिलीगुड़ी ग्रेटर लायंस आइ हॉस्पिटल हो या फिर अन्य कोई भी नर्सिंग होम.

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