सैकड़ों बीघे में अफीम की खेती पर चलाया ट्रैक्टर
मालदा. कालियाचक कांड के बाद बीएसएफ की मदद से गैरकानूनी ढ़ंग से किये जा रहे अफीम की खेती को नष्ट करने का अभियान आबकारी विभाग ने शुरू किया है. आबकारी विभाग की ओर से बीएसएफ के जवानों की निगरानी में ट्रैक्टर से अफीम के पौधों को नष्ट किया जा रहा है. बुधवार की सुबह से […]
बुधवार को शाहावाजपुर ग्राम पंचायत के दोमाईचक गांव में गैरकानूनी रूप से किये जा रहे अफीम के खेतों में आठ ट्रैक्टर की मदद से आबकारी विभाग ने अफीम को नष्ट करने का अभियान चलाया. इस अभियान में आबकारी विभाग के अधिकारियों के साथ नारकोटिक्स विभाग व भू-राजस्व विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे. बुधवार को करीब 250 बीघा जमीन पर गैरकानूनी रूप से किये जा रहे अफीम की खेती को नष्ट किया गया़ हांलाकि इन खेतों के मालिकों की पहचान नहीं की जा सकी है.
अभियान के समय एक भी स्थानीय लोगों को नहीं देखा गया़ गिरफ्तारी के डर से स्थानीय निवासी गांव छोड़कर भाग खड़े हुये.स्थानीय एक ग्रामवासी निजाम शेख ने बताया कि अफीम के पौधे के साथ बैगन का पौधा लगाया जा रहा है, ताकि किसी को भी अफीम के बारे में पता ना चले. अफीम के पौधे बड़े होने के बाद उसे ढ़कने के लिये खेत में मक्के का पौधा भी लगाया जाता है. गौरतलब है कि पांच जनवरी शुरू इस अभियान में अब तक 1500 बीघा जमीन में गैरकानूनी अफीम के पौधों को नष्ट किया जा चुका है.
आबकारी विभाग के अधिकारियों का कहना है पिछले वर्ष इन इलाकों में अफीम की खेती कम हुयी थी़ इस वर्ष इन इलाकों में बड़े पैमाने पर अफीम की खेती की गयी है. अधिकारियों के मुताबिक मालदा में सिर्फ नकली नोट ही नहीं,मादक पदार्थों की तस्करी के साथ भी स्थानीय तथा अन्तराष्ट्रीय ड्रग माफिया के लोग जुड़े हुए हैं. रूपये का प्रलोभन देकर ड्रग माफिया के लोग इस इलाके के गरीब लोंगो का उपयोग कर रहे हैं.सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक एक बीघा जमीन पर अफीम की खेती करने के लिये 50 हजार का खर्च आता है एवं इसमें चार से साढ़े चार किलो अफीम का उत्पादन होता है़ तस्कर इसकी कीमत लाखों में देते हैं. खेतों में काम करने वाले मजदूरों को चार से पांच सौ रूपये प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी दी जाती है. अफीम का बीज लगाने से लेकर फल निकालने तक लगातार दो महीने प्रतिदिन पांच सौ रूपये कमाने के लिए कइ लोग इस गैर कानूनी काम में लग जाते हैं. अक्टूबर महीने में बीज डाला जाता है और जनवरी माह के प्रथम सप्ताह तक पौधों में अफीम तैयार हो जाता है.
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