चाय बागान श्रमिकों में जगी बकाया मिलने की उम्मीद

Updated at : 18 Dec 2019 2:26 AM (IST)
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चाय बागान श्रमिकों में जगी बकाया मिलने की उम्मीद

नागराकाटा : चाय श्रमिकों के बकाये का भुगतान करने के लिये सुप्रीम कोर्ट ने बीते 11 दिसंबर को दिये निर्देश में सभी डिफॉल्टर चाय बागानों को अदालत द्वारा गठित एक सदस्यीय आयोग के समक्ष दो-दो करोड़ रुपये जमा करने के निर्देश दिये हैं. उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे और न्यायमूर्ति […]

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नागराकाटा : चाय श्रमिकों के बकाये का भुगतान करने के लिये सुप्रीम कोर्ट ने बीते 11 दिसंबर को दिये निर्देश में सभी डिफॉल्टर चाय बागानों को अदालत द्वारा गठित एक सदस्यीय आयोग के समक्ष दो-दो करोड़ रुपये जमा करने के निर्देश दिये हैं.

उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की खंडपीठ ने डुआर्स के कई चाय बागानों के श्रमिकों का बकाया भुगतान करवाने के लिये सेवानिवृत्त न्यायाधीश अमिताभ राय के नेतृत्व में एक सदस्यीय कमेटी का गठन किया है. इसी कमेटी के समक्ष चाय बागानों को दो-दो करोड़ की राशि जमा करनी होगी. इस नये आदेश से बंद और रुग्ण चाय बागानों के श्रमिकों के बकाये भुगतान को लेकर उम्मीद की नयी किरण देखने को मिल रही है.

गौरतलब है कि इसके पहले सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर राज्य सरकार ने श्रमिकों के बकाये का एक हिस्से का भुगतान करने के बावजूद रेड बैंक, ढेकलापाड़ा, सुरेंद्रनगर जैसे बंद और रामझोड़ा, कठालगुड़ी जैसे बीमार बागानों ने अपने श्रमिकों के बकाये का एक रुपया भी भुगतान नहीं किया है. जानकारी के अनुसार, चाय श्रमिकों के बकाये रकम को लेकर अदालत की अवमानना मामले में अपने अंतरिम आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने चार अप्रैल 2018 को असम, बंगाल, तमिलनाडू और केरल सरकारों को आदेश दिये थे.

उसके बाद आदेश का समुचित रुप से अनुपालन नहीं होने से याचिकाकर्ता पश्चिमबंग किसान खेत मजदूर समिति की ओर से मामला दर्ज किया था. उस मामले में उच्चतम अदालत ने पाया कि असम, बंगाल और तमिलनाडु की सरकारों ने बकाये का एक हिस्सा भुगतान कर दिया है. उसके बाद ही 11 दिसंबर का निर्देश सुनाया गया.
रेड बैंक चाय बागान के एक कर्मचारी सुशील सरकार ने बताया कि कागजात के चलते उनके बागान के श्रमिकों को एक रुपये भी नहीं मिले हैं. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देश से उम्मीद जगी है कि इन चाय श्रमिकों के साथ भी न्याय होगा. याचिकाकर्ता संगठन के पक्ष से अनुराधा तलवार ने बताया कि इसके पहले राज्य सरकार ने अपने 15 करोड़ रुपये के कोष से केवल अर्जित मजदूरी के बकाये का एक हिस्सा भुगतान किया है. इसके बाहर पीएफ और ग्रेच्युटी का भी भुगतान नये आदेश के अनुसार करना होगा.
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