छठ के लिए मिट्टी का चूल्हा व बांस का सूप बनानेवाले कारीगरों की हालत दयनीय

सिलीगुड़ी : लोक आस्था का महापर्व छठ में महज कुछ ही दिन शेष बचे हैं. इस पर्व की लोकप्रियता देश-विदेश में भी है. छठ महापर्व की खासियत यह है कि तमाम आधुनिक सुख-सुविधाओं के बावजूद परंपरागत तरीकों से यह मनाया जाता है. छठ पूजा में सूर्य को अर्घ्य देने के लिए बांस के सूप का […]
सिलीगुड़ी : लोक आस्था का महापर्व छठ में महज कुछ ही दिन शेष बचे हैं. इस पर्व की लोकप्रियता देश-विदेश में भी है. छठ महापर्व की खासियत यह है कि तमाम आधुनिक सुख-सुविधाओं के बावजूद परंपरागत तरीकों से यह मनाया जाता है. छठ पूजा में सूर्य को अर्घ्य देने के लिए बांस के सूप का ही प्रयोग किया जाता है, जबकि खरना का प्रसाद पारंपरिक तरीके से मिट्टी के चूल्हे पर ही बनाया जाता है. लेकिन इन सामानों को बनाने वाले कारीगरों की अवस्था दयनीय होती जा रही है. दो वक्त की रोटी के लिए इन लोगों को काफी मेहनत-मशक्कत करनी पड़ती है.
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