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संकट में हैं डुआर्स के दर्जनों चाय बागान

Updated at : 26 Jul 2019 4:03 AM (IST)
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संकट में हैं डुआर्स के दर्जनों चाय बागान

बाढ़, कटाव एवं जल जमाव से चाय बागानों का नुकसान 150 करोड़ पार करने की आशंका नागराकाटा : लगातार तीन रोज तक बारिश के चलते डुआर्स के चाय बागानों का संकट चरम पर पहुंच गया है. संबंधित प्रतिष्ठानों के सूत्र के अनुसार प्राथमिक रुप से अनुमान किया जाता है कि बाढ़ से नुकसान डेढ़ सौ […]

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बाढ़, कटाव एवं जल जमाव से चाय बागानों का नुकसान 150 करोड़ पार करने की आशंका

नागराकाटा : लगातार तीन रोज तक बारिश के चलते डुआर्स के चाय बागानों का संकट चरम पर पहुंच गया है. संबंधित प्रतिष्ठानों के सूत्र के अनुसार प्राथमिक रुप से अनुमान किया जाता है कि बाढ़ से नुकसान डेढ़ सौ करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है. काफी बड़ी मात्रा में बागान और श्रमिक मोहल्ले डूबे हुए हैं. चाय बागानों के एक संगठन टी एसोसिएशन ऑफ इंडिया की डुआर्स शाखा के सचिव राम अवतार शर्मा ने बताया कि इस बार बाढ़ ने पिछला सारा रिकार्ड तोड़ दिया है.

प्रशासन से मदद की गुहार लगायी गयी है. सामने ही पूजा बोनस का मसला है. उसके लिये बागान किस तरह रुपये जुटायेंगे यह देखने वाली बात होगी. वहीं, एक अन्य संगठन डीबीआईटीए के सचिव सुमंत गुहा ठाकुरता ने बताया कि जो नुकसान हुआ है उसे संभालना बागानों के बूते के बाहर है. उल्लेखनीय कि इस बाढ़ से मेचपाड़ा, माझेरडाबरी, नांगडाला, नागराकाटा, ग्रासमोर, दलगांव, गयेरकाटा, लक्ष्मीपाड़ा, भाटपाड़ा, तेलीपाड़ा, हल्दीपाड़ा, बीच, चुआपाड़ा, सेंट्रल डुआर्स, तोर्षा, बिन्नागुड़ी, रहीमपुर, गाठिया चाय बागान जैसे न्यूनतम 12 बागान हैं जो बुरी तरह से प्रभावित हैं.

केवल मेचपाड़ा में बीते 24 घंटे में 11 इंच वर्षा रिकार्ड की गयी है. बाढ़ के चलते काम से अनुपस्थित रहने वाले श्रमिकों की संख्या भी बढ़ रही है. मिसाल के बतौर बीच चाय बागान प्रबंधन के अनुसार वहां के 40 फीसदी श्रमिक गैरहाजिर रह रहे हैं. चूंकि उनके आवास बाढ़ में डूबे हुए हैं. हल्दीबाड़ी चाय बागान में बीते 24 घंटे में आठ इंच वर्षा रिकार्ड की गयी है.

टी रिसर्च एकेडमी (टीआरएम) के नागराकाटा के उत्तरबंग क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के सूत्र ने बताया है कि मंगलवार से लेकर बुधवार तक 9.7 इंच वर्षा रिकार्ड की गयी है. वहां के एग्रोनॉमी के विभागाध्यक्ष डॉ. सौम्य वैश्य ने बताया कि तीन दिनों में सूरज के दर्शन नहीं हुए हैं. इससे नये कुड़ी पत्तों का वृद्धि भी रुका हुआ है.

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