सिलीगुड़ी नगर निगम का भविष्य अभी भी अधर में

Updated at : 01 Jul 2014 9:35 AM (IST)
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सिलीगुड़ी नगर निगम का भविष्य अभी भी अधर में

सिलीगुड़ी: सिलीगुड़ी नगर निगम के बोर्ड को भंग हुए करीब दो महीने से भी अधिक का समय हो चुका है, लेकिन अब तक ना तो प्रशासक की नियुक्ति की गई है और ना ही नये सिरे से चुनाव कराने को लेकर पहल की गई है. परिणामस्वरूप सिलीगुड़ी नगर निगम के सामान्य काम-काज पर तो असर […]

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सिलीगुड़ी: सिलीगुड़ी नगर निगम के बोर्ड को भंग हुए करीब दो महीने से भी अधिक का समय हो चुका है, लेकिन अब तक ना तो प्रशासक की नियुक्ति की गई है और ना ही नये सिरे से चुनाव कराने को लेकर पहल की गई है. परिणामस्वरूप सिलीगुड़ी नगर निगम के सामान्य काम-काज पर तो असर पड़ ही रहा है, साथ ही नागरिक सेवा भी बदहाली की स्थिति में है.

सिलीगुड़ी नगर निगम के भविष्य को लेकर राज्य सरकार ने अब तक कोई फैसला नहीं किया है और कमिश्नर सोनम वांग्दी भुटिया को अभी राज्य सरकार के निर्देश का इंतजार है. इस महीने मेयर का चुनाव स्थगित होने के बाद सिलीगुड़ी नगर निगम के संदर्भ में एक विस्तृत रिपोर्ट सोनम वांग्दी भुटिया ने राज्य सरकार के नगरपालिका विभाग को भेज दिया था. तब सिलीगुड़ी नगर निगम में प्रशासक की नियुक्ति के कयास लगाये जा रहे थे, लेकिन अब तक प्रशासक की नियुक्ति नहीं हुई है. इस बीच, विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अगले कुछ दिनों में राज्य सरकार से सिलीगुड़ी नगर निगम को लेकर कोई न कोई निर्देश मिल जाने की संभावना है.

सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार ने सिर्फ प्रशासक की नियुक्ति नहीं कर एक प्रशासनिक बोर्ड के गठन का निर्णय लिया है. सूत्रों ने बताया कि पहले एक प्रशासक की नियुक्ति की जायेगी और फिर बोर्ड का गठन किया जायेगा. बोर्ड में विभिन्न सदस्यों को राज्य सरकार की ओर से मनोनित किया जायेगा. समझा जा रहा है कि सिर्फ प्रशासक की नियुक्ति से सिलीगुड़ी नगर निगम को सुचारू रूप से चला पाना आसाना नहीं होगा. इसलिए राज्य सरकार ने प्रशासनिक बोर्ड के गठन का निर्णय लिया है. इस बीच, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राज्य सरकार प्रशासनिक बोर्ड की नियुक्ति कर सिलीगुड़ी नगर निगम का प्रशासन तृणमूल कांग्रेस के हाथों सौंपना चाहती है. प्रशासक भले ही राज्य सरकार के अधिकारी होंगे, लेकिन प्रशासनिक बोर्ड में जन प्रतिनिधियों को मनोनीत किये जाने की तैयारी चल रही है.

समझा जाता है कि तृणमूल कांग्रेस के कई स्थानीय नेताओं को इस प्रशासनिक बोर्ड के लिए मनोनीत कर दिया जायेगा. सिलीगुड़ी नगर निगम सहित राज्य के अन्य नगरपालिकाओं के चुनाव को लेकर ऐसे ही राज्य सरकार तथा राज्य चुनाव आयोग के बीच ठनी हुई है. मामला अदालत तक जा पहुंचा है. निकट भविष्य में चुनाव होने की दूर-दूर तक संभावना नहीं है. दूसरी तरफ सिलीगुड़ी के तमाम विपक्षी दल शीघ्र से शीघ्र नगर निगम का चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं. खासकर वाम मोरचा ने शीघ्र चुनाव की मांग को लेकर आंदोलन तक शुरू कर दिया है, लेकिन चुनाव होने की संभावना फिलहाल कम ही है. दूसरी तरफ सिलीगुड़ी नगर निगम के कमिश्नर सोनम वांग्दी भुटिया ने कहा है कि राज्य सरकार से निर्देश मिलने के बाद ही आगे की रणनीति पर काम किया जायेगा. उन्होंने कहा कि प्रशासक की नियुक्ति या फिर चुनाव को लेकर राज्य सरकार से अब तक कोई निर्देश नहीं मिला है. उन्होंने अगले सप्ताह तक इस संबंध में किसी प्रकार के निर्देश मिलने की उम्मीद जाहिर की. उल्लेखनीय है कि सिलीगुड़ी नगर निगम पर पिछले साढ़े चार वर्षो से कांग्रेस का कब्जा था. कांग्रेसी मेयर गंगोत्री दत्ता ने करीब दो महीने पहले राज्य सरकार पर असहयोग का आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने तब सिलीगुड़ी नगर निगम की बोर्ड भी भंग कर दी थी. उसके बाद से लेकर अब तक कमिश्नर सोनम वांग्दी भुटिया ही सिलीगुड़ी नगर निगम को चला रहे हैं.

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