तीन बच्चों ने निगले सिक्के, दो के गले में अटका
Updated at : 19 Feb 2019 1:07 AM (IST)
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मालदा मेडिकल कॉलेज में की गयी सफल माइक्रो सर्जरी तीसरे बच्चे का सिक्का पेट में गया, सर्जरी की जरूरत नहीं मालदा : अलग-अलग जगहों से तीन बच्चे पांच-पांच रुपये का सिक्का निगलने के बाद मालदा मेडिकल पहुंचे. जहां ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक ने दो बच्चों की श्वास नली में फंसे सिक्के सूक्ष्म ऑपरेशन के जरिये […]
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मालदा मेडिकल कॉलेज में की गयी सफल माइक्रो सर्जरी
तीसरे बच्चे का सिक्का पेट में गया, सर्जरी की जरूरत नहीं
मालदा : अलग-अलग जगहों से तीन बच्चे पांच-पांच रुपये का सिक्का निगलने के बाद मालदा मेडिकल पहुंचे. जहां ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक ने दो बच्चों की श्वास नली में फंसे सिक्के सूक्ष्म ऑपरेशन के जरिये सफलतापूर्वक निकाल बाहर किये. वहीं तीसरे बच्चे का सिक्का पेट में चले जाने के कारण कुछ ज्यादा नहीं करना पड़ा. उम्मीद की जा रही है कि सिक्का मल के साथ बाहर निकल जायेगा. ऐसा नहीं होने पर अन्य चिकित्सकीय कदम उठाया जायेगा.
मेडिकल कॉलेज सूत्र के अनुसार, कालियाचक थाना अंतर्गत हजारीटोला गांव के निवासी मंटू शेख के छह वर्षीय पुत्र नवाब बहादुर शेख और इंगलिशबाजार थाना अंतर्गत बैरक कॉलोनी के निवासी रंजीत साहा की तीन साल की बेटी आयुषी साहा ने पांच-पांच रुपये के सिक्के निगल लिये थे.
इन्हें मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया, जहां चिकित्सक के परवेज ने सिक्कों को निकालने में सफलता हासिल की. इसी रोज दक्षिण दिनाजपुर जिले के उरुसपाड़ा इलाका के निवासी असीत भट्ट के चार साल के पुत्र आकाश ने भी खेल-खेल में ही पांच रुपये का सिक्का निगल लिया था. चिकित्सक के अनुसार इतनी छोटी उम्र में पेट का ऑपरेशन करना कतई उचित नहीं होगा. उम्मीद की जाती है कि यह सिक्का उसके मलद्वार से निकल आयेगा.
हजारीटोला इलाके के निवासी मन्टू शेख की पत्नी रहिमा बीबी ने बताया कि रविवार की शाम उनका बेटा नवाब बहादुर बेर तोड़ने के लिए गया था. वह मुंह में पांच रुपये का सिक्का रखकर बेर तोड़ रहा था. उसी दौरान अनजाने में उसने सिक्का निगल लिया, जो उसके गले में अटक गया. उधर मालदा शहर के बैरक कॉलोनी इलाके के निवासी रंजीत साहा पेशे से हॉकर हैं.
उन्होंने बताया कि रविवार की रात टीवी देखते समय उनकी बेटी आयुषी पांच रुपये का सिक्का लेकर खेल रही थी. खेल-खेल में ही सिक्का उसकी श्वास नली में जाकर फंस गया. इन बच्चों के अभिभावकों ने बताया कि राज्य सरकार ने जिस तरह चिकित्सकीय सुविधा की व्यवस्था की है, वह प्रशंसनीय है. पहले मालदा जिला अस्पताल में इस तरह की सुविधा नहीं थी.
मालदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर अमित दा ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के कर्तव्यरत चिकित्सक के परवेज की कोशिशों से दोनों बच्चों की श्वास नली से बिना ऑपरेशन के सिक्के निकाल लिये गये. यह काम माइक्रो सर्जरी के जरिये हुआ है. वर्तमान समय में चिकित्सा विज्ञान ने काफी तरक्की कर ली है. इसके मद्देनजर इस तरह के इलाज अब इतने जटिल नहीं रह गये हैं.
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