सिलीगुड़ी : अंग्रेजी भले कार देती है, पर हिंदी संस्कार देती है

Updated at : 23 Sep 2018 12:59 AM (IST)
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सिलीगुड़ी : अंग्रेजी भले कार देती है, पर हिंदी संस्कार देती है

रथिंद्र मंच में शुरू हुआ चार दिवसीय मैथिली नाट्य महोत्सव 20 हजार फुट पर तैनात आइटीबीपी जवान की मौत अधिक ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी होना बना कारण 15 दिन तक मौत से लड़ने के बाद फकरूल की गयी जान आज लालगोला में पूरे सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार सिलीगुड़ी : ऑक्सीजन न मिलने […]

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रथिंद्र मंच में शुरू हुआ चार दिवसीय मैथिली नाट्य महोत्सव
20 हजार फुट पर तैनात आइटीबीपी जवान की मौत
अधिक ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी होना बना कारण
15 दिन तक मौत से लड़ने के बाद फकरूल की गयी जान
आज लालगोला में पूरे सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार
सिलीगुड़ी : ऑक्सीजन न मिलने की वजह से बीस हजार फीट उपर सीमा की रक्षा में तैनात भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के एक जवान की मौत हो गयी.
शहीद का नाम सब इंस्पेक्टर फकरूल इस्लाम (50) बताया गया है. पूरे दस दिन वेंटीलेटर पर रहने के बाद बीते शुक्रवार की रात जवान ने दम तोड़ दिया. शनिवार की शाम पोस्टमार्टम के बाद शहीद का शव उसके घर के लिए रवाना हुआ. रविवार को पूरे सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार उसके घर मुर्शिदाबाद के लालगोला में कराया जायेगा.
जानकारी के अनुसार, बीते सात सितंबर की रात फकरूल इस्लाम भारत-तिब्बत सीमा पर स्थित चौकी में विश्राम कर रहे थे. अगली सुबह जब सहकर्मी उन्हें जगाने पहुंचे तो कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली. फौरन बेस कैंप को जानकारी दी गयी. जानकारी मिलते ही हैलीकॉप्टर से फकरूल को गंगतोक लाया गया.
इसके बाद फिर हेलीकॉप्टर से ही सिलीगुड़ी के निकट बागडोगरा स्थित आर्मी बेस अस्पताल पहुंचाया गया. 9 को उन्हें माटीगाड़ा के एक निजी अस्पताल में भर्ती किया गया. 10 सितंबर को उनके ब्रेन का ऑपरेशन हुआ. इसके बाद से वह वेंटीलेटर पर थे. शुक्रवार रात करीब 11 बजे उनकी मौत हो गयी. शनिवार को उनके शव का पोस्टमार्टम उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज में कराया गया. इसके बाद शहीद के शव को तिरंगे में लपेट कर गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. फिर परिजनों के साथ शव को उनके घर रवाना कर दिया गया.
फकरूल के एक रिश्तेदार वासेफ हुसैन ने बताया कि फकरूल इस्लाम साल 1989 में आइटीबीपी में नियुक्त हुए थे. पिछले कई वर्षों से वह सिक्किम में भारत-तिब्बत सीमा पर तैनात थे.
बीते 22 जून को ही छुट्टी काटकर वह फिर से सीमा पर पहुंचे. इस बार उन्हें जमीन से बीस हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित नाकू पोस्ट पर तैनात किया गया.
सात सिंतबर की रात सोने के दौरान उन्हें ऑक्सीजन मिलना कम हो गया था. ठंढ की वजह से उनके ब्रेन में सूजन हो गयी थी. अगली सुबह तक वह कोमा में चले गये थे. सात वर्ष उनकी नौकरी और बची थी. उनकी पत्नी अनिता एक गृहणी हैं. बेटा सकलेन इस्लाम (18) जेएनएम कॉलेज में प्रथम वर्ष का छात्र है, जबकि बेटी शुक्रिया इस्लाम हॉस्पिटल मैनेजमेंट में द्वितीय वर्ष की छात्रा है.
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