कोलकाता : नयी शैक्षणिक नीति से काम करने पर शिक्षाविदों ने जतायी सहमति

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 23 Sep 2018 12:58 AM

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राज्यपाल ने सात वाइस चांसलरों के साथ की थी बैठक कोलकाता : राज्य के विश्वविद्यालयों में नयी शैक्षणिक नीति से काम करने पर अधिकांश शिक्षाविदो ने सहमति जतायी है. हाल ही में विभिन्न विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर के साथ राज्यपाल की एक बैठक के बाद अब नयी नीतियों पर काम करने के लिए सहमति बन […]

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राज्यपाल ने सात वाइस चांसलरों के साथ की थी बैठक
कोलकाता : राज्य के विश्वविद्यालयों में नयी शैक्षणिक नीति से काम करने पर अधिकांश शिक्षाविदो ने सहमति जतायी है. हाल ही में विभिन्न विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर के साथ राज्यपाल की एक बैठक के बाद अब नयी नीतियों पर काम करने के लिए सहमति बन रही है. राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी के सुझावों से शैक्षणिक संस्थानों के शिक्षाविद् व विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर काफी संतुष्ट हैं. इस विषय में कुछ विद्वानों का मानना है कि सभी राज्य के विश्वविद्यालयों में समानदाखिला प्रक्रिया होनी चाहिए. राज्यपाल द्वारा स्थापना दिवस के दिन ही दीक्षांत समारोह करने के सुझाव से भी सहमत हैं शिक्षाविद.
दोनों आयोजन एक साथ होने से पहले से ही तैयारी करनी होगी. राज्यपाल ने सात वाइस चांसलरों के साथ बैठक आयोजित की थी. वहां शिक्षा मंत्री भी उपस्थित थे. दाखिला परीक्षा की प्रक्रिया में समानता को लेकर भी काफी समर्थन मिला है. इसके लिए प्रेसिडेंसी की तरह ही एक एक्सटर्नल बॉडी होनी चाहिए. अगर टेस्ट नहीं हो रहा है तो दाखिला मेरिट के आधार पर होना चाहिए. राज्यापल के इन सुझावों से सभी सहमत हैं.
अब इसको लेकर विश्वविद्यालयों के प्रधान एकसाथ बैठक कर समान नीति बना सकते हैं. शिक्षा विभाग के एक उच्च अधिकारी का कहना है कि प्रैक्टिकल-बेस्ड विषयों की बात अलग होगी. फाइन आर्ट्स व विजुअल आर्ट्स में एडमिशन टेस्ट नहीं हो सकता है.
इस मामले में जेयू के शिक्षक प्रतिम विश्वास का कहना है कि तुलनात्मक साहित्य में समान दाखिला प्रक्रिया जरूरी है, क्योंकि यह उच्च माध्यमिक के विषय की तरह ज्यादा कठिन नहीं है. प्रत्येक बोर्ड के पास अंकों के अलग-अलग मानदंड हैं. अगर बोर्ड के अंकों के आधार पर दाखिला होगा, या यही मानदंड होगा तो विश्वविद्यालयों को इसके लिए अलग से नीति बनानी होगी. अगर कोई संस्थान ऑटोनोमस है तो सरकार को यह फैसला संस्थान के ऊपर ही छोड़ना होगा.
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