सिलीगुड़ी: पुलों की सुरक्षा को लेकर हरकत में आया एसजेडीए

Updated at : 08 Sep 2018 1:50 AM (IST)
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सिलीगुड़ी: पुलों की सुरक्षा को लेकर हरकत में आया एसजेडीए

सिलीगुड़ी : फ्लाइओवर व ब्रिज के ढहने की घटनाओं से सिलीगुड़ी जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण (एसजेडीए) अब हरकत में आ गया है. वह अपने अधीन फ्लाइओवर व ब्रिजों के स्टेटस रिपोर्ट की जांच पीडब्ल्यूडी से करायेगा. इसके साथ ही कुछ ब्रिजों के रखरखाव की जिम्मेदारी सहमति से पीडब्ल्यूडी को सौंपा जायेगी. बाकी का रखरखाव पीडब्ल्यूडी की […]

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सिलीगुड़ी : फ्लाइओवर व ब्रिज के ढहने की घटनाओं से सिलीगुड़ी जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण (एसजेडीए) अब हरकत में आ गया है. वह अपने अधीन फ्लाइओवर व ब्रिजों के स्टेटस रिपोर्ट की जांच पीडब्ल्यूडी से करायेगा. इसके साथ ही कुछ ब्रिजों के रखरखाव की जिम्मेदारी सहमति से पीडब्ल्यूडी को सौंपा जायेगी.
बाकी का रखरखाव पीडब्ल्यूडी की निगरानी में होगा. इसके साथ ही सिलीगुड़ी नगर निगम इलाके में 15 करोड़ की परियोजनाओं और 10 करोड़ रुपये की अन्य परियोजनाओं पर एसजेडीए के 134वें बोर्ड बैठक में सहमति बनी है. इसमें सिलीगुड़ी के हॉकर्स कॉर्नर में एसजेडीए की जमीन पर एक अत्याधुनिक पार्किंग, एक लॉज सहित मार्केट कॉम्प्लेक्स बनाने का निर्णय एसजेडीए ने लिया है.
बोर्ड बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए एसजेडीए के चेयरमैन सौरभ चक्रवर्ती ने बताया कि फ्लाईओवर आदि मिलाकर कुल 12 ब्रिज एसजेडीए के अधीन है. ब्रिज की मौजूदा स्थिति जानने के लिए दो महीने पहले एक कमिटी गठित की गयी थी. कमिटी ने ब्रिजों की स्टेटस रिपोर्ट जमा कराया है. उस रिपोर्ट की राज्य पीडब्ल्यूडी द्वारा दोबारा जांच करायी जायेगी.
एसजेडीए से अधिक उन्नत व बढ़िया मशीनरी व इंजीनियर आदि की वजह से कुछ ब्रिजों के रखरखाव की जिम्मेदारी लेने का आग्रह पीडब्ल्यूडी से किया जायेगा. उन्होंने आगे कहा कि कलवर्ट व छोटे-बड़े मिलाकर सिलीगुड़ी नगर निगम के अधीन भी 50 से अधिक ब्रिज हैं. इन ब्रिजों का भी रखरखाव ठीक तरह से नहीं हो पा रहा है. जिसकी वजह से कभी भी बड़ी दुर्घटना घट सकती है. ब्रिजों की स्टेटस रिपोर्ट व उसकी निगरानी करने का आवेदन निगम से भी किया जायेगा.
साथ ही हर संभव सहायता भी एसजेडीए करेगा. श्री चक्रवर्ती ने बताया कि कई संस्थाओं ने एसजेडीए की जमीन लीज पर ले रखी है. लेकिन जमीन लिये 15 से 20 वर्ष गुजरने के बाद भी कोई काम शुरू नहीं किया है. एसजेडीए राज्य सरकार की शहर विकास मंत्रालय को भी इससे अवगत करा सलाह मांगा है. साथ ही उन कंपनियों से भी जवाब मांगेगी. यदि कंपनी उस जमीन पर काम नहीं करना चाहती है तो एसजेडीए को जमीन वापस कर सकती है. कानूनी प्रक्रिया के तहत जमीन लिया जायेगा. उन्होंने बताया कि एसजेडीए के पास वर्तमान में कुल 50 एकड़ से अधिक जमीन है.
उन जमीनों को इ-ऑक्सन के माध्यम से उद्योगपतियों को मुहैया कराया जायेगा. एसजेडीए इलाके में उद्योग के लिए जमीन होने की जानकारी अंतराष्ट्रीय बाजार में भी उपलब्ध करायी जायेगी. चुकी कई विदेशी पूंजीपतियों ने सिलीगुड़ी में निवेश करने की इच्छा बिजनेस समिट में जाहिर किया है. इसके अतिरिक्त एसजेडीए ने शहर के महाबीर स्थान इलाके में अपनी जमीन को दखलमुक्त करा लिया है. हॉकर्स कॉर्नर से सटे इलाके में एसजेडीए की 6 कट्ठे की तीन प्लाट है.
एक प्लाट में शहर के एक पूंजीपति ने होटल बनाने की इच्छा जाहिर की है. जबकि एक प्लाट में एसजेडीए अत्याधुनिक पार्किंग व दूसरे पर लॉज सहित एक अत्याधुनिक मार्केट कॉमप्लेक्स बनाने की योजना है. सौरभ चक्रवर्ती ने बताय कि सिलीगुड़ी नगर निगम के पार्षदों ने अपने इलाके की पेयजल, जल निकासी, सड़क आदि से जुड़े कुछ प्रस्ताव एसजेडीए को दिया था. एसजेडीए ने उन प्रस्तावों को स्वीकार किया है.
सिलीगुड़ी नगर निगम इलाके में विकास कार्य के लिए 15 करोड़ रुपये की परियोजनाएं ली गयी हैं.
इसके साथ ही एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीत कर जलपाईगुड़ी के साथ देश का नाम बढ़ाने वाली स्वपना वर्मन के इलाके में एक बस पड़ाव बनाया जायेगा. इसका नाम कृति रखने का निर्णय लिया गया है. इसके साथ ही बागडोगरा से पहाड़पुर तक बस पड़ाव (शेड) व राष्ट्रीय राजमार्ग व राज्य मार्ग के किनारे शौचालय व एक चाय-पान की दुकान बनाने का निर्णय एसजेडीए ने लिया है. इसके अतिरिक्त भी 10 करोड़ की परियोजनाओं पर बैठक में सहमति बनी है.
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