सिविल सर्विस में नहीं जाना चाहते बंगाल के युवा
Updated at : 13 Aug 2018 1:43 AM (IST)
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जलपाईगुड़ी : पश्चिम बंगाल में गिने-चुने लड़के-लड़कियां आईएएस और आइपीएस की परीक्षा पास करके इन सेवाओं में नौकरी पा रहे हैं. नवान्न या नया सचिवालय में जाने पर खुद पर शर्म महसूस होती है, क्योंकि हमारे यहां जो आइएएस या आइपीएस हैं, उनमें से आधे दूसरे राज्यों से आये हुये हैं. विभिन्न स्कूल, कॉलेज या […]
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जलपाईगुड़ी : पश्चिम बंगाल में गिने-चुने लड़के-लड़कियां आईएएस और आइपीएस की परीक्षा पास करके इन सेवाओं में नौकरी पा रहे हैं. नवान्न या नया सचिवालय में जाने पर खुद पर शर्म महसूस होती है, क्योंकि हमारे यहां जो आइएएस या आइपीएस हैं, उनमें से आधे दूसरे राज्यों से आये हुये हैं.
विभिन्न स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में जाने पर छात्र-छात्राओं से प्रश्न करने पर अधिकतर इंजीनियर, डॉक्टर या शिक्षक होने की इच्छा जाहिर करते हैं. उनमें सिविल सेवाओं की ओर झुकाव नहीं दिखता. रविवार को जलपाईगुड़ी के आनंदचंद्र बीएड कॉलेज के डायमंड जुबली समापन कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में इस बात को उत्तर बंगाल विभाग मंत्री रवींद्रनाथ घोष ने रेखांकित किया.
मंत्री ने कहा कि इस राज्य के बहुत से छात्र-छात्रायें दूसरे राज्यों में पढ़ने जाते हैं. लेकिन जब वे पास करके निकलते हैं तो पता चलता है कि बहुत से छात्र-छात्राओं के सर्टिफिकेट फर्जी हैं. उन्होंने कहा कि बीते दो सालों से माध्यमिक और उच्च माध्यमिक में उत्तर बंगाल के छात्र-छात्रायें टाप कर रहे हैं.
लेकिन पता नहीं क्यों, यहां के मेधावी छात्र-छात्रायें अभी भी नरेंद्रपुर, प्रेसिडेंसी और यादवपुर की ओर नहीं जा पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि उत्तर बंगाल के स्कूल-कॉलेजों में बुनियादी ढांचा बेहतर करने के लिये करोड़ों रुपये दिये जा रहे हैं. क्लास रूम-प्रयोगशालायें सबकुछ बनवाया जा रहा है.
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