पूर्व भारतीय फुटबॉलर ने दिया फुटबॉल एकेडमी का प्रस्ताव

Updated at : 30 Jun 2018 6:16 AM (IST)
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पूर्व भारतीय फुटबॉलर ने दिया फुटबॉल एकेडमी का प्रस्ताव

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र देकर किया अनुरोध कालियागंज : विश्व फीफा फुटबॉल कप के खुमार के बीच भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व खिलाड़ी शंकर नंदी ने राज्य सरकार से कालियागंज में फुटबॉल एकेडमी की स्थापना का अनुरोध किया है. उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र दिया है जिसमें कहा गया है […]

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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र देकर किया अनुरोध

कालियागंज : विश्व फीफा फुटबॉल कप के खुमार के बीच भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व खिलाड़ी शंकर नंदी ने राज्य सरकार से कालियागंज में फुटबॉल एकेडमी की स्थापना का अनुरोध किया है. उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र दिया है जिसमें कहा गया है कि अगर फुटबॉल एकेडमी का गठन किया जाता है तो कालियागंज के अलावा पूरे उत्तर दिनाजपुर जिले से प्रतिभावान फुटबॉलरों को राष्ट्रीय क्षितिज पर लाया जा सकता है.

इस संबंध में उत्तर बंगाल क्रीड़ा संघ के नवनिर्वाचित सदस्य असीम घोष ने फुटबॉल एकेडमी के प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा है कि शंकर फुटबॉल के वरिष्ठ खिलाड़ी शंकर नंदी का प्रस्ताव न्यायसंगत है.

उन्होंने बताया कि जुलाई के शुरुआत में सिलीगुड़ी की उत्तरकन्या में संघ की एक बैठक है. उसमें इस प्रस्ताव पर भी विचार किया जायेगा. उसमें फुटबॉल एकेडमी के गठन पर चर्चा की संभावना है.

शंकर नंदी ने इस संबंध में कहा कि फीफा विश्व कप चैम्पियनशिप में भले ही भारत को खेलने का अवसर नहीं मिला लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि बंगाल में यह खेल सर्वाधिक रुप से जनप्रिय रहा है. ऐसा कोई बंगालवासी नहीं मिलेगा जो फुटबॉल से कम से कम भावनात्मक लगाव नहीं रखता हो. उल्लेखनीय है कि शंकर नंदी कालियागंज ब्लॉक के डालिमगांव के निवासी हैं. उन्होंने बताया कि इसी डालिमगांव से जिले के गर्व वीरेन गुहा को कोलकाता की आर्यन क्लब के पक्ष से खेलने का मौका मिला था.

उसी समय डालिमगांव का नाम फुटबॉल के जगत में सामने आया. उनके बाद शंकर नंदी ने फुटबॉल को एक नया मुकाम दिया. 48 साल के शंकर नंदी का बचपन से फुटबॉल से गहरा लगाव था. सपना था एक विख्यात फुटबॉलर बनने का जो उनकी कड़ी मेहनत व लगन की बदौलत से साकार हुआ.

शंकर नंदी का कहना है कि फुटबॉलर बनने के लिये खिलाड़ी का फुटबॉल से दिलोजान से लगाव होना जरूरी है. अपने घर के सामने वाले मैदान में नियमित अभ्यास करने के बाद उन्होंने जिला स्तर पर सफलता हासिल करते हुए कोलकाता तक जा पहुंचे. वहीं से ही उन्हें राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शामिल होने का अवसर मिला. राष्ट्रीय टीम में चुने जाने के बाद उन्हें केरल में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए एशियाई युवा विश्व कप फुटबॉल चैम्पियनशिप में खेलने का अवसर मिला.

विभिन्न प्रतियोगिताओं में उनके उत्कृष्ट खेल प्रदर्शन को देखते हुए तत्कालीन केंद्र सरकार में खेल राज्य मंत्री ममता बनर्जी ने 1992 में शंकर नंदी को उत्साहित करते हुए कहा कि यदि उन्हें किसी नौकरी के लिये कॉल लेटर मिलता है तो वह उनसे संपर्क करें. वे उनकी हरसंभव मदद करेंगी. लेकिन अफसोस है कि आज तक उन्हें एक भी सरकारी नौकरी के लिये कॉल नहीं मिला. लेकिन इसके बावजूद इन्होंने फुटबॉल से अपना नाता नहीं तोड़ा.

अब वे अपने सपने को नयी प्रतिभाओं के जरिये विकसित होते देखना चाहते हैं. उन्होंने बताया कि क्षेत्र में बहुत से प्रतिभावान खिलाड़ी हैं जिन्हें अगर व्यवस्थित तरीके से प्रशिक्षण दिया जाये तो वे आगे चलकर प्रतिभाशाली फुटबॉलर बन सकते हैं.

ऐसे प्रतिभावान खिलाड़ियों के लिये शंकर नंदी कोच का काम कर रहे हैं. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को वे एक श्रेष्ठ मुख्यमंत्री मानते हैं. इसीलिये उनकी इच्छा है कि कालियागंज में एक फुटबॉल एकेडमी की स्थापना की जाये. इससे उत्तर दिनाजपुर जिले से कुशल एवं राज्य व राष्ट्रीय स्तर के फुटबॉलर तैयार किये जा सकते हैं.

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