मानव तस्करों के मकड़जाल में डुवार्स, दूसरे राज्यों में काम के नाम पर ले गये तस्कर

Published at :20 Jun 2018 4:15 AM (IST)
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मानव तस्करों के मकड़जाल में डुवार्स, दूसरे राज्यों में काम के नाम पर ले गये तस्कर

कालचीनी : डुवार्स के चाय बागान इलाके को मानव तस्करी का स्वर्ग माना जाता है. चाय बगान के श्रमिक काफी गरीब होते हैं. इसी का फायदा मानव तस्कर उठा रहे हैं. चाय बागान इलाके में मानव तस्करों के एजेंट घूमते हैं. मौका लगते ही यह लोग काम दिलाने के नाम पर यहां के लोगों तथा […]

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कालचीनी : डुवार्स के चाय बागान इलाके को मानव तस्करी का स्वर्ग माना जाता है. चाय बगान के श्रमिक काफी गरीब होते हैं. इसी का फायदा मानव तस्कर उठा रहे हैं. चाय बागान इलाके में मानव तस्करों के एजेंट घूमते हैं. मौका लगते ही यह लोग काम दिलाने के नाम पर यहां के लोगों तथा महिलाओं को दूसरे राज्यों में ले जाते हैं. उसके बाद उनका कोई अता-पता नहीं चलता.
भातखावा चाय बागान के कई श्रमिक लापता
परिवार वालों के साथ कोई संपर्क नहीं सभी चिंतित
कालचीनी थाना से तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग
डुवार्स के विभिन्न चाय बगानों में दौरा करने के बाद यह साफ हो जाएगा कि किसी न किसी इलाके से कोई न कोई व्यक्ति जरूर लापता है. परिवार के लोग उनके आने की राह तक रहे हैं. कई वर्षों से कोई खोज खबर नहीं मिलने के कारण परिवार के लोग परेशान भी रहते हैं. एक ओर भारी गरीबी ऊपर से परिवार के किसी सदस्य का लापता हो जाना इनके लिए चिंता का सबब बना हुआ है. कुछ इसी तरह की स्थिति भातखावा चाय बागान की है. कालचीनी ब्लॉक के भातखावा चाय बागान से भी कई लोग लापता हैं. यह लोग काम की तलाश में दूसरे राज्य गए हुए थे. उसके बाद से लेकर अब तक नहीं लौटे हैं. ताजा मामला चाय बागान के एक अस्थाई श्रमिक अल्वेस मुंडा की है. 3 साल पहले वह काम के लिए कर्नाटक गया था . उसके बाद से वह नहीं लौटा है. परिवार वालों का कहना है कि सविता महली नामक एक एजेंट के माध्यम से वह काम की तलाश में कर्नाटक गया था. कुछ दिनों तक उसका परिवार के साथ संपर्क रहा. उसके बाद संपर्क खत्म हो गया है. उसके भाई भावी मुंडा ने बताया है कि भाई के अचानक लापता हो जाने से वह लोग चिंतित हैं. इसी तरह की स्थिति एक अन्य चाय श्रमिक पवन मुंडा की है. वह भी काम करने के लिए कश्मीर गया था. उसके बाद घर नहीं लौटा है. उसके परिवार के लोग भी परेशान हैं. कालचीनी थाने में इस प्रकार से लापता होने के कई मामले दर्ज कराए गए हैं. लेकिन पुलिस किसी भी मामले में ठोस कार्रवाई नहीं कर पाई है. स्थानीय एक समाजसेवी श्रवण नागवंशी ने बताया है कि इस चाय बागान के श्रमिक दैनिक 150 रूपये की मजदूरी में काम करते हैं. इतनी कम मजदूरी में परिवार चलाना बेहद मुश्किल है. इसीलिए काफी लोग दूसरे राज्यों में जाकर अधिक पैसे कमाना चाहते हैं. इसी का फायदा मानव तस्कर उठा रहे हैं . काम के नाम पर अधिक पैसे दिलाने का लोभ देकर एजेंट उनको दूसरे राज्यों में ले जाते हैं. जहां उनका शोषण होता है. महिलाओं की बिक्री रेड लाइट एरिया में कर दी जाती है. जो लोग यहां से बाहर काम करने गए उनकी क्या स्थिति है और वह जिंदा है भी कि नहीं, इसकी कोई जानकारी किसी को नहीं है. उन्होंने कालचीनी थाना से तत्काल इस मामले में हस्तक्षेप कर लापता हुए लोगों को ढूंढ निकालने की मांग की है.
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