दार्जिलिंग :मन घीसिंग ने जीटीए पर लगाया भ्रष्टाचार का आरोप
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :06 Apr 2018 9:15 AM (IST)
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दार्जिलिंग : जीटीए का प्रशासन निरपेक्ष यानी न्यूट्रल लोगों के हाथों में सौंपा जाये. गुरुवार को यह मंतव्य गोरामुमो अध्यक्ष मन घीसिंग ने पार्टी की स्थापना की 38 वीं वर्षगांठ के अवसर पर किया. वे गोरामुमो की दार्जिलिंग ब्रांच कमेटी द्वारा स्थापना दिवस के अवसर पर लुंगथाम के सार्वजनिक भवन में आयोजित कार्यक्रम में बोल […]
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दार्जिलिंग : जीटीए का प्रशासन निरपेक्ष यानी न्यूट्रल लोगों के हाथों में सौंपा जाये. गुरुवार को यह मंतव्य गोरामुमो अध्यक्ष मन घीसिंग ने पार्टी की स्थापना की 38 वीं वर्षगांठ के अवसर पर किया. वे गोरामुमो की दार्जिलिंग ब्रांच कमेटी द्वारा स्थापना दिवस के अवसर पर लुंगथाम के सार्वजनिक भवन में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे.
उल्लेखनीय है कि आज का दिन गोरखालैंड नामकरण दिवस के रुप में मनाया जा रहा है. समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में गोरामुमो अध्यक्ष की विशेष रूप से उपस्थिति रही. समारोह में मन घीसिंग के अलावा गोरामुमो के केन्द्रीय नेता और पूर्व विधायक एन. वी. छेत्री, केन्द्रीय प्रवक्ता नीरज लामा, वाई लामा, सन्दीप छेत्री, अजय एडवर्ड, किशोर गुरुंग, चूड़ामणि खड़का, गोरानामो की केन्द्रीय उपाध्यक्ष मणिकला तामांग, एचपीडब्लूयू के केन्द्रीय महासचिव जे. वी. तामांग आदि उपस्थित थे. समारोह के शुरु में मन घीसिंग सहित अन्य नेताओं ने पार्टी के संस्थापक सुभाष घीसिंग की तस्वीर पर दीप प्रज्ज्वलन के बाद खदा अर्पण किया गया.
समारोह को सम्बोधित करते हुए अध्यक्ष मन घीसिंग ने बताया कि 5 अप्रैल 1980 को उनके पिता सुभाष घीसिंग ने गोर्खा राष्ट्रीय मुक्ति मोर्चा का गठन कर अलग राज्य गोरखालैंड के लिये आन्दोलन किया. इस दौरान करीब 12 सौ समर्थक शहीद हो गये. चूंकि पार्टी के संस्थापक सुभाष घीसिंग हैं इसलिये दल के स्थापना दिवस को गोरखालैंड नामकरण दिवस के रूप में मनाने की परंपरा रही है. आंदोलन के बाद त्रिपक्षीय समझौते के तहत दागोपाप का गठन किया गया. लेकिन उस समय कुछ लोगों ने सुभाष घीसिंग पर आरोप लगाया था कि उन्हें प्रशासन चलाना नहीं आता है. इस आरोप को सुभाष घीसिंग ने चुनौती के रुप में स्वीकार किया था. गोरामुमो के नेतृत्व में जब छठी अनुसूची के तहत स्वायत्तशासन के लिये जीएचसी (गोरखा हिल काउंसिल) के गठन के लिये 6 दिसम्बर 2005 में त्रिपक्षीय समझौता हुआ तो विपक्षी नेताओं ने जनता को गुमराह करते हुए गोरखालैंड की बात करने लगे.
मन घीसिंग ने आरोप लगाया कि उन विपक्षी नेताओं ने पहाड़ की जनता से छल किया. उन्होंने गोरामुमो के गोरखालैंड के मुद्दे को हाइजैक कर लिया. आज पहाड़ के अपने आप को शक्तिशाली दल कहने वाले राजनैतिक दल जनजाति की बात कह रहे हैं. लेकिन 2005 में जब इन दलों का अस्तित्व तक नहीं था उस समय गोरामुमो ने इसको लेकर केंद्र व राज्य सरकार से पत्राचार किये थे. मन घीसिंग ने आरोप लगाया कि जीटीए-टू में व्यापक भ्रष्टाचार है. जनता के पैसे से संगठन का काम हो रहा है.
इसीलिये उनका मानना है कि जीटीए का प्रशासन निरपेक्ष लोगों को सौंपा जाये. इसके लिये वे पत्राचार करेंगे. वहीं, गोरामुमो प्रवक्ता नीरज जिम्बा ने कहा कि जीटीए की चाबी गोरामुमो के पास है. इसलिये पद पर बैठकर अनर्गल बात करना नेता लोग छोड़ें. दार्जिलिंग के अलावा कर्सियांग,कालिम्पोंग आदि स्थानो पर भी गोरामुमो समर्थकों ने पार्टी का स्थापना दिवस मनाया
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