गोरखालैंड से कम कुछ भी मंजूर नहीं : विमल

Published at :26 Jan 2018 5:30 AM (IST)
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गोरखालैंड से कम कुछ भी मंजूर   नहीं : विमल

दार्जिलिंग : भाषायी अल्पसंख्यक हो या छठी अनुसूची के आधार पर किसी तरह के स्वायत्त शासन की व्यवस्था को हम हरगिज स्वीकार नहीं करने वाले हैं. मीडिया के एक वर्ग में छपी इस खबर का गोजमुमो के एक धड़े के प्रमुख और पूर्व जीटीए चीफ विमल गुरुंग ने प्रेस बयान जारी कर बताया है कि […]

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दार्जिलिंग : भाषायी अल्पसंख्यक हो या छठी अनुसूची के आधार पर किसी तरह के स्वायत्त शासन की व्यवस्था को हम हरगिज स्वीकार नहीं करने वाले हैं. मीडिया के एक वर्ग में छपी इस खबर का गोजमुमो के एक धड़े के प्रमुख और पूर्व जीटीए चीफ विमल गुरुंग ने प्रेस बयान जारी कर बताया है कि संविधान की धारा 244 अंतर्गत स्वायत्तता दिये जाने का उल्लेख समाचारपत्रों में आया है.

गोरखालैंड से कम…
विमल गुरुंग ने कहा कि उन पर कुछ लोगों ने गोरखालैंड की मांग से पीछे हटने का आरोप लगाया था. लेकिन इस तरह की किसी भी भ्रामक खबर पर लोगों को ध्यान नहीं देना चाहिये. यह मीडिया के एक वर्ग द्वारा प्रचारित झूठ के सिवा और कुछ नहीं है. वे गोरखालैंड के मसले को लेकर कोई समझौता नहीं करेंगे. उन्होंने किसी तरह की अंतरिम व्यवस्था या स्वायत्त शासन की मांग नहीं की है.
विमल गुरुंग ने कहा है कि 1986 में जीएनएलएफ ने गोरखालैंड राज्य की मांग पर समझौता करते हुए डीजीएचसी पर रजामंदी दी थी. उस दौरान गोरखालैंड की मांग छोड़ी गयी थी. हालांकि जब उन्होंने बंगाल सरकार के साथ गोरखा टेरिटोरियल एडमिनिश्ट्रेशन (जीटीए) को लेकर समझौता किया था. लेकिन उन्होंने उस समय भी गोरखालैंड राज्य की मांग को नहीं छोड़ा था. हालांकि दोनों ही व्यवस्था जनता के सपने को साकार करने में विफल रहीं हैं. गोरखा समुदाय की सैकड़ों वर्ष पुरानी मांग गोरखालैंड राज्य है. वही, एकमात्र समाधान है. उन्होंने कहा कि सुभाष घीसिंग के जमाने से ही दार्जिलिंग और डुवार्स-तराई क्षेत्र के लोगों को अच्छी तरह मालूम है कि गोरखालैंड के विकल्प के रुप में छठी अनुसूची के तहत स्वायत्तशासन का एक एजेंडा है. एक बार फिर बंगाल सरकार के इशारे पर पद व धन का लालच देकर इस एजेंडे को आगे बढ़ाने की साजिश रची जा रही है. मीडिया का एक वर्ग भी इस झूठ का प्रचार करने में लगा हुआ है. इस संबंध में बेबुनियाद खबरें छापी जा रही हैं. हम लोग किसी भी शर्त पर समझौता नहीं करेंगे बल्कि हम अपने महान देश के संविधान के अनुसार ही गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को जारी रखेंगे. अपने बयान में विमल गुरुंग ने मीडिया को भी खबरों की पुष्टि कर उन्हें छापने की सलाह दी है ताकि लोगों में भ्रम की स्थिति नहीं हो. उन्होंने जोर देकर कहा कि हम लोग जल्द ही गोरखालैंड का लक्ष्य हासिल करेंगे.
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