सरकारी शिक्षकों के लिए नया अाचरण कानून

Published at :05 Sep 2017 8:33 AM (IST)
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सरकारी शिक्षकों के लिए नया अाचरण कानून

सिलीगुड़ी: राज्य सरकार शिक्षकों के लिए एक नया आचरण कानून पारित करने जा रही है. यह कानून राज्य सरकार द्वारा संचालित प्राथमिक व उच्च विद्यालयों के शिक्षकों पर लागू होगा. आचरण कानून का उल्लघंन करने वाले शिक्षक व शिक्षिकाओं के खिलाफ कार्यवायी का भी प्रावधान है. इस कदम के लिए पश्चिम बंगाल प्राइवेट ट्यूटर्स वेलफेयर […]

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सिलीगुड़ी: राज्य सरकार शिक्षकों के लिए एक नया आचरण कानून पारित करने जा रही है. यह कानून राज्य सरकार द्वारा संचालित प्राथमिक व उच्च विद्यालयों के शिक्षकों पर लागू होगा. आचरण कानून का उल्लघंन करने वाले शिक्षक व शिक्षिकाओं के खिलाफ कार्यवायी का भी प्रावधान है. इस कदम के लिए पश्चिम बंगाल प्राइवेट ट्यूटर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने राज्य सरकार का धन्यवाद ज्ञापन किया है.
राज्य की पिछली वामो सरकार ने भी सरकारी शिक्षकों के लिए कानून बनाया था. लेकिन इसको कार्यकारी कर पाना संभव नहीं हो सका. सरकारी शिक्षकों को ट्यूशन पढ़ाने की मनाही है. फिर भी पूरे राज्य में सबसे अधिक सरकारी शिक्षक ही ट्यूशन पढ़ाते हैं. विद्यार्थी भी विद्यालय के शिक्षक से ट्यूशन पढ़ने को पहली प्राथमिकता देते हैं. इसका असर राज्य के शिक्षित युआवों पर पड़ता है. बेरोजगारी की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है. सरकारी शिक्षकों के ट्यूशन न पढ़ाने से शिक्षित युवाओं को उपार्जन का अवसर मिलेगा. इसी ध्येय के साथ पश्चिम बंगाल प्राइवेट ट्यूटर्स वेलफेयर एसोसिएशन पिछले सात वर्षों से लड़ाई लड़ रही है. राज्य की ममता सरकार शिक्षकों के लिए एक आचरण कानून लाने जा रही है. इस कानून में राज्य की बढ़ती बेरोजगारी की समस्या को ध्यान में रखा गया है. सोमवार सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब में पत्रकारों को संबोधित करते हुए संगठन के राज्य अध्यक्ष सुजय कुमार वर्मन ने सरकार को ध्न्यवाद ज्ञापन किया है.

पत्रकारों को संबोधित करते हुए श्री वर्मन ने कहा कि प्राइवेट ट्यूशन से सरकारी शिक्षकों को दूर रखने के लिए राज्य के शिक्षामंत्री से अपील की थी. सरकार के इस कदम का संगठन स्वागत करती है. हमें आशा है कि यह कानून पूरे राज्य में कारगर सिद्ध होगा. यह कानून जितना कार्यकारी होगा उतना ही बेरोजगारी की समस्या भी कम होगी. आज के इस पत्रकार सम्मेलन में संगठन के सिलीगुड़ी शाखा अध्यक्ष जयदीप मुखर्जी, सचिव विवेकानंद साहा व राज्य सचिव शेखर पात्र सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे.
कानून में क्या है नया
शिक्षकों के नये आचरण नियम का उल्लघंन करने वालों के खिलाफ कार्यवायी का भी प्रावधान रखा गया है. पहले नियुक्ति के एक वर्ष बाद शिक्षक को स्थायी किया जाता था, लेकिन अब नियुक्ति के दो वर्ष बाद स्थायीकरण किया जायेगा. नये नियमावली के अनुसार नियुक्त शिक्षकों को पुलिस वेरीफिकेशन रिपोर्ट जमा कराना होगा. शिक्षको का पिछला कोई अपराधिक रिकॉर्ड है या नहीं, देखने के बाद ही स्थायीकरण की प्रक्रिया शुरू की जायेगी. यह रिपोर्ट कमिश्नर या जिला अधीक्षक द्वारा वेरीफाइड होना आवश्यक है. कोई भी शिक्षक या शिक्षिका विद्यालय परिसर में धूम्रपान, गुटखा, खैनी, पान व अन्य मादक पदार्थों का सेवन नहीं कर सकते हैं. सरकारी शिक्षक किसी भी प्रकार का व्यवसाय नहीं कर सकते. सरकारी शिक्षक किसी भी प्रकार का नोटबुक, गाइड या उत्तर पत्र नहीं लिख सकते. कोई भी सरकारी शिक्षक प्राइवेट ट्यूशन नहीं पढ़ा सकता है. किसी भी चुनाव में हिस्सा लेने के पहले संबंधित विभाग की अनुमति आवश्यक है. शिक्षक पद पर नियुक्त होने के बाद संपत्ति का पूरा ब्यौरा विभाग को सौंपना होगा. सरकारी विद्यालयों को भी अभिभावक के साथ बैठक करनी होगी. जिसमें सभी शिक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य होगी. उक्त बैठक में विद्यालय संचालन, पढ़ाई-लिखाई व अन्य विषयों पर चर्चा की जायेगी. सभी शिक्षकों को प्रार्थना सभा में उपस्थित होना अनिवार्य है. शिक्षार्थियों के साथ शिक्षकों का व्यवहार सौहार्दपूर्ण होना चाहिए. शिक्षार्थियों को शारीरिक व मानसिक सजा देना अनुचित माना गया है. विद्यालय में भाइचारे का परिवेश बनाना शिक्षकों की नैतिक जिम्मेदारी है. परीक्षा के दौरान शिक्षकों को गार्ड का काम करना होगा.
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