संकट: गोरखालैंड आंदोलन से सरकार की बढ़ी परेशानी, पहाड़ पर करोड़ों रुपये का बिजली बिल बकाया

जलपाईगुड़. पहाड़ पर मोरचा के लगातार आंदोलन के चलते बिजली सेवा तो स्वाभाविक है,लेकिन सरकारी राजस्व को नुकसान हो रहा है. बिजली बिल जमा नहीं हो रहा है. पहाड़ में जारी बंद, आंदोलन के चलते जलढाका, सिद्राबंग जैसे जलविद्युत परियोजना बंद है. यह बातें राज्य विद्युत पर्षद इंप्लाइज एंड वर्कर्स यूनियन के राज्य महासचिव बलाई […]
जलपाईगुड़. पहाड़ पर मोरचा के लगातार आंदोलन के चलते बिजली सेवा तो स्वाभाविक है,लेकिन सरकारी राजस्व को नुकसान हो रहा है. बिजली बिल जमा नहीं हो रहा है. पहाड़ में जारी बंद, आंदोलन के चलते जलढाका, सिद्राबंग जैसे जलविद्युत परियोजना बंद है. यह बातें राज्य विद्युत पर्षद इंप्लाइज एंड वर्कर्स यूनियन के राज्य महासचिव बलाई दास ने कही. वह सोमवार को जलपाईगुड़ी के राजबाड़ी पाड़ा में बिजली वितरण कंपनी के आंचलिक कार्यालाय के कैंपस में आयोजित संगठन के जिला कन्वेंशन को संबोधित कर रहे थे.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बलाई दास ने कहा कि पहाड़ में लगातार बंद के बावजूद बिजली कर्मचारियों ने विभिन्न जगहों में बिजली सेवाएं स्वाभाविक रखी है. लेकिन छोटे छोटे जलविद्युत परियोजनाओं में तोड़फोड़, काम करने से कर्मचारियों को रोकने के कारण बिजली उत्पादन प्रभावित हो रहा है. उन्होंने जल्द इस मामले में सरकारी हस्तक्षेप की मांग की है. उन्होंने बंद की राजनीति को खत्म कर परिस्थिति स्वाभाविक करने की मांग सरकार से की हैं.
श्री दास ने आगे कहा कि जून महीने से अगस्त महीने तक पहाड़ के दार्जिलिंग व कालिंपोंग जिले में करोड़ो रुपये का बिजली बिल बकाया है. जिससे सकरारी राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है.
कन्वेंशन को संबोधित करते हुए यूनियन के जिला सचिव प्रदीप कार्की ने बताया कि वर्तमान राज्य सरकार के शासनकाल में लोडशेडिंग करीब-करीब नहीं के बराबर है. बिजली सेवा पहले से काफी बेहतर हुई है. बिजली विभाग के कर्मचारियों को भत्ता, पीएफ, ईएसआइ की सुविधा मिलने लगी है. कार्यक्रम में संगठन के नेता दिलीप बोस, अंजन मजूमदार, शुभेंदु बोस, सपन सरकार, संजीव चटर्जी, अब्दुर रज्जाक उपस्थित थे.
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