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बीरभूम धमाके की जांच करेगी एनआईए, कलकत्ता हाईकोर्ट ने सीआईडी से केस सौंपने का दिया आदेश

पीठ ने एनआईए अधिनियम की धारा 6 में निर्धारित अधिसूचित अपराधों की जांच केंद्रीय एजेंसी की प्राथमिकता का जिक्र करते हुए कहा कि एनआईए के पक्ष में जांच हस्तांतरण के लिए एक प्रथम दृष्टया मामला बनता है.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
कलकत्ता हाईकोर्ट ने दिया आदेश
कलकत्ता हाईकोर्ट ने दिया आदेश
फोटो : ट्विटर

कोलकाता : पश्चिम बंगाल के बीरभूम में साल 2019 में हुए धमाकों की जांच सीआईडी ​​से राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपने का आदेश दिया है. अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि केंद्रीय जांच एजेंसी की प्राथमिकता अधिसूचित अपराध की जांच करने की है. इससे पहले हाईकोर्ट की एकल पीठ ने बीरभूम धमाकों की जांच एनआईए से कराने के मामले में स्टे दे दिया था. अब जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस बिवास पटनायक की पीठ ने उस स्टे के आदेश को खारिज करते हुए केस एनआईए के हाथ सौंपने का आदेश दिया है.

जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस बिवास पटनायक की पीठ ने अपने आदेश में सीआईडी ​​को एनआईए के साथ सहयोग करने और 2019 में बीरभूम में दो मकानों में हुए विस्फोट में अपनी जांच से संबंधित सभी दस्तावेज यदि जरूरी हो तो उसे सौंपने का निर्देश दिया है. इससे पहले, पीठ ने 18 अप्रैल अपने आदेश में कहा कि केंद्रीय एजेंसी की शक्तियां राज्य एजेंसी से कहीं अधिक व्यापक हैं, उसके द्वारा जांच अधिक प्रभावी होगी और इससे न्याय सुनिश्चित होगा.

पीठ ने एनआईए अधिनियम की धारा 6 में निर्धारित अधिसूचित अपराधों की जांच केंद्रीय एजेंसी की प्राथमिकता का जिक्र करते हुए कहा कि एनआईए के पक्ष में जांच हस्तांतरण के लिए एक प्रथम दृष्टया मामला बनता है. एनआईए द्वारा जिन अधिसूचित अपराधों की जांच की जा सकती है, उनमें विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत अपराध शामिल हैं.अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि 10 मई तय की.

सीआईडी ​​अगस्त, 2019 में सदैयपुर स्थित एक मकान में और उसी साल सितंबर में लोकपुर के एक अन्य मकान में हुए विस्फोट की जांच कर रही थी. राज्य सरकार के वकील ने दावा किया कि सीआईडी ​​ने जांच संतोषजनक ढंग से की है. उन्होंने कहा कि एनआईए ने एक साल के अंतराल के बाद जांच को हस्तांतरित करने की मांग की थी.

एनआईए के वकील ने कहा कि केंद्रीय एजेंसी द्वारा जांच हाईकोर्ट की ओर से दिए गए स्थगन के कारण रुक गई थी. उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि इसे हटा दिया जाए. पीठ ने कहा कि एनआईए अधिनियम राज्य की एजेंसी को अधिसूचित अपराध के संबंध में प्राथमिकी दर्ज होने पर एक रिपोर्ट उसे प्रस्तुत करना जरूरी बनाता है, ताकि केंद्रीय एजेंसी यह निर्णय ले सके कि मामले की जांच की जाए या नहीं.

पीठ ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य की एजेंसी ने एनआईए को ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं सौंपी. सीआईडी ​​द्वारा एक साल से अधिक समय तक जांच जारी रखने के बाद एनआईए ने एनआईए अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार शक्तियों का प्रयोग किया और जांच को अपने पास हस्तांतरित किया.

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