अगले विस चुनाव में वामो व कांग्रेस में समझौते के संकेत !

Updated at : 20 Jun 2015 6:13 AM (IST)
विज्ञापन
अगले विस चुनाव में वामो व कांग्रेस में समझौते के संकेत !

गौतम देव के बयान से समझौते की संभावना को मिला बल कोलकाता : राज्य में ममता बनर्जी नेतृत्व वाली तृणमूल सरकार को शिकस्त देने के लिए क्या माकपा और कांग्रेस के बीच समझौता होगा? शुक्रवार को इस विषय पर माकपा के दिग्गज नेता गौतम देव के बयान से राजनीतिक हलचल तेज हो गयी है. शुक्रवार […]

विज्ञापन
गौतम देव के बयान से समझौते की संभावना को मिला बल
कोलकाता : राज्य में ममता बनर्जी नेतृत्व वाली तृणमूल सरकार को शिकस्त देने के लिए क्या माकपा और कांग्रेस के बीच समझौता होगा? शुक्रवार को इस विषय पर माकपा के दिग्गज नेता गौतम देव के बयान से राजनीतिक हलचल तेज हो गयी है.
शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान गौतम देव से अगले विधानसभा चुनाव में तृणमूल को शिकस्त देने के लिए माकपा व वाम मोरचा द्वारा कांग्रेस से समझौता किये जाने के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि ऐसा भी हुआ है कि वाम मोरचा द्वारा समर्थन किये जाने के बाद ही केंद्र में कांग्रेस सरकार बनाने में कामयाब रही थी. राज्य की मौजूदा स्थिति काफी विषम होती जा रही है.
तृणमूल नीतियों के खिलाफ, कई मुद्दे और फोरम पर वामपंथी और कांग्रेस का आंदोलन एक साथ भी हुआ है. हालांकि गौतम देव ने अगले विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को शिकस्त देने के लिए माकपा व वाममोरचा का कांग्रेस से समझौता किये जाने की बात से इनकार नहीं किया लेकिन इस विषय पर निर्णय आने तक इंतजार करने की बात कहीं. कथित तौर पर उन्होंने राज्य में तृणमूल कांग्रेस को शिकस्त देने के लिए एसयूसीआइ और भाकपा (माले) जैसे अन्य वामपंथी विचारधारा वाले दलों से भी समझौते की बात से इनकार भी नहीं किया.
इधर, इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस के आला नेता अब्दुल मन्नान का कहना है कि राज्य की मौजूदा हालत काफी खराब है. राज्यवासी तृणमूल सरकार के असली चेहरे से परिचित हो चुके हैं. अगले विधानसभा चुनाव में वाम मोरचा और कांग्रेस गंठबंधन के विषय में पूछने पर उन्होंने कहा कि यह तो भविष्य में ही पता चलेगा. वाम मोरचा के घटक दल, भाकपा के प्रदेश सचिव प्रबोध पांडा ने कहा है कि किसी एक नेता द्वारा जतायी जाने वाली संभावना पर वाम मोरचा का फैसला नहीं होता है. इसकी एक अनुशासनात्मक प्रक्रिया है.
राजनीति विश्लेषकों का मानना है कि माकपा के महासचिव पद पर प्रकाश करात के रहने के दौरान माकपा के साथ भाजपा और कांग्रेस की एक दूरी बनी हुई थी. ऐसा भी हुआ है कि माकपा के महासचिव का पद सीताराम येचुरी के संभालने के बाद भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ कांग्रेस द्वारा किये जाने वाले पदयात्रा में माकपा के कुछ आला नेता भी शामिल हुए थे. कयास तो लगाये जा रहे हैं कि माकपा के नेतृत्व परिवर्तन के बाद एक बार फिर कांग्रेस और वामपंथियों के बीच समझौते के आसार हैं. इसी बीच माकपा के आला नेता गौतम देव के संकेत ने उपयरुक्त संभावना को जैसे बल दे दिया है.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola