बांग्ला बोलने के लिए कोई बाध्य नहीं कर सकता : दिलीप

Published at :17 Jun 2019 1:58 AM (IST)
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बांग्ला बोलने के लिए कोई बाध्य नहीं कर सकता : दिलीप

कोलकाता : प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष व सांसद दिलीप घोष ने कहा : बंगाल में रहनेवालों को बांग्ला बोलने के लिए कोई बाध्य नहीं कर सकता है. मुख्यमंत्री कौन होती हैं, जो यह तय करेंगी कि कौन किस भाषा में बात करेगा? कौन क्या खायेगा? क्या पहनेगा? यह हमारा विशेषाधिकार है कि हम किस भाषा […]

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कोलकाता : प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष व सांसद दिलीप घोष ने कहा : बंगाल में रहनेवालों को बांग्ला बोलने के लिए कोई बाध्य नहीं कर सकता है. मुख्यमंत्री कौन होती हैं, जो यह तय करेंगी कि कौन किस भाषा में बात करेगा? कौन क्या खायेगा? क्या पहनेगा? यह हमारा विशेषाधिकार है कि हम किस भाषा में बात करेंगे. तृणमूल कांग्रेस ने दार्जिलिंग में भी इसी तरह का फरमान जारी किया था.

दार्जिलिंग की जनता ने लोकसभा चुनाव में इसका जवाब दे दिया है. अब विधानसभा चुनाव में राज्य की जनता भी इसका जवाब देगी. कोई भी उनका फरमान नहीं मानेगा. श्री घोष मुख्यमंत्री के इस बयान पर टिप्पणी कर रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि बंगाल में रहनेवालों को बांग्ला ही बोलना पड़ेगा.
सिमी व जमात से हमला करा रही है तृणमूल
श्री घोष ने दावा किया है कि डॉक्टरों पर सिमी और जमात आदि आतंकवादी समूह से जुड़े लोगों ने हमले किये हैं. उन्होंने कहा कि न सिर्फ डॉक्टरों पर, बल्कि राज्य भर में लोगों पर जो हमले हो रहे हैं. उसमें आतंकवादी समूह के लोग शामिल हैं. श्री घोष ने कहा : मुझ पर भी 50 बार हमले हुए.
इस राज्य में कोई सुरक्षित नहीं हैं. चिकित्सकों को सचिवालय में बुलाने पर अड़ी मुख्यमंत्री पर हमला बोलते हुए दिलीप घोष ने कहा कि डॉक्टर क्यों जायेंगे ममता के पास? वह ऐसी कौन-सी शख्सियत हैं कि वह आंदोलनरत चिकित्सकों के पास नहीं जा सकती हैं. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कानून को नहीं मानती हैं. राज्यपाल का सम्मान नहीं करतीं, प्रधानमंत्री का नहीं करतीं, राष्ट्रपति का नहीं करतीं. ऐसे में उम्मीद करती हैं कि उनका सम्मान दूसरे करें, तो यह संभव नहीं है.
श्री घोष ने जूनियर डॉक्टरों द्वारा मुख्यमंत्री द्वारा बातचीत के प्रस्ताव को स्वीकार करने का स्वागत करते हुए कहा कि वह चाहते हैं कि जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल समाप्त हो और इस राज्य की जनता को समस्या से मुक्ति मिले. लेकिन मुख्यमंत्री ने इसे ‘इगो’ का मुद्दा बना लिया था.
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