चुनावी बयार से बढ़ रहा प्रदूषण

Updated at : 30 Mar 2019 2:39 AM (IST)
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चुनावी बयार से बढ़ रहा प्रदूषण

कोलकाता : लोकसभा चुनाव नजदीक आ जाने से सभी पार्टियों के प्रत्याशियों ने प्रचार-प्रसार बढ़ा दिया है. हर जगह बैनर पोस्टर लगाये जा रहे हैं. पार्टी के प्रत्याशियों के जनसंपर्क के लिए दीवार लेखन किये जा रहे हैं. इसी के साथ अधिक संख्या में वाहनों के प्रयोग से पर्यावरण के लिए गंभीर समस्या उत्पन्न हो […]

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कोलकाता : लोकसभा चुनाव नजदीक आ जाने से सभी पार्टियों के प्रत्याशियों ने प्रचार-प्रसार बढ़ा दिया है. हर जगह बैनर पोस्टर लगाये जा रहे हैं. पार्टी के प्रत्याशियों के जनसंपर्क के लिए दीवार लेखन किये जा रहे हैं. इसी के साथ अधिक संख्या में वाहनों के प्रयोग से पर्यावरण के लिए गंभीर समस्या उत्पन्न हो रही है.

सभी राजनीतिक पार्टियां अपने प्रत्याशियों के प्रचार-प्रसार में जगह-जगह वैक्स बैनर व दीवार पेंटिंग करती नजर आ जाती है, जो कि पर्यावरण के अनुकूल नहीं है. इनसे पर्यावरण को काफी क्षति पहुंचती है.
दीवारों पर की जाने वाली ऑइल पेंटिंग में लेड (शीशे) व विभिन्न तत्वों की मात्रा होती है, जो बारिश होने से पानी में घुल कर जल प्रदूषण करती है, जिससे त्वचा संबंधी बीमारियां फैलती हैं. इसी के साथ प्लास्टिक और वैक्स के बैनरों के उपयोग से नाले जाम हो जाते हैं, जिससे जलीय जंतुओं पर असर पड़ता है
. प्रचार-प्रसार के दौरान उपयोग किये जाने वाले वाहनों व अन्य वाहनों के उत्सर्जन से शहर के वायु प्रदूषण का लगभग 60 प्रतिशत योगदान है.
स्थिति सीमित मोटर योग्य सड़क के भीतर वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण उनके आवागमन के लिए भयावह हो गयी है. कोलकाता पुलिस द्वारा हाल ही में वाहन घनत्व के अध्ययन के अनुसार, दक्षिण कोलकाता में वाहनों की औसत संख्या 6 लाख, मध्य कोलकाता में 13.7 लाख और उत्तरी कोलकाता में 7 लाख है.
18 जुलाई, 2008 को, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कोलकाता महानगर क्षेत्र में 15 साल से अधिक पुराने वाणिज्यिक वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध नियमित रूप से लगाया जा रहा है.
यहां तक ​​कि कोलकाता हवाई अड्डा भी प्रदूषण मुक्त नहीं है. नेताजी सुभाष अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे, कोलकाता में डीजल या पेट्रोल इंजन के साथ कई रद्दी वाहनों को विभिन्न परिवहन कार्यों के लिए संचालित किया जा रहा है, उन्हें स्वच्छ परिवहन प्रबंधन के लिए जांचना चाहिए.
पर्यावरणविद् सोमेंद्र मोहन घोष ने कहा कि चुनाव के दौरान यदि प्लास्टिक के स्थान पर कागज के बैनर और ऑइल पेंटिंग का इस्तेमाल न करके नैच्युरल पेंटिंग का उपयोग किया जाए तो प्रदूषण बहुत हद तक कम होगा. इसी के साथ शहरों में बढ़ते वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया जाना चाहिए.
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