कोलकाता : राजपथ पर दिखी बापू व बंगाल के संबंधों की झांकी
Updated at : 28 Jan 2019 3:37 AM (IST)
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कोलकाता : गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में हुई परेड में बंगाल सरकार ने राज्य के औपनिवेशिक महत्व को उजागर करने के लिए आजादी के दौर में महात्मा गांधी और बंगाल के संबंधों की झलक समेटी हुई झांकी प्रस्तुत की. राज्य के सूचना व संस्कृति विभाग की ओर से 26 जनवरी को नयी दिल्ली में गणतंत्र […]
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कोलकाता : गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में हुई परेड में बंगाल सरकार ने राज्य के औपनिवेशिक महत्व को उजागर करने के लिए आजादी के दौर में महात्मा गांधी और बंगाल के संबंधों की झलक समेटी हुई झांकी प्रस्तुत की. राज्य के सूचना व संस्कृति विभाग की ओर से 26 जनवरी को नयी दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड में, बंगाल सरकार ‘शांतिनिकेतन और बेलियाघाटा में गांधी जी’ की झांकी दिखायी गयी. इस पूरी अवधारणा की कल्पना मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने की थी.
उल्लेखनीय है कि ब्रिटिश भारत में आजादी की लड़ाई के बीच रवींद्रनाथ टैगोर के निमंत्रण का महात्मा गांधी 1915 में शांतिनिकेतन आये थे और श्यामली नाम के आवास में रुके थे. इसके बाद आजादी के ठीक पहले पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में व्यापक सांप्रदायिक दंगे हुए थे. लाख कोशिशों के बावजूद दंगे थमने का नाम नहीं ले रहे थे.
इसके बाद बापू कोलकाता पहुंचे थे और 13 अगस्त, 1947 को कोलकाता में सांप्रदायिक दंगों को शांत करने के प्रयास में, गांधी जी ने 72 घंटे का उपवास शुरू किया था. वह उपवास पर बेलियाघाटा के हैदरी मंजिल नाम की इमारत में बैठे थे. स्वतंत्रता के दिन, 15 अगस्त 1947 को महात्मा गांधी जी कोलकाता में उपवास पर थे.
गणतंत्र दिवस के दिन राजपथ पर निकली झांकी में शांतिनिकेतन की श्यामली और बेलियाघाटा की हैदरी मंजिल का दृश्य फाइबरग्लास के जरिये बनाया गया और 10 कलाकार महात्मा गांधी और अन्य सहयोगियों का किरदार निभाते हुए नजर आये. झांकी के सामने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर और बापू की एक साथ बैठकर बात करने का दृश्य बनाया गया.
उल्लेखनीय है कि 1999 के बाद राज्य की तत्कालीन वाममोर्चा की सरकार ने गणतंत्र दिवस पर आयोजित होनेवाले परेड में किसी भी तरह की झांकी नहीं भेजने का फरमान जारी कर दिया था. जब 2011 में पश्चिम बंगाल की सत्ता पर ममता बनर्जी की सरकार बनी, तब करीब 13 सालों के अंतराल के बाद से 2012 से हर वर्ष राज्य की झांकी गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल होती है. 2012 में, थीम ‘बसंतोत्सव’ था, जो शांतिनिकेतन में आयोजित किया जाता है.
2013 में स्वामी विवेकानंद की 150 वीं जयंती थी, जिसे केंद्रित कर झांकी बनायी गयी थी. 2014 पुरुलिया के छऊ नृत्य को झांकी के तौर पर प्रस्तुत किया गया था. 2016 में बंगाल के बाल कलाकार को झांकी का थीम बनाया गया था और 2017 में ‘शारदोत्सव’ की प्रस्तुति की गयी थी. 2014 और 2016 में, पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा प्रस्तुत की गयी झांकी ने प्रथम पुरस्कार जीता था.
हालांकि 2015 में पश्चिम बंगाल सरकार की कन्याश्री योजना की झांकी को केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस पर प्रस्तुत करने से मना कर दिया था, जिसे लेकर काफी विवाद हुआ था. हालांकि उसके बाद वाले साल से लगातार राज्य सरकार ने अपनी झांकी की प्रस्तुति जारी रखी है.
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