गिद्दापहाड़ में प्रायोगिक भूस्खलन चेतावनी प्रणाली शुरू की गयी

Updated at : 21 Sep 2018 4:13 AM (IST)
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गिद्दापहाड़ में प्रायोगिक भूस्खलन चेतावनी प्रणाली शुरू की गयी

कोलकाता : देश में पहली बार, पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के कर्सियांग ब्लॉक स्थित गिद्दापहाड़ गांव में एक भूस्खलन-पूर्व चेतावनी प्रणाली (एल-इडबल्यूएस) की शुरुआत की गयी है. यह एक प्रयोगिक एल-इडबल्यूएस है, जिसमें वर्षाजनित भूस्खलन संबंधी चेतावनी के प्रबंधन में जन-समुदाय एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. गिद्दापहाड़ दार्जिलिंग जिले के सबसे अधिक भूस्खलन प्रवण […]

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कोलकाता : देश में पहली बार, पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के कर्सियांग ब्लॉक स्थित गिद्दापहाड़ गांव में एक भूस्खलन-पूर्व चेतावनी प्रणाली (एल-इडबल्यूएस) की शुरुआत की गयी है. यह एक प्रयोगिक एल-इडबल्यूएस है, जिसमें वर्षाजनित भूस्खलन संबंधी चेतावनी के प्रबंधन में जन-समुदाय एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. गिद्दापहाड़ दार्जिलिंग जिले के सबसे अधिक भूस्खलन प्रवण क्षेत्रों में से एक है. यहां वर्ष 2003 से ही भूस्खलन होता रहा है.
यह गांव एक सक्रिया चल-चट्टान के शिखर पर बसा है जो पिछले दो दशकों में कई बार फिर से डांवाडोल हुआ है. यहां के मकानों और मैदानों में दरारें पड़ गयी हैं और इनमें सक्रिय हलचल के संकेत दिखाई देते हैं. 2016 में भूआपदा अनुसंधान और प्रबंधन (जीएचआरएम) केंद्र, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वक्षण, कोलकाता के भूस्खलन अध्ययन प्रभाग ने पूर्व-चेतावनी प्रणाली को विकसित करने के लक्ष्य के साथ इस क्षेत्र का अध्ययन किया. इसके परिणास्वरूप सर्वेक्षण ने गिद्दापहाड़ में लोक केंद्रित भूस्खलन पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित की है.
भूस्खलन अध्ययनों से संबंधित नोडल एजेंसी होने के नाते भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण भूस्खलनों के विभिन्न पहलुओं पर कार्य कर रहा है. दूरस्थ इलाकों मे बसे गांवों और रात के समय होने वाली भूस्खलन आपदाओं के कई उदाहरण हैं जैसे मिरिक के लिम्बुधुरा गांव में भूस्खलन, मुख्य केंद्र से थोड़ी दूर अवस्थित मलिन में भूस्खलन, सुदूर उच्च हिमालयी भूभाग में अवस्थित मालपा में भूस्खलन आदि लोगों को आसन्न संकट के प्रति सचेत करना भूवैज्ञानिकों के लिए हमेशा एक चुनौती रहा है.
सात सितंबर को भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और पश्चिम बंगाल सरकार ने गिद्दापहाड़ गांव में संयुक्त रूप से प्रायोगिक लोक केंद्रित पूर्व चेतावनी प्रणाली की शुरुआत की है. जनसमुदाय ऐसा गैर-संरचना भूस्खलन न्यूनीकरण विकल्प पाकर खुश है, जो उन्हें रात्रि में भी भूस्खलन जोखिम के प्रबंधक में सहयोग करेगा.
इस प्रणाली की शुरूआत से पूर्व भूस्खलन के प्रति जनजागृति कार्यक्रम भी आयोजित किये गये. गिद्दापहाड़ और पगलाझोरा में भूस्खलन चेतावनी से संबंधित समस्त विवरण दर्शाने वाले बिलबोर्ड भी स्थापित किये गये हैं. यह इस क्षेत्र में भूस्खलन जोखिम को कम करने के लिए जीएसआई और दार्जिलिंग जिला प्रशासन द्वारा संयूक्त रूप से उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है.
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