बंगाल में ‘भारत बंद’ बेअसर

Updated at : 11 Sep 2018 9:59 AM (IST)
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बंगाल में ‘भारत बंद’ बेअसर

कोलकाता/नयी दिल्ली. पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती कीमतों के खिलाफ कांग्रेस और विभिन्न विपक्षी पार्टियों की ओर से बुलाया गया ‘भारत बंद’ पश्चिम बंगाल में लगभग बेअसर रहा. सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने रुपये के मूल्य में गिरावट समेत मुद्दे को तो समर्थन दिया है लेकिन बंद का विरोध करने की घोषणा की. कांग्रेस ने सुबह नौ […]

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कोलकाता/नयी दिल्ली. पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती कीमतों के खिलाफ कांग्रेस और विभिन्न विपक्षी पार्टियों की ओर से बुलाया गया ‘भारत बंद’ पश्चिम बंगाल में लगभग बेअसर रहा. सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने रुपये के मूल्य में गिरावट समेत मुद्दे को तो समर्थन दिया है लेकिन बंद का विरोध करने की घोषणा की. कांग्रेस ने सुबह नौ बजे से छह घंटे का बंद बुलाया था जबकि वाममोर्चा ने बंद का समर्थन किया और जगह-जगह जुलूस निकाले. वाममोर्चा ने सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक 12 घंटे के बंद का एलान किया था.
हालांकि भारत बंद के दौरान कई राज्यों में जनजीवन प्रभावित हुआ. इस दौरान सड़कों से वाहन नदारद रहे. कहीं खुद से, तो कहीं जोर जबरदस्ती से कार्यालय व शैक्षणिक संस्थान बंद रहे. हिंसा की कुछ घटनाओं को छोड़ बंद शांतिपूर्ण रहा.
बिहार में यातायात व्यवस्था ठप रहने से एक बीमार बच्ची और एक बुजुर्ग की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो गयी. ओड़िशा में ट्रेन सेवाएं बाधित रहीं. पंजाब, हरियाणा, केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र और अरुणाचल में भी बंद से जनजीन प्रभावित हुआ. इस बंद का आह्वान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में 21 विपक्षी दलों ने किया था.
इसकी शुरुआत दिल्ली में राजघाट से हुई, जहां राहुल ने बापू की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की और कैलास मानसरोवर झील से लाया गया पवित्र जल और वहां का पत्थर चढ़ाया.
इसके बाद दिल्ली में कांग्रेस के नेतृत्व में 16 विपक्षी दलों ने एक मंच पर आकर मोदी सरकार को घेरा. आगामी लोकसभा चुनाव में एकजुट होकर लड़ने और भाजपा को हराने का आह्वान किया.
रामलीला मैदान में अायोजित विरोध-प्रदर्शन में यूपीए प्रमुख सोनिया गांधी, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, राकांपा प्रमुख शरद पवार समेत विभिन्न दलों के नेता शामिल हुए. विपक्षी नेताओं ने राजघाट से रामलीला मैदान तक मार्च भी किया. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि बंद में 21 पार्टियां में शामिल हैं. वामपंथी दलों ने अपने स्तर से भी ‘भारत बंद’ का आह्वान कर रखा था. माकपा प्रमुख सीताराम येचुरी सहित वामदल नेताओं ने संसद मार्ग थाने में गिरफ्तारी दी.
इन दलों का मिला साथ : सपा,बसपा, राकांपा, द्रमुक, राजद , झामुमो, नेशनल कान्फ्रेंस, झारखंड विकास मोर्चा-प्रजातांत्रिक, माकपा, भाकपा, जद(एस), आप आप, टीडीपी, रालोद, एआइयूडीएफ, केरल कांग्रेस (एम), आरएसपी, आइयूएमएल, स्वाभिमान पक्ष और लोकतांत्रिक जनता दल ने कांग्रेस के बंद का समर्थन किया. हालांकि सपा, बसपा और वाम दलों का कोई नेता राहुल गांधी के साथ मंच पर नहीं दिखा.
सरकारी कर्मियों की हाजिरी सामान्य रही: राज्य में बंद का मामूली असर रहा. सभी स्कूल और कॉलेज खुले रहे और परीक्षाएं भी हुईं, जबकि सरकारी कार्यालयों में भी उपस्थिति सामान्य रही. प्रदेश सचिवालय में कर्मचारियों की उपस्थिति 98 फीसदी से अधिक दर्ज हुई और राज्य सरकार के बाकी कार्यालयों में कर्मचारियों की हाजिरी 97 फीसदी रही. एयरपोर्ट पर विमान परिचालन सामान्य रहा. कोलकाता ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, बंद का असर जन जीवन पर नहीं पड़ा, इसके लिए सभी उपाय किये गये. बैरकपुर शिल्पांचल में कामकाज स्वाभाविक रहा.
पूर्व रेलवे के अंतर्गत सियालदह और हावड़ा खंड पर बंद समर्थकों ने कोलकाता के यादवपुर, दमदम कैंटोनमेंट और हुगली जिले के श्रीरामपुर स्टेशनों पर रेल परिचालन अवरुद्ध करने की कोशिश की, लेकिन रेल सेवा फिर भी जारी रही. बारासात में कुछ देर तक बनगांव लोकल को प्रदर्शनकारियों ने रोके रखा. कुछ इलाकों जैसे हावड़ा जिले के दासनगर औद्योगिक क्षेत्र में बंद समर्थकों के साथ पुलिस की झड़प हुई. कांग्रेस की ओर से विभिन्न जिलों के अलावा महानगर में मौलाली से जुलूस निकाला गया.
इधर, थिएटर रोड में निकाले गये जुलूस के दौरान पुलिस के साथ कांग्रेस समर्थकों की हाथापाई हुई. कांग्रेस ने पुलिस पर लाठीचार्ज करने का आरोप लगाया. हालांकि पुलिस की ओर से इसे खारिज किया गया. हाजरा मोड़ पर भी कांग्रेस समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया. श्यामबाजार मोड़ पर भी कांग्रेस ने प्रदर्शन व पथावरोध किया. पुलिस के हस्तक्षेप से प्रदर्शनकारियों को हटा दिया गया. मध्यमग्राम चौरास्ता पर वाम प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस की धक्कामुक्की भी हुई.
इस बीच, भारत बंद को भाजपा ने असफल बताया है. पार्टी ने कहा कि बंद के दौरान हिंसा कांग्रेस व विपक्षी दलों की असफलता है. भाजपा ने हिंसा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि देश की राजनीति हिंसा के जरिये होगी? कीमतों में बढ़ोतरी पर सफाई देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय कारणों के चलते तेल की कीमतें बढ़ रही हैं. केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विपक्षी दलों पर हमला करते हुए कहा कि बंद के दौरान बिहार में दो साल की बच्ची की जान चली गयी. इस मौत का जिम्मेदार कौन है? हम जनता की परेशानी का समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने देश में महंगाई कम करने की कोशिश की है और सफलता भी मिली है. पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने तेल की बढ़ती कीमतों पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की.
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