कोलकाता : नये दिवालिया कानून से अर्थव्यवस्था में सुधार
Updated at : 19 Aug 2018 6:39 AM (IST)
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वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग बोले कोलकाता : केंद्र सरकार ने पिछले चार वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए कई कठाेर कदम उठाये हैं. जीएसटी लागू करने से लेकर भारतीय दिवालिया संहिता कानून में संशोधन का भारतीय अर्थव्यवस्था पर दूरगामी व गहरा प्रभाव पड़ेगा. ये बातें मर्चेंट चेंबर […]
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वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग बोले
कोलकाता : केंद्र सरकार ने पिछले चार वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए कई कठाेर कदम उठाये हैं. जीएसटी लागू करने से लेकर भारतीय दिवालिया संहिता कानून में संशोधन का भारतीय अर्थव्यवस्था पर दूरगामी व गहरा प्रभाव पड़ेगा. ये बातें मर्चेंट चेंबर में ‘इंडियन इकाेनाॅमी : करेंट ट्रेंड एंड फ्यूचर आउटलुक’ पर परिचर्चा में वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहीं.
उन्होंने कहा कि दिवालिया कानून के लागू होने के बाद से ही राष्ट्रीय अपीलय पंचाट के माध्यम से बीमार कंपनियों के मामलों का निपटारा जारी है. वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में भी बदलाव आया है. स्टार्टअप की वजह से लोगों को रोजगार के साधन उपलब्ध हुए हैं.
इपीएफओ के आंकड़े के मुताबिक असंगठित क्षेत्र में 70 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं. सरकार ने रेरा कानून लाकर रियल स्टेट क्षेत्र में भी बदलाव लाने का प्रयास किया है. भारतीय अर्थव्यवस्था 7.5 फीसदी की दर से लगातार विकास कर रही है. हालांकि राजकोषीय घाटे से उबरने के लिए सरकार वित्तीय प्रबंधन कर रही है.
वर्ष 2030 तक भारतीय अर्थव्यवस्था काफी मजबूती के साथ उभरेगी. जिसके संकेत अभी से मिल रहे हैं. जीएसटी के बाद करीब 1.25 करोड़ नये करधारकों को सूचीबद्ध किया गया. वहीं, इससे पहले यह केवल 62 लाख था.
परिचर्चा के आरंभ में एमसीसीआइ के अध्यक्ष रमेश अग्रवाल ने स्वागत भाषण देते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति व इसके समक्ष उपस्थित चुनौतियों का जिक्र किया. साथ ही श्री गर्ग को उन उद्योग जगत के समक्ष उपस्थित चुनौतियों के बारे में बताया व सरकार से इसके विकास के लिए सहयोग की अपील की. वहीं, चेंबर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विशाल झांझरिया ने धन्यवाद ज्ञापन किया.
रुपया संभवत: 68-69 प्रति डॉलर पर टिकेगा : गर्ग
कोलकाता : आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने शनिवार को कहा कि इस महीने सकारात्मक पूंजी प्रवाह से रुपया 68-69 प्रति डॉलर पर टिकेगा. हाल के समय में रुपये में जोरदार गिरावट का सिलसिला देखने को मिला है. एशिया की सभी मुद्राओं में रुपये का प्रदर्शन हाल के समय में सबसे खराब रहा है. मंगलवार को रुपया 70.09 प्रति डॉलर के अपने सर्वकालिक निचले स्तर पर आया था. उन्होंने कहा कि तुर्की में हालिया संकट से भारत में धारणा प्रभावित नहीं हुई है. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का प्रवाह प्रभावित नहीं हुआ है. जुलाई में बाजार से कुल मिला कर विदेशी पूंजी बाहर नहीं गयी.
उन्होंने कहा कि इस वर्ष पहले तीन माह में पूंजी की निकासी हुई थी, जबकि पिछले साल कुल विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने शुद्ध रूप से 20 अरब डॉलर की निकासी की थी. गर्ग ने कहा कि यदि कच्चे तेल के दाम और नहीं बढ़ते हैं, तो रुपये के 68-69 प्रति डॉलर पर टिकने की उम्मीद है. कच्चे तेल के दाम में उछाल के चलते भारत का चालू खाते का घाटा बढ कर जीडीपी के 1.9 प्रतिशत पर पहुंच गया है. यही करण है कि रुपया डालर के मुकाबले कमजोर पड़ रहा है. सरकार का मानना है कि संतुलन के लिए भारत में विदेशी पूंजी प्रवाह ऊंचा रहना चाहिए.
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