अभी महागठबंधन संभव नहीं : येचुरी
Updated at : 13 Jul 2018 3:27 AM (IST)
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कोलकाता : भाजपा नीत केंद्र सरकार की नीतियों से देश की जनता परेशान हो चुकी है. भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए जनता का दबाव है. यही वजह है कि विपक्षी पार्टियां एक साथ आ रही हैं. हालांकि, मौजूदा समय में विपक्षी दलों का महागठबंधन संभव नहीं है. राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन लोकसभा […]
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कोलकाता : भाजपा नीत केंद्र सरकार की नीतियों से देश की जनता परेशान हो चुकी है. भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए जनता का दबाव है. यही वजह है कि विपक्षी पार्टियां एक साथ आ रही हैं. हालांकि, मौजूदा समय में विपक्षी दलों का महागठबंधन संभव नहीं है.
राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन लोकसभा चुनाव के बाद ही आकार ले सकता है.
हालांकि चुनाव से पहले कई राज्यों में गठबंधन अलग-अलग रूपों में दिखेगा. मुख्य बात है कि लोकसभा चुनाव के दौरान ऐसी नीति अपनायी जायेगी, ताकि भाजपा विरोधी वोट बंटने न पाये. भाजपा सरकार को हटाना ही हमारा मुख्य उद्देश्य होना चाहिये. इसी को ध्यान में रखते हुए माकपा अलग-अलग राज्यों में धर्मनिरपेक्ष पार्टियों के साथ खड़ी होगी. वर्तमान में देश को नेता नहीं, सटीक नीति की जरूरत है. ये बातें माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने कही. वह गुरुवार को महानगर स्थित माकपा राज्य कमेटी के कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे.
व्हॉट ए जोक
संवाददाता सम्मेलन के दौरान माकपा के महासचिव से जब पूछा गया कि क्या भाजपा के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी के कथित अाह्वान पर विपक्षी दलों के ब्रिगेड में क्या माकपा शामिल होगी, इस पर येचुरी ने हंसते हुए कहा कि व्हाॅट ए जोक (क्या मजाक है). उन्होंने आरोप लगाया कि त्रिपुरा की तरह पश्चिम बंगाल में भी लोकतंत्र की हत्या हुई है. राज्य में हुए पंचायत चुनाव के दौरान हुई हिंसा से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है. ऐसे में यदि तृणमूल कांग्रेस की ओर से लोकतंत्र की रक्षा की बात कही जाये तो यह मजाक के समान है.
वाम दलों का देशव्यापी प्रदर्शन 24 जुलाई को :
पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाते हुए येचुरी ने भाजपा और तृणमूल कांग्रेस की जमकर आलोचना की. उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों में लोकतंत्र की हत्या के विरोध में 24 जुलाई को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेंगे. साथ ही संसद के समक्ष भी प्रदर्शन किया जायेगा.
भाजपा के सारे दावे फेल
येचुरी ने आरोप लगाया है कि भाजपा के सारे दावे फेल हो गये हैं. चाहे वह युवाओं को रोजगार देने की बात हो या किसानों की स्थिति सुधार की बात हो. इधर, फसल की कीमत तय करने वाले ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ (एमएसपी) को किसानों का कानूनी अधिकार का दर्जा जाने को उनहोंने जरूरी बताया है.येचुरी ने कहा कि देश में वैकल्पिक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक सरकार लोकसभा चुनाव के बाद ही बन सकती है. क्षेत्रीय धर्मनिरपेक्ष ताकतें भी आम चुनाव के बाद एकसाथ आयेंगी.
हालांकि, उन्होंने वैकल्पिक धर्मनिरपेक्ष मोरचा का नाम नहीं बताया. यह पूछे जाने पर कि क्या माकपा वैकल्पिक धर्मनिरपेक्ष मोर्चा का हिस्सा बनेगी तो उन्होंने कहा कि पहले भी पार्टी ने केंद्र सरकार को बाहर से समर्थन दिया था. ऐसा वर्ष 1989, 1996 और 2004 में हुए लोकसभा चुनाव के बाद हुआ था. यह पूछे जाने पर कि अगर तृणमूल कांग्रेस को विपक्षी मोरचा में शामिल किया गया तो क्या माकपा उसका हिस्सा बनेगी तो इस पर उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल और भाजपा में गुप्त तालमेल है और तृणमूल की भाजपा से लड़ने की विश्वसनीयता नहीं है.
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