दस सूत्री मांगों पर आंदोलन की घोषणा
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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श्रमिक संगठनों ने मनाया संयुक्त रूप से विरोध दिवस, कारखाने के समक्ष की सभा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से पूछा सवाल- ‘क्या इन्हीं अच्छे दिनों के लिए मांगा था वोट’ दुर्गोत्सव से पहले स्थानीय सांसद सह राज्यमंत्री बाबुल ने दिया कैसा उपहारअपने क्षेत्र को रुपनारायणपुर. हिंदूस्तान केबल्स लिमिटेड (एचसीएल) की बंदी के केंद्रीय केबिनेट के निर्णय […]
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श्रमिक संगठनों ने मनाया संयुक्त रूप से विरोध दिवस, कारखाने के समक्ष की सभा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से पूछा सवाल- ‘क्या इन्हीं अच्छे दिनों के लिए मांगा था वोट’
दुर्गोत्सव से पहले स्थानीय सांसद सह राज्यमंत्री बाबुल ने दिया कैसा उपहारअपने क्षेत्र को
रुपनारायणपुर. हिंदूस्तान केबल्स लिमिटेड (एचसीएल) की बंदी के केंद्रीय केबिनेट के निर्णय के बाद गुरुवार को रुपनारायणपुर इकाई में श्रमिक संगठनों ने विरोध दिवस मनाया तथा गेट मीटिंग की. शिष्टमंडल ने दस सूत्री मांगों का ज्ञापन यूनिट हेड उपमहाप्रबंधक बासुदेव दे को सौंपा. श्री दे ने आश्वासन दिया कि शुक्रवार को कोलकाता में होनेवाली उच्चस्तरीय बैठक में वे इन सभी मांगों को पेश करेंगे.
सीटू नेता कंचन दासगुप्ता, मधू घोष, इंटक नेता सीएस गोराया, उमेश झा, एटक नेता गौतम लाहिड़ी, नयन गोस्वामी, एचएमएस नेता बी बाग आदि ने सभा को संबोधित किया. वक्ताओं ने केंद्र सरकार और स्थानीय सांसद सह केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रलय के राज्य मंत्री बाबुल सुप्रियो को संवेदनहीन तथा अमानवीय बताया. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा त्यौहार दुर्गापूजा सर पर है. इस दौरान श्रमिकों को अपने मालिक या सरकार से बोनस मिलता है ताकि वे त्योहार के आनंद में पैसे की तंगी न रहे. हर्षोल्लास के साथ माता की आराधना हो सके. केंद्र सरकार ने पूजा से दो दिन पहले उपहार देना तो दूर की बात, हजारों जिंदगी ही छिन ली. स्थानीय सांसद व मंत्री श्री सुप्रियो को आम जनता सहित एचसीएल के कर्मियों ने बड़ी आशा के साथ जीत दिलायी थी कि वे उनके हितों की रक्षा करेंगे.
रक्षा करने के बजाए लगातार झूठा प्रचार कर श्रमिकों के भावना के साथ खिलवाड़ करते रहे. प्रधानमंत्री ने ‘अच्छे दिन आनेवाले है’ का नारा दिया था. क्या इसी अच्छे दिन की उन्होंने बात कही थी? बेकारों को रोजगार देने का दावा किया था. लेकिन ठीक इसके उलट रोजगारों को बेकार बना दिया. कांग्रेस संचालित यूपीए सरकार ने संस्था के पुनरुद्धार के लिए लगातार प्रयास किया. जिसका लाभ श्रमिकों के नौकरी का समय काल बढ़ने के रुप में मिला. नरेन्द्र मोदी सरकार ने प्रयास तो किया ही नहीं, जो प्रयास अंतिम चरण में पूरा होनेवाला था, उसे रोककर संस्था को ही बंद कर दिया. इसका खामियाजा श्रमिक और उसके परिवार को ही नहीं, हजारों परिवारों को भुगतना पड़ेगा.
मांगे पूरी न होने पर आंदेालन
एचसीएल की बंदी के बाद श्रमिक और इलाके के नागरिकों की हितों की रक्षा को लेकर गुरुवार को यूनियन नेताओं ने आपसी बैठक की और दस सूत्री मांगों पर चर्चा कर इकाई प्रमुख श्री दे को ज्ञापन सौंपा गया. मांगे पूरी न होने पर लगातार आंदोलन की बात कही गयी.
इंटक नेता उमेश झा ने बताया कि दस सूत्री मांगों में कहा गया कि वीआरएस के बाद श्रमिकों को जो भी पैसा मिलेगा, वीआरएस लेने से पहले टेबल फॉर्म में सभी श्रमिकों को इसकी जानकारी देनी होगी कि किस मद में कौन सा पैसा मिल रहा है. जब तक श्रमिकों को संपूर्ण पैसा का भूगतान नहीं हो जाता, तब तक आवासों में बिजली और पानी की सप्लाई बहाल रखनी होगी. कंपनी के आवास श्रमिकों को लीज पर दिया जाय. इससे सरकार को अतिरिक्त पैसा , श्रमिकों को आवास और इलाके का सामंजस्य बरकरार रहेगा. संस्था की नगरी में जितने भी स्कूल चल रहे है, उनकी यथास्थिति बहाल रखनी होगी. बकाया वेतन का भुगतान तत्काल करना होगा और वीआरएस की राशि का भुगतान अगले वित्तिय वर्ष में करना होगा.
वर्ष 2007 का वेज इस वर्ष के बाद अवकाश ग्रहण करने वाले हर श्रमिक व कर्मचारी को एरियर के रुप में दिया जाय. नैनी इकाई के श्रमिकों को मिलनेवाला 600 रुपये का अलाउंस रुपनारायणपुर इकाई के श्रमिकों केा भी देना होगा. इन मांगों का ज्ञापन श्री दे को सौंपा गया. यही ज्ञापन इससे पूर्व यूनियनों ने सीएमडी को सौंपा था. श्री झा ने बताया कि मांगे पूरी न होने पर आंदोलन निरंतर चलेगा .
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